Ayodhya Badi Devkali Temple Crowd: अयोध्या/मनमीत गुप्ता: शारदीय नवरात्रि के पहले दिन धर्मनगरी अयोध्या पूरी तरह से भक्तिमय माहौल में डूबी नजर आ रही है. तड़के भोर से ही भगवान श्रीराम की कुलदेवी मां ‘बड़ी देवकाली’ के ऐतिहासिक मंदिर में श्रद्धालुओं का भारी तांता लगा हुआ है. माता के जयकारों के बीच भक्त सुबह से ही दर्शन-पूजन के लिए लंबी-लंबी कतारों में अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं.
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस सिद्ध मंदिर की स्थापना भगवान राम के पूर्वज महाराजा रघु ने कराई थी. कहा जाता है कि जब भगवान श्रीराम का जन्म हुआ था, तब माता कौशल्या तीनों रानियों के साथ श्रीराम और उनके तीनों भाइयों को सबसे पहला दर्शन कराने इसी मंदिर में लाई थीं.
एक ही शिला पर विराजमान हैं तीन देवियां
बड़ी देवकाली मंदिर का आध्यात्मिक महत्व बेहद अनूठा है. मंदिर के गर्भगृह में एक ही शिला पर महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती- तीनों देवियों के रूप एक साथ विराजमान हैं. यही वजह है कि अयोध्या और आसपास के जिलों से आने वाले श्रद्धालुओं की इस मंदिर के प्रति अगाध श्रद्धा है.
परंपरा के मुताबिक, क्षेत्र में जब भी किसी बच्चे का जन्म होता है, तो करीब सवा महीने बाद उसे सबसे पहले कुलदेवी मां बड़ी देवकाली के दर्शन कराने लाया जाता है. जो भी श्रद्धालु अयोध्या आकर रामलला के दर्शन करते हैं, वे अपनी यात्रा पूरी करने के लिए मां बड़ी देवकाली के मंदिर जरूर मत्था टेकने पहुंचते हैं.
आंखों के रोगों से मुक्ति दिलाता है माता का चरणामृत
स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं में इस मंदिर को लेकर एक और अटूट आस्था जुड़ी हुई है. माना जाता है कि अगर किसी व्यक्ति की आंखों में कोई बीमारी या तकलीफ है, तो माता का चरणामृत आंखों में लगाने से आंख के सारे रोग दूर हो जाते हैं.
शारदीय नवरात्रि के पूरे नौ दिनों तक यहां विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया जाता है, जिसके चलते पूरे क्षेत्र में उत्सव जैसा माहौल बना हुआ है.
यह भी पढ़ें: अयोध्या के राम मंदिर को मिला FSSAI का ‘ईट राइट प्लेस ऑफ वेशर्प’ का सर्टिफिकेट, नवरात्र में उमड़ी भक्तों की भारी भीड़
-भारत एक्सप्रेस
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

