Pakistan Saudi Arabia Houthis News: दुनिया भर में अपनी ‘दोमुंही कूटनीति’ की मलाई खाने चले पाकिस्तान का हाल इस समय धोबी का कुत्ता न घर का न घाट का वाला हो चुका है. मध्य पूर्व के झगड़ों में पंचायती करने और ‘दलाल’ बनकर दोनों तरफ से फायदा उठाने का उसका घटिया प्लान अब उसी के गले की फांस बन गया है. दरअसल सऊदी अरब और तुर्किए के साथ मिलकर बनाए गए जिस ‘मक्का पैक्ट’ (Mecca Pact) का पाकिस्तान ढिंढोरा पीट रहा था, उसी ने उसकी ऐसी बजी बजाई है कि यमन के हूती विद्रोहियों ने उसके 47 भाड़े के सैनिकों को धरकर बंधक बना लिया है.
उधर, पड़ोसी ईरान ने भी शहबाज शरीफ सरकार की ऐसी बेइज्जती की है कि पाकिस्तानी हुक्मरानों का मुंह छुपाने की जगह नहीं बची है. आईए जानते हैं पाक की फजीहत की इस पूरी कहानी को…
हूतियों ने दबोचे 47 PAK सैनिक(Pakistan Saudi Arabia Houthis News)
सऊदी अरब की रक्षा के नाम पर छाती फुलाकर अपनी सेना भेजने वाले पाकिस्तान को हूतियों ने जमीन सुंघा दी है. हूती प्रवक्ता जनरल याह्या सरी ने सनसनीखेज खुलासा करते हुए बताया है कि ‘बाब अल-मंदेब’ (Bab el-Mandeb) जलडमरूमध्य की खतरनाक लड़ाई में हूतियों ने सऊदी गठबंधन के कुल 85 सैनिकों को दबोच लिया है.
बता दें इनमें अकेले 47 सैनिक पाकिस्तानी फौज के हैं, जिन्हें हूतियों ने अपने कब्जे में ले लिया है. जिस पाकी सेना को वे अजेय बताते थे, वह हूतियों के आगे ऐसे ढेर हुई जैसे ताश का पत्ता.
ईरानी सांसद ने भी लगाई लताड़
इस पूरे ड्रामे के बीच ईरान ने पाकिस्तान की पोल खोलकर रख दी है. ईरानी सांसद मोहसेन जंगनेह ने पाकिस्तान की तथाकथित ‘शांति दूत’ बनने की नौटंकी की धज्जियां उड़ा दी हैं. जंगनेह ने प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ का खुला मजाक उड़ाते हुए कहा कि ‘पाकिस्तान की विदेश नीति और उसके ट्वीट कोई और नहीं बल्कि अमेरिकन लोग बैठकर लिखते हैं.
ईरानी सांसद ने उस फजीहत का भी जिक्र किया, जब शहबाज शरीफ के एक ट्वीट के अंत में वह लाइन भी कॉपी होकर छप गई थी जिससे साफ पता चल रहा था कि उनका यह हुक्मनामा किसी और के इशारे पर फॉरवर्ड किया गया है.
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धौंस जमाने गया PAK खुद ही दलदल में फंसा
ईरान और अमेरिका के बीच तनाव शुरू होते ही पाकिस्तान के हुक्मरानों को अपनी पुरानी बीमारी यानी ‘दलाली’ सूझी. उसे लगा कि इस्लामाबाद में बैठकर मध्यस्थता (Mediation) करवा लेंगे तो दुनिया में वाहवाही लूट लेंगे और पैसे भी ऐंठ लेंगे. उसने दोनों पक्षों को बुलाकर तमाशा भी किया, लेकिन न तो ईरान का उस पर भरोसा बचा और न ही अमेरिका ने उसे घास डाली.
वहीं उल्टे, सऊदी-तुर्किए के दबाव में आकर जैसे ही पाकिस्तान ने अपनी फौज को हूतियों के खिलाफ मैदान में झोंका, ईरान से उसके रिश्ते पूरी तरह तबाह हो गए और वह खुद इस मिडिल ईस्टर्न दलदल में गर्दन तक धंस गया.
-भारत एक्सप्रेस
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