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पश्चिम बंगाल मतदाता सूची मामला, सुप्रीम कोर्ट 16 अक्टूबर को करेगा सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची से नाम हटाए जाने और लंबित अपीलों के जल्द निपटारे की मांग वाली याचिका पर 16 अक्टूबर को सुनवाई करेगा.

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सुप्रीम कोर्ट पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान मतदाता सूची से नाम हटाए गए मतदाताओं की अपीलों का जल्द निपटारा करने के आदेश देने की मांग वाली याचिका पर आगामी 16 अक्टूबर को सुनवाई करेगा. भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ के समक्ष वरिष्ठ वकीलों द्वारा इस मामले पर जल्द सुनवाई की मांग को लेकर मेंशनिंग की गई थी, जिसके बाद कोर्ट ने यह तारीख तय की है.

सुनवाई के दौरान मुख्य बातें

शुरुआत में यह मामला 30 अक्टूबर के लिए सूचीबद्ध था. वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायण और प्रशांत भूषण ने कोर्ट को बताया कि मामले को जल्द सुना जाना चाहिए था क्योंकि नवंबर में होने वाले नगर निगम चुनावों के मद्देनजर मतदाता सूची से जुड़े इस मामले में देरी हो रही है और वे उपचुनाव का मौका पहले ही चूक चुके हैं. इस पर सीजेआई ने कहा कि चूंकि इसे 30 अक्टूबर के लिए सूचीबद्ध किया गया था, इसलिए अदालत इसे एक दिन पहले यानी 29 अक्टूबर (या अब 16 अक्टूबर को विशेष संदर्भ में) देख सकती है.

पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से पेश वकील ने कोर्ट को बताया कि एसआईआर अपीलेट ट्रिब्यूनल के सामने करीब 1.70 लाख अपीलें लंबित हैं, जबकि नवंबर में नगर निगम चुनाव होने वाले हैं. राज्य सरकार के मुताबिक पिछले 6 महीनों में केवल 1.20 लाख मामलों का ही निपटारा किया जा सका है.

सीजेआई सूर्यकांत ने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट अपीलीय ट्रिब्यूनलों के कामकाज और प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़े इस गंभीर मुद्दे पर विचार कर रहा है. जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने कहा कि अदालत इस समस्या के प्रति पूरी तरह सचेत है. कोर्ट ने सुझाव दिया कि जिन क्षेत्रों में चुनाव होने वाले हैं, वहां मतदाता सूची में नाम शामिल कराने की मांग करने वाली अपीलों को प्राथमिकता दी जा सकती है, जबकि नाम हटाने से जुड़ी अपीलों को बाद में सुना जा सकता है.

चुनाव आयोग (ECI) के आंकड़े

चुनाव आयोग द्वारा दाखिल हलफनामे के मुताबिक, नाम जोड़ने और हटाने से संबंधित कुल 37 लाख से अधिक अपीलें लंबित हैं. आयोग ने स्पष्ट किया था कि अगर इसी रफ्तार से अपीलों का निपटारा होता रहा, तो सभी मामलों को सुलझाने में 12 साल (लगभग 146 महीने) लग सकते हैं.

आयोग के आंकड़ों के अनुसार, पश्चिम बंगाल में अब तक लगभग 38.3 लाख एसआईआर अपीलें दाखिल की जा चुकी हैं, जिनमें से 10 सितंबर तक करीब 1.26 लाख अपीलों पर फैसले हुए. इनमें से 1,13,943 लोगों के नाम दोबारा मतदाता सूची में वापस जोड़े गए हैं. यानी जिन मामलों पर फैसले आए, उनमें 90 फीसदी से ज्यादा मामले नाम वापस जोड़ने के पक्ष में रहे. 24 जिलों में 22.2 लाख से अधिक अपीलें ऐसे लोगों की हैं, जिनके नाम एसआईआर के दौरान वोटर लिस्ट से हटाए गए थे.

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चुनाव आयोग ने अपीलों के त्वरित निपटारे के लिए ट्रिब्यूनलों की संख्या बढ़ाने का सुझाव दिया है, जिसमें राज्य की 42 लोकसभा सीटों के हिसाब से एक-एक ट्रिब्यूनल के गठन का प्रस्ताव शामिल है. इसके अलावा, आयोग ने यह भी प्रस्ताव रखा है कि न्यायिक अधिकारियों को ‘वर्क फ्रॉम होम’ करने और डिजिटल सुनवाई करने की अनुमति दी जाए ताकि काम की रफ्तार बढ़ाई जा सके.



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