अमित शाह
केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने देश को नशामुक्त बनाने को लेकर बड़ा लक्ष्य सामने रखा है. मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में आयोजित गौपालक सम्मेलन में उन्होंने कहा कि देश नक्सलवाद की समस्या से अब निजात पा चुका है और सरकार का अगला बड़ा फोकस नशे के खिलाफ लड़ाई पर होगा. शाह ने कहा कि वर्ष 2029 के अंत तक भारत को नशामुक्त बनाने का लक्ष्य रखा गया है.
उन्होंने मध्य प्रदेश के लोगों से भी अपील की कि वे 31 दिसंबर 2029 तक अपने राज्य को पूरी तरह नशामुक्त बनाने का संकल्प लें. शाह के मुताबिक, इस दिशा में केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर हर संभव योजना तैयार करेंगी. उनका कहना था कि नशे से दूर रखने की कोशिशों का सबसे बड़ा फायदा देश के युवाओं को मिलेगा और उन्हें बेहतर दिशा देने में मदद मिलेगी.
पशुपालन और दूध उत्पादन पर भी जोर
भोपाल के कार्यक्रम में अमित शाह ने मध्य प्रदेश में पशुपालन को बढ़ावा देने के प्रयासों की भी सराहना की. उन्होंने करीब 50 एकड़ जमीन में गाय और भैंसों की नस्ल सुधार से जुड़े काम की शुरुआत के प्रयासों का जिक्र किया. उनके मुताबिक, इस तरह के कदमों से राज्य आने वाले तीन वर्षों में रोजाना 50 लाख लीटर दूध उत्पादन के लक्ष्य की ओर बढ़ सकता है.
उन्होंने कहा कि बेहतर नस्ल, वैज्ञानिक तरीके और योजनाबद्ध प्रयासों के जरिए पशुपालन से जुड़े लोगों की आमदनी बढ़ाने के साथ-साथ दूध उत्पादन में भी इजाफा किया जा सकता है.
नई न्याय संहिता को लेकर क्या बोले शाह?
कार्यक्रम के दौरान न्याय संहिता पर आधारित एक प्रदर्शनी का भी शुभारंभ किया गया. अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने अंग्रेजों के समय के कई कानूनों को हटाकर नई भारतीय न्याय संहिता लागू की है.
शाह ने पुरानी न्याय व्यवस्था का जिक्र करते हुए कहा कि लंबे समय तक अदालतों में मामलों के चलते लोगों के बीच ‘तारीख पर तारीख’ जैसी धारणा बनी रही. उन्होंने दावा किया कि नई व्यवस्था में एफआईआर दर्ज होने के बाद तीन साल के भीतर दोषी को सजा दिलाने का प्रावधान किया गया है.
उनके मुताबिक, अंग्रेजी शासन के दौरान बनाए गए कानूनों का उद्देश्य तत्कालीन सरकार के हितों की रक्षा करना था, जबकि नई न्याय संहिता का केंद्र बिंदु न्याय दिलाना है. उन्होंने कहा कि सजा का उद्देश्य केवल अपराध पर रोक लगाना है.
तकनीक और सुरक्षा पर भी फोकस
अमित शाह ने नई न्याय व्यवस्था में तकनीक के इस्तेमाल को भी अहम बताया. इसमें ऑनलाइन एफआईआर, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और फॉरेंसिक साइंस लैब यानी एफएसएल से जुड़े प्रावधान शामिल किए गए हैं. उनका कहना था कि वैज्ञानिक तरीकों और आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल से न्याय व्यवस्था को ज्यादा प्रभावी और तेज बनाया जा सकेगा.
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-भारत एक्सप्रेस
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