DRDO HAPS Airship Test: भारत ने एयरोस्पेस टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में एक और ऐतिहासिक कामयाबी हासिल की है. रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन यानी DRDO ने ‘हाई एल्टीट्यूड प्लेटफॉर्म सिस्टम’ (HAPS) का सफल परीक्षण कर देश की रक्षा क्षमताओं को एक नई ऊंचाई दी है. परीक्षण के दौरान हवा से हल्का यह एयरशिप समुद्र तल से लगभग 21 किलोमीटर की रिकॉर्ड ऊंचाई तक पहुंचा.
सबसे खास बात यह रही कि HAPS ने करीब 20 किलोमीटर की ऊंचाई पर 30 मिनट से अधिक समय तक स्थिर उड़ान भरी और बिना किसी रुकावट के ग्राउंड स्टेशन को रियल-टाइम डेटा और हाई-क्वालिटी वीडियो फीड भेजता रहा.
आगरा की लैब में तैयार हुआ स्वदेशी सिस्टम
इस अत्याधुनिक हाई-एल्टीट्यूड प्लेटफॉर्म को आगरा स्थित DRDO की प्रयोगशाला ‘एरियल डिलीवरी रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टेब्लिशमेंट’ (ADRDE) ने तैयार किया है. यह एक ऐसा एयरशिप है जो समताप मंडल (Stratosphere) में लंबे समय तक टिककर उड़ने में सक्षम है.
आसान शब्दों में कहें तो यह बिना किसी पायलट के आसमान में एक स्थायी निगरानी टावर की तरह काम करेगा. इसके जरिए सीमा पार दुश्मनों की हर छोटी-बड़ी गतिविधि, घुसपैठ और जमीनी हरकतों पर लगातार नजर रखी जा सकेगी.
भारतीय वायुसेना का मिला सहयोग
इस कठिन और बेहद महत्वपूर्ण ट्रायल को पूरा करने में भारतीय वायु सेना (IAF), मिलिट्री एयरवर्दीनेस सर्टिफिकेशन सेंटर (CEMILAC), डीजीसीए (DGCA) और एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) ने मिलकर काम किया. उड़ान के दौरान onboard कैमरे, जीपीएस रिसीवर और एल्टीट्यूड कंट्रोल मैकेनिज्म जैसे सभी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण उम्मीद के मुताबिक काम करते रहे.
इस सफलता पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने DRDO, वायुसेना और औद्योगिक साझेदारों को बधाई दी. उन्होंने इसे एडवांस्ड एयरोस्पेस तकनीक के क्षेत्र में ‘आत्मनिर्भर भारत’ की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर करार दिया.
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-भारत एक्सप्रेस
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