Bharat Express DD Free Dish

‘भाषा तोड़ती नहीं, जोड़ती है…’, संयुक्त राष्ट्र में गूंजा गृह मंत्री अमित शाह का संदेश, वैश्विक मंच पर दिखा भारत का सांस्कृतिक गौरव

AMIT SHAH’S VISION ON HINDI AT UN: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के सांस्कृतिक और भाषाई सशक्तिकरण के सशक्त नेतृत्व में वैश्विक मंचों पर हिंदी भाषा का मान लगातार बढ़ रहा है. संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने गृह मंत्री अमित शाह के प्रेरणादायी विचारों का उल्लेख यूं किया..

Union Home Minister Amit Shah extending greetings on Hindi Divas 2026, emphasizing the role of Hindi in national integration, technology, and research
Vijay Ram Edited by Vijay Ram

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की दूरदर्शी सोच और ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ के संकल्प का सकारात्मक प्रभाव अब वैश्विक कूटनीति के सबसे बड़े मंच संयुक्त राष्ट्र (UN) में भी स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है. भारत सरकार द्वारा यूएन के वैश्विक संचार विभाग (UNDGC) को दिए जा रहे स्वैच्छिक वित्तीय व नीतिगत सहयोग के बल पर संयुक्त राष्ट्र में हिंदी भाषा का गैर-आधिकारिक दर्जा (Non-official language status) मजबूती से बरकरार है.

संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में आयोजित हिंदी दिवस समारोह के दौरान यूएन में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की भाषाई नीति और प्रेरणादायी दर्शन की खुलकर सराहना की.

‘भाषा बांटती नहीं, जोड़ती है’: गृह मंत्री अमित शाह के विचारों की गूंज

स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने अपने संबोधन में गृह मंत्री अमित शाह के प्रसिद्ध वक्तव्य को उद्धृत करते हुए कहा:

“गृह मंत्री अमित शाह जी का मानना है कि भाषा तभी सबसे अधिक सार्थक होती है जब वह लोगों और उनकी संस्कृतियों को विभाजित करने के बजाय आपस में जोड़ती है. अमित शाह जी ने देशवासियों को अपनी मातृभाषा के साथ-साथ एक अन्य भारतीय भाषा सीखने के लिए निरंतर प्रोत्साहित किया है, जो ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ की अमर भावना को धरातल पर चरितार्थ करता है.”

उन्होंने कहा कि गृह मंत्री के इसी समावेशी और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के विजन के कारण आज हिंदी वैश्विक स्तर पर भारत के उच्च विचारों, गौरवशाली गाथाओं और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को साझा करने का सशक्त माध्यम बनकर उभरी है. हिंदी आज दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी बोली जाने वाली भाषा है, जिसकी पहुंच भारतीय सिनेमा, साहित्य, डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और प्रवासी भारतीयों के माध्यम से महाद्वीपों के पार पहुंच चुकी है.

यूएन महासभा के बहुभाषावाद प्रस्ताव में हिंदी को विशेष मान्यता

हाल ही में संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा एंडोरा के सह-प्रायोजन से पारित बहुभाषावाद प्रस्ताव में गैर-आधिकारिक भाषाओं के सांस्कृतिक, राजनीतिक और कूटनीतिक महत्व को आधिकारिक रूप से स्वीकार किया गया है. प्रस्ताव में पुष्टि की गई है कि कोई भी प्रतिनिधि संयुक्त राष्ट्र के कार्यों में प्रभावी भागीदारी के लिए इन भाषाओं में अपना वक्तव्य दे सकता है. भारत की ओर से ‘हिंदी एट यूएन’ (Hindi at UN) परियोजना को निरंतर स्वैच्छिक योगदान दिया जा रहा है, जिससे यूएन के समाचार और सोशल मीडिया बुलेटिन दुनिया भर के करोड़ों हिंदी भाषियों तक नियमित रूप से पहुंच रहे हैं.

वैश्विक मंच पर सराही गई भारत की बहुसांस्कृतिक विरासत

समारोह में शामिल भाजपा सांसद सी.पी. जोशी ने भी इस दिशा में केंद्र सरकार के प्रयासों की प्रशंसा करते हुए बताया कि भारत सरकार और यूएनडीजीसी के बीच वर्ष 2018 में हिंदी में समाचार प्रसारण को लेकर एक समझौता ज्ञापन (MOU) हुआ था. नई दिल्ली के सक्रिय प्रयासों से पिछले वर्ष इस एमओयू को आगामी पांच वर्षों के लिए फिर से नवीनीकृत किया गया है.

उन्होंने रेखांकित किया कि भारत एक बहुभाषी और बहुसांस्कृतिक सभ्यता है, जहां सभी भाषाएं और बोलियां हमारी सामूहिक धरोहर हैं. वहीं एंडोरा के स्थायी प्रतिनिधि जोन फॉर्नर रोविरा ने भी जोर देकर कहा कि संयुक्त राष्ट्र चार्टर के तहत अंतरराष्ट्रीय सहयोग और मानवाधिकारों को बढ़ावा देने के लिए भाषा कूटनीति का सबसे प्रभावी हथियार है. गृह मंत्री अमित शाह के सतत मार्गदर्शन में हिंदी भाषा आज वैश्विक कूटनीति के गलियारों में संवाद और समरसता का नया सेतु बन रही है.

‘सेवा और संकल्प’: पीएम मोदी के विजन पर बोलीं दिल्ली की सीएम रेखा गुप्ता, ‘विकसित दिल्ली’ से सजेगा ‘विकसित भारत’



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read