सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के ऑफिस से जुड़े भ्रष्टाचार के आरोपों की सीबीआई जांच के आदेश के खिलाफ दायर पंजाब सरकार की याचिका पर आज सुनवाई से इनकार कर दिया है. सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ के समक्ष जल्द सुनवाई की मांग को लेकर वरिष्ठ वकील विकास सिंह ने मेंशन किया.
कोर्ट ने राज्य सरकार की ओर से दायर याचिका पर 8 अक्टूबर को सुनवाई का भरोसा दिया है. जस्टिस मोहना ने कहा कि एक दिन में कुछ नही होगा. मामले की सुनवाई के दौरान पंजाब सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ वकील विकास सिंह ने कहा कि मामले में जल्द सुनवाई की जरूरत है, क्योंकि राज्य चुनाव की ओर बढ़ रहा है.
विकास सिंह ने कहा कि हाई कोर्ट का सीबीआई को एफआईआर दर्ज करने का निर्देश देना सही नही है. उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के विजय मदनलाल चौधरी फैसले के पैराग्राफ 15 का हवाला देते हुए कहा कि एफआईआर दर्ज करने की कार्रवाई के लिए संज्ञेय अपराध का आधार होना जरूरी है.
उन्होंने कहा कि यह मामला ट्रांसफर और पोस्टिंग से जुड़े आरोपों से संबंधित है और राज्य सरकार मामले की जांच कर रही थी. ईडी की ओर से दिए गए दस्तावेज भी पूरी तरह साफ नही थे. विकास सिंह ने कहा कि चुनाव के समय इस तरह के मामलों को उठाया जा रहा है और यह मामला संघीय ढांचे से भी जुड़ा है.
पंजाब सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है. पंजाब हरियाणा हाई कोर्ट ने सीबीआई जांच का आदेश दिया था. जिसके खिलाफ पंजाब सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर की है. पंजाब सरकार ने यह याचिका मंगलवार तड़के करीब 1:42 बजे दाखिल की. हाई कोर्ट ने 5 अक्टूबर को एफआईआर दर्ज कर तत्काल जांच का आदेश दिया था.
दो महीने में जांच की स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश
कोर्ट ने अपने 66 पेज के आदेश में कहा था कि कि सीबीआई मामले की जांच कर दो महीने के अंदर स्टेट्स रिपोर्ट दाखिल करे. कोर्ट 7 दिसंबर को मामले में अगली सुनवाई करेगा. यह जनहित याचिका निखिल सराफ ने दायर की थी. दायर याचिका में पंजाब के वरिष्ठ अधिकारियों पर तबादलों के बदले नकदी लेने, अनुकूल नीतियां बनवाने, निविदाओं में कथित लेनदेन तथा अन्य गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगाए गए थे.
याचिकाकर्ता ने ईडी की ओर से पंजाब के डीजीपी गौरव यादव को भेजे गए पत्र में उठाए गए मुद्दों की सीबीआई से जांच कराने की मांग की थी.
याचिका में कहा गया था कि इन आरोपों से राज्य सरकार के कामकाज पर गंभीर सवाल उठते हैं और पंजाब व विजिलेंस ब्यूरो के दायरे से बाहर किसी स्वतंत्र एजेंसी से इसकी जांच होनी चाहिए.
मामला मुख्यमंत्री भगवंत मान के ओएसडी राजबीर सिंह घुमन और उनके सहयोगियों नितिन गोहन तथा बीर देविंदर के खिलाफ ईडी की ओर से लगाए गए आरोपों से जुड़ा है.
ये भी पढ़ें- ‘सऊदी के हुक्म पर ‘किराए की फौज’ भेजेगा PAK!’ ‘मक्का पैक्ट’ हुआ एक्टिव, अब कैसे मान गया मुनीर?
-भारत एक्सप्रेस
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.



