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न कैश का झंझट, न MDR का डर; क्या है RBI से मिला UPI का विकल्प?

RBI e Rupee vs UPI: 15 अक्टूबर से UPI पर MDR के दबाव से परेशान दुकानदारों के लिए RBI का e-Rupee बना बड़ा सहारा. जानिए बिना किसी बैंक चार्ज और कटौती के डिजिटल पेमेंट लेने का पूरा तरीका

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MDR चार्ज से 100% छुटकारा

RBI e Rupee vs UPI: डिजिटल लेनदेन की दुनिया में बड़ा बदलाव होने जा रहा है. 15 अक्टूबर से UPI के जरिए होने वाले बड़े भुगतानों पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR लागू हो जाएगा. कारोबारियों की सबसे बड़ी चिंता यही है कि डिजिटल पेमेंट स्वीकार करने पर उनकी गाढ़ी कमाई का एक हिस्सा बैंक चार्जेस की भेंट चढ़ जाएगा.

अगर आप इस खर्च से बचना चाहते हैं, तो भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने इसका एक सीधा और अधिकृत समाधान पहले ही तैयार कर रखा है. इस उपाय का नाम है ‘ई-रुपी’ (e Rupee या CBDC). आइये जानें यह आपके लिए कैसे काम आ सकता है.

यूपीआई और ई-रुपी में अंतर? (UPI vs e Rupee Difference)

आरबीआई की यह सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC) असल में आपके हाथ में मौजूद कागजी नोटों का आधिकारिक डिजिटल रूप है. यह पूरी तरह से लीगल टेंडर है और इसकी सबसे खास बात यह है कि इसके लेनदेन पर किसी तरह का कोई एमडीआर (MDR) शुल्क नहीं कटता.

क्या है UPI?

UPI कोई मुद्रा नहीं, बल्कि पैसा ट्रांसफर करने का एक डिजिटल माध्यम है. जब ग्राहक यूपीआई से भुगतान करता है, तो राशि एक बैंक सर्वर से प्रोसेस होकर दूसरे बैंक सर्वर में ट्रांसफर होती है. इस जटिल और भारी बैक-एंड इंफ्रास्ट्रक्चर के संचालन व रखरखाव खर्च की भरपाई के लिए ही MDR का प्रावधान सामने आता है.

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क्या है e Rupee?

ई-रुपी किसी कमर्शियल बैंक का नहीं, बल्कि खुद रिजर्व बैंक का दायित्व है. जब कोई ग्राहक ई-रुपी से भुगतान करता है, तो फंड एक डिजिटल वॉलेट से सीधे दूसरे डिजिटल वॉलेट में जाता है.

बिना किसी मध्यस्थ के सीधा ट्रांसफर

इस प्रक्रिया के बीच में न तो कोई बैंक अकाउंट इन्वॉल्व होता है और न ही कोई थर्ड-पार्टी मध्यस्थ. इससे जहां व्यापारियों का पैसा तुरंत ट्रांसफर होता है, वहीं रिजर्व बैंक को भी हजारों करोड़ रुपये के भौतिक नोट छापने और उनके रखरखाव के भारी खर्च से राहत मिलती है.

e Rupee का व्यापक विस्तार

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने इस डिजिटल करेंसी को शुरुआती चरण में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू किया था, जिसमें अब तक देश के 19 प्रमुख सरकारी और निजी बैंक जुड़ चुके हैं. बड़े स्तर पर इसके विस्तार से अब छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े मॉल और रिटेलर्स तक इसे आसानी से अपना रहे हैं.

दुकानदार MDR चार्ज से कैसे बचें?

अब सवाल आता है कि जब RBI ने e Rupee का विकल्प दिया है तो आखिर इसका उपयोग कैसे किया जाए और UPI के MDR से कैसे बचा जाए. आइये जानें व्यापारियों और दुकानदारों के लिए बिना किसी अतिरिक्त कटौती के डिजिटल भुगतान स्वीकार करने का पूरा तरीका.

1. बैंक का डिजिटल रुपी ऐप डाउनलोड करें: अपने बैंक (जो ई-रुपी नेटवर्क से जुड़ा हो) का अधिकृत ‘Digital Rupee Wallet’ ऐप इंस्टॉल करें और अपना सीबीडीसी वॉलेट सेटअप करें.

2. मर्चेंट CBDC QR कोड लगाएं: बैंक से अपने इसी सीबीडीसी वॉलेट का विशिष्ट QR कोड प्राप्त करें और अपनी दुकान के काउंटर पर लगाएं.

3. सीधे वॉलेट में लें पेमेंट: ग्राहकों से कहें कि वे ई-रुपी वॉलेट से स्कैन करके भुगतान करें. वॉलेट-टू-वॉलेट ट्रांसफर होने के कारण इसमें शून्य प्रतिशत MDR कटेगा.

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इस बात का भी ध्यान रखें

यद्यपि ई-रुपी से सामान्य यूपीआई क्यूआर कोड को भी स्कैन किया जा सकता है, लेकिन यदि भुगतान यूपीआई रेल के जरिए प्रोसेस हुआ तो उस पर तय नियम लागू हो सकते हैं. इसलिए शुद्ध रूप से चार्ज से बचने के लिए मर्चेंट का ई-रुपी क्यूआर कोड ही सबसे सटीक विकल्प है.



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