सुप्रीम कोर्ट ने स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (एसएमए) बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को लेकर बड़ा सुझाव दिया है. कोर्ट ने केंद्र सरकार को सुझाव दिया है कि आर्थिक तंगी से जूझ रहे मरीजों को ईलाज के लिए एक विशेष स्थायी फंड बनाए. ताकि जीवनरक्षक इलाज के लिए आर्थिक मदद का इंतजाम लगातार बना रहे.
सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने यह सुझाव दिया है. कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि व्यक्तिगत दान और कभी कभार मिलने वाली सरकारी ग्रांट काफी नही है. साथ ही जान बचाने वाले इलाज के लिए पैसे का इंतजाम करने के लिए एक स्थायी और नियमित व्यवस्था की बहुत जरूरत है.
कोर्ट ने इस बात पर भी जोर दिया कि ऐसी किसी भी व्यवस्था में संसाधनों का सबसे बेहतर इस्तेमाल पूरी तरह से बिना मुनाफे के आधार परकिया जाना चाहिए, ताकि मरीजों को सीधे मदद मिल सके. कोर्ट ने एसएमए मरीजों के लिए पर्याप्त, व्यवस्थित और किफायती हेल्थकेयर इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी से जुड़े मामले की.स्वतः संज्ञान लेते हुए सुनवाई कर रहा है. कोर्ट ने सहायता के लिए अपराजिता सिंह को एमिकस क्यूरी नियुक्त किया है. इन मरीजों के.इलाज में करोड़ों रुपए खर्च आता है. कोर्ट ने इस मामले में नियुक्त एमिकस क्यूरी अपराजिता सिंह से विस्तृत रिपोर्ट देने को कहा है.
CSR पहल के लिए स्थायी फंड बनाने पर जोर
इस प्रस्ताव में कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी पहल संस्थागत दानदाताओं और केंद्र सरकार के योगदान सहित फंड बनाने और उसे बनाए रखने के तरीकों पर विचार किया जाना था. एमिकस क्यूरी ने कोर्ट को बताया कि एक हलफनामा पहले ही दाखिल किया जा चुका है और उसे रिकॉर्ड पर रखा जाएगा, तो सीजेआई सूर्यकांत ने इस बात पर जोर दिया कि मुख्य मकसद कभी-कभार मिलने वाले व्यक्तिगत दान या सरकार से मिलने वाली अस्थायी ग्रांट पर निर्भर रहने के बजाए, फंडिंग का एक स्थायी और नियमित जरिया बनाना होना चाहिए.
कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि पहली प्राथमिकता फंड जुटाना होना चाहिए और उसके बाद उसका सबसे अच्छा और बिना मुनाफे वाला इस्तेमाल मरीजों के भलाई के लिए किया जाना चाहिए. सीजेआई सूर्यकांत ने एमिकस क्यूरी से एक ऑटोमेटेड और खुद से चलने वाला फाइनेंशियल फ्रेमवर्क तैयार करने को कहा, जिसपर सिंह ने पुष्टि की कि प्रस्ताव पर तेजी से काम चल रहा है.
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-भारत एक्सप्रेस
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