मदन सबनविस की हालिया पुस्तक Policies That Shaped Modern India (रूपा पब्लिकेशंस, सितंबर 2026, 208 पृष्ठ, हार्डबाइंड) भारत की आर्थिक और वित्तीय नीतियों की कहानी को एक नए और रोचक नजरिए से पेश करती है. यह किताब सिर्फ नीतियों की सूची नहीं है, बल्कि राजनीति और अर्थव्यवस्था के बीच के गहरे संबंध को खोलती है. लेखक खुद को ‘एक्सीडेंटल इकोनॉमिस्ट’ कहते हैं कि उन्होंने सार्वजनिक सेवा और प्रबंधन के रास्ते बंद होने के बाद अर्थशास्त्र को अपनाया. वर्तमान में बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री के रूप में काम करने वाले सबनविस पिछले तीन दशकों से अधिक समय से कॉरपोरेट अर्थशास्त्री हैं. उन्होंने हजारों लेख लिखे हैं और कई पुस्तकें प्रकाशित की हैं. उनकी यह किताब भारत की विकास यात्रा को समझने के लिए एक उपयोगी संदर्भ है.
मूल विषय
पुस्तक नीति-निर्माण की प्रयोगात्मक प्रकृति पर केंद्रित है. यह एकल-पार्टी प्रभुत्व के दौर से लेकर 1980 के दशक के अंत और 1990 के दशक के बदलावों तक की नीतियों का विश्लेषण करती है. कुछ नीतियां अर्थव्यवस्था और वित्तीय क्षेत्र को पूरी तरह बदल गईं, जबकि कुछ अपेक्षित प्रभाव नहीं छोड़ पाईं. फिर भी लेखक उन्हें महत्वपूर्ण मानते हैं क्योंकि वे मिलकर भारत के आर्थिक प्रयोगों की कहानी बयान करती हैं.
सबनविस दो ‘पी’, Policies (नीतियां) और Politics (राजनीति) के बीच की दूरी पाटने का प्रयास करते हैं. शुरुआत में नीतियां मुख्य रूप से समाजवादी विचारधारा से प्रभावित थीं. 1990 के दशक के बाद आवश्यक बदलाव आया, जिसने भारत को खुद पर दांव लगाने का मौका दिया और विकास की कहानी को आकार दिया. किताब में राजनीतिक नारों (slogans) की छिपी हुई भूमिका भी उजागर की गई है. लेखक बताते हैं कि ये नारे सिर्फ प्रचार नहीं होते बल्कि वे उपभोक्ता की मानसिकता और आगे के रास्ते को प्रभावित करते हैं, जितना हम आमतौर पर मानते हैं उससे कहीं ज्यादा.
कवर पर भारत का नक्शा अखबार की कतरनों से बना है, और हाथों में हथौड़ा व छेनी दिखाए गए हैं. यह प्रतीक है कि आधुनिक भारत को नीतिगत हथौड़े और छेनी से गढ़ा गया है. ‘Great Cash Clean-up’ जैसी सुर्खियां नोटबंदी जैसे बड़े फैसलों की याद दिलाती हैं.
किताब क्यों है महत्वपूर्ण?
यह पुस्तक उन लोगों के लिए खास है जो अर्थशास्त्र और भारत की कहानी में रुचि रखते हैं. जो लोग इन दौरों से गुजरे हैं, उन्हें डेजा वू का अहसास होगा. यह अतीत की परिभाषा और भविष्य की संभावनाओं के संगम पर भारत की अर्थव्यवस्था और वित्त की कहानी है. सबनविस का अनुभव-विकास बैंकिंग, कमोडिटी मार्केट्स, क्रेडिट रेटिंग और बैंकिंग-किताब को व्यावहारिक और संतुलित बनाता है. वे नीतियों की सफलता-विफलता दोनों को बिना अतिरंजना के पेश करते हैं.
भारत की आर्थिक यात्रा में 1947 के बाद के मिश्रित अर्थव्यवस्था के प्रयोग, 1969 की राष्ट्रीयकरण की लहर, 1991 के उदारीकरण और उसके बाद के सुधारों जैसे मोड़ शामिल हैं. किताब इन मोड़ों को राजनीतिक विचारधारा से जोड़कर देखती है, जो इसे सिर्फ आर्थिक इतिहास नहीं बल्कि राजनीतिक-आर्थिक विश्लेषण बनाती है.
Policies That Shaped Modern India उन पाठकों के लिए अनुशंसित है जो भारत की वर्तमान आर्थिक स्थिति को ऐतिहासिक संदर्भ में समझना चाहते हैं. यह जटिल विषयों को सुलभ तरीके से प्रस्तुत करती है और याद दिलाती है कि नीतियां राजनीति से अलग नहीं होतीं. जो लोग भारत की विकास कहानी, सुधारों और नारों के प्रभाव को गहराई से जानना चाहते हैं, उनके लिए यह एक मूल्यवान किताब है. सबनविस की लेखन शैली अनुभव और आलोचनात्मक नजरिया दोनों को साथ लेकर चलती है, जिससे किताब पठनीय और विचारोत्तेजक बनती है.
यह भी पढ़ें: भोजपुर की लाल माटी: कैसे एक भूमिगत क्रांति चुनावी ताकत में बदल गई
-भारत एक्सप्रेस
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.



