गुजराती सेठों की बंधुआ मजदूरी से परेशान यूपी-बिहार के मजदूर लौट रहे घर
Workers Leaving Surat: पूरी दुनिया में डायमंड हब के नाम से मशहूर सूरत की चमक-दमक के पीछे यूपी-बिहार के वो मजदूर हैं, जो दिन-रात मेहनत करके इस शहर को चमकाने में मदद की. चाहे कड़ाके की धूप हो, मूसलाधार बारिश या बाढ़ जैसे हालात, इन मजदूरों ने कभी काम से मुंह नहीं मोड़ा. लेकिन अब यही मजदूर सूरत से मुंह मोड़ रहे हैं. गुजराती सेठों की बंधुआ मजदूरी और शोषण से तंग आकर मजदूरों ने ‘गांव चलो आंदोलन’ शुरू कर दिया है.
दिवाली और छठ से पहले ही हजारों मजदूर अपना बोरिया-बिस्तर समेट कर घर लौट रहे हैं, जिससे सूरत के रेलवे स्टेशनों पर भारी भीड़ उमड़ पड़ी है. रेलवे स्टेशन खचाखच भरे नजर आ रहे हैं.
मजदूरों का आरोप है कि सूरत की फैक्ट्रियों में उनका भयंकर शोषण हो रहा है. न तो उन्हें समय पर सैलरी मिलती है और न ही उन्हें वीक ऑफ मिलता है. उनसे महीने में पूरे-पूरे 30 दिन काम लिये जा रहे हैं. अगर कोई काम करने से मना कर देता है तो उसकी सैलरी रख ली जाती है और धक्के मार के फैक्ट्री से बाहर निकाल दिया जाता है.
सूरत में काम कर रहे हजारों मजदूरों को फैक्ट्री मालिको ने काम से निकला दिया है जिसमे बिहार के मजदूर भी शामिल हैं। ये लोग घर लौट रहे हैं। निराश है हताश है अचानक नौकरी जाने से। देखिए में बिहार में रोजगार की कमी नहीं है लेकिन यहाँ पैसा बचत नहीं हो पाता है और पूरा महीना रोजगार नहीं मिल पाता है इसीलिए लोग दुसरे राज्यों में पलायन करते हैं।
— The Bihar (@Thebihar_in) October 11, 2026
एक मीडिया हाउस से बात करते हुए मजदूरों ने बताया कि एक तरफ उनपर महीने में 30 दिन काम करने का दबाव बनाया जाता है, तो दूसरी तरफ उनसे 12-12 घंटे काम लिया जा रहा है. जिसकी वजह से वो भयंकर मानसिक और शारीरिक परेशानी से जूझ रहे हैं.
‘हम 26 दिन ही काम करेंगे’
सूरत के सेठों से नाराज मजदूरों का कहना है कि फैक्ट्री मालिक लगातार 30 दिन काम करने का दबाव बनाते हैं. जब हम मजदूरों ने 26 दिन ड्यूटी करने की बात रखी, तो हमें सीधे फैक्ट्री के गेट से बाहर निकाल दिया गया. मजदूरों ने कहा कि अब हम तभी लौटेंगे जब सेठों को हमारी जरूरत महसूस होगी और वे खुद बुलाएंगे, लेकिन एक बात तय है कि हम महीने के पूरे 30 दिन काम कभी नहीं करेंगे.
लेबर यूनियन सपोर्ट में उतरा
मजदूरों के ‘गांव चलो अभियान’ को लेकर अब लेबर यूनियन भी समर्थन में उतर आई है. यूनियन के प्रतिनिधि अजय डी दुबे का कहना है कि लाखों मजदूर शोषण से तंग आकर वापस घर लौट रहे हैं. यूनियन उन्हें रेलवे स्टेशनों पर पानी और बिस्किट दे रही है और फैक्ट्री मालिकों के खिलाफ अपना विरोध दर्ज करा रही है.
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उन्होंने कहा कि यूपी-बिहार के ये मजदूर सूरत की एम्ब्रॉयडरी और टेक्स्टाइल इंडस्ट्री की रीढ़ हैं. अगर फैक्ट्री मालिक उनके साथ सम्मानजनक व्यवहार नहीं करते हैं तो वो दिन दूर नहीं जब सूरत की ये चमकती-दमकती इंडस्ट्री पर ताले लग जाएंगे.
-भारत एक्सप्रेस
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