नवरात्रि के छठे दिन देशभर में मां दुर्गा के छठे स्वरूप मां कात्यायनी की पूजा-अर्चना की जा रही है. इस खास मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी मां कात्यायनी के चरणों में शीश झुकाकर देशवासियों के सुख, साहस और सकारात्मक ऊर्जा की कामना की. शुक्रवार को उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट साझा की, जिसमें मां की स्तुति करते हुए एक संस्कृत भजन का यूट्यूब लिंक भी शामिल था.
प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में लिखा कि नवरात्रि की पवित्र षष्ठी पर मां कात्यायनी के श्रीचरणों में उनका कोटि-कोटि नमन है. उन्होंने कामना की कि मां की कृपा से हर व्यक्ति के जीवन में अपार शक्ति, साहस और सकारात्मक ऊर्जा का संचार हो. उनका यह संदेश नवरात्रि के धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व को दर्शाता है.
पीएम मोदी ने साझा किया ‘भवानी अष्टकम’ भजन
अपने एक्स पोस्ट में प्रधानमंत्री ने आदि शंकराचार्य द्वारा रचित प्रसिद्ध स्तुति ‘भवानी अष्टकम’ का लिंक साझा किया. इस भजन को माधवी मधुकर झा ने अपनी आवाज दी है. इसमें देवी मां की महिमा का वर्णन करते हुए उनसे शरण और कृपा की प्रार्थना की गई है.
नवरात्रि की पवित्र षष्ठी पर मां कात्यायनी के श्रीचरणों में कोटि-कोटि नमन! मेरी कामना है कि उनकी अनुकंपा से हर किसी के जीवन में असीम शक्ति, साहस और सकारात्मक ऊर्जा का संचार हो।
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— Narendra Modi (@narendramodi) October 16, 2026
‘भवानी अष्टकम’ में भक्त मां को अपने जीवन का सबसे बड़ा सहारा मानते हुए कहते हैं कि हे देवी, आपके सिवा मेरा कोई दूसरा आश्रय नहीं है. इस स्तुति का मूल भाव मां के प्रति अटूट विश्वास, समर्पण और भक्ति से जुड़ा है. नवरात्रि जैसे पर्व पर इस तरह की स्तुतियां भक्तों को पूजा-पाठ के साथ-साथ मन की शांति और आध्यात्मिक जुड़ाव का भी अनुभव कराती हैं.
संस्कृत श्लोक के जरिए मां की महिमा का संदेश
इससे पहले प्रधानमंत्री ने देवी की स्तुति में एक संस्कृत श्लोक भी साझा किया था. यह श्लोक मां जगदम्बिका की व्यापक महिमा को सामने रखता है. इसमें कहा गया है कि संसार में ऐसा कौन-सा शब्द है, जो देवी की स्तुति नहीं करता, क्योंकि उनका स्वरूप तो समस्त शब्दों में समाया हुआ है.
इस श्लोक का भावार्थ यह है कि मन में उठने वाले विचार हों या बाहर दिखाई देने वाली अलग-अलग आकृतियां, हर जगह देवी के स्वरूप का अनुभव किया जा सकता है. इसका संदेश यह है कि ईश्वर की उपस्थिति केवल पूजा स्थल तक सीमित नहीं है, बल्कि सृष्टि के हर रूप में उसे महसूस किया जा सकता है.
मां कात्यायनी की पूजा का क्या है महत्व?
नवरात्रि के छठे दिन मां कात्यायनी की विधि-विधान से पूजा की जाती है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, वह मां दुर्गा का छठा स्वरूप हैं और साहस, शक्ति तथा निर्भयता की प्रतीक मानी जाती हैं. भक्त इस दिन मां की आराधना कर जीवन की परेशानियों से लड़ने की शक्ति और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करते हैं.
मां कात्यायनी की चार भुजाएं बताई गई हैं. उनके एक हाथ में तलवार और दूसरे में कमल का फूल होता है, जबकि बाकी दोनों हाथ वरद मुद्रा और अभय मुद्रा में रहते हैं. वरद मुद्रा को आशीर्वाद देने और अभय मुद्रा को भय दूर करने का प्रतीक माना जाता है. मां का वाहन सिंह है, जो शक्ति और साहस का प्रतीक माना जाता है.
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-भारत एक्सप्रेस
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