Uttarakhand Temple Catches Fire: उत्तराखंड के बागेश्वर जिले से एक दुखद खबर सामने आई है. कपकोट तहसील के बदियाकोट में स्थित अति-प्राचीन मां भगवती मंदिर में नवरात्रि के पावन पर्व के दौरान अचानक भीषण आग लग गई. मंदिर का मुख्य ढांचा लकड़ी से निर्मित होने के कारण आग ने तेजी से विकराल रूप ले लिया, जिससे मंदिर के मुख्य भवन को भारी नुकसान पहुंचा है. इस अप्रत्याशित घटना से स्थानीय निवासियों और श्रद्धालुओं में गहरी चिंता और शोक का माहौल है.
नवरात्रि के दौरान बागेश्वर के कपकोट स्थित ऐतिहासिक एवं पौराणिक बदियाकोट मां भगवती मंदिर में भीषण आग लग गई. अत्यधिक दुर्गम हिमालयी क्षेत्र में स्थित होने के कारण दमकल की गाड़ियां मौके पर नहीं पहुंच सकीं. लकड़ी का पारंपरिक ढांचा होने की वजह से मंदिर को भारी नुकसान पहुंचा है. शॉर्ट सर्किट या दीये से आग लगने की आशंका जताई जा रही है. ‘वध कोट’ नाम से प्रसिद्ध यह मंदिर मां दुर्गा द्वारा दैत्य निशुंभ के वध का पौराणिक स्थल माना जाता है.
बदियाकोट मां भगवती मंदिर में अचानक भड़की आग
बागेश्वर की कपकोट तहसील के अंतर्गत आने वाले बदियाकोट स्थित मां भगवती मंदिर में अचानक आग लगने से इलाके में हड़कंप मच गया. घटना ऐसे समय में हुई जब नवरात्रि के कारण मंदिर में धार्मिक अनुष्ठान चल रहे थे और बड़ी संख्या में श्रद्धालु पूजा-अर्चना के लिए पहुंच रहे थे. आग की लपटों ने देखते ही देखते पूरे मंदिर परिसर को घेर लिया.
उत्तराखंड –
बागेश्वर जिले के बदियाकोट में आज सुबह आदि बद्री मां भगवती मंदिर में भीषण आग लग गई। यह मंदिर कुमाऊं क्षेत्र का मुख्य शक्तिपीठ है। https://t.co/d6y4mwFmdR— Sachin Gupta (@Sachingupta) October 16, 2026
अत्यंत दुर्गम इलाका होने से राहत कार्य में आई रुकावट
बदियाकोट का यह मंदिर कपकोट मुख्यालय से लगभग 50 किलोमीटर दूर उच्च हिमालयी और दुर्गम क्षेत्र में स्थित है. मंदिर की भौगोलिक स्थिति इतनी विषम है कि वहां दमकल (फायर ब्रिगेड) की गाड़ियों का पहुंचना पूरी तरह से असंभव है. स्थानीय ग्रामीणों ने अपने स्तर पर आग पर काबू पाने का प्रयास किया, लेकिन संसाधनों की कमी के कारण भारी तबाही को रोका नहीं जा सका.
लकड़ी की नक्काशी और मुख्य मंदिर भवन को भारी नुकसान
मंदिर का मुख्य ढांचा पारंपरिक पहाड़ी शैली में लकड़ी से बनाया गया था, जिस पर न केवल देवदार की खूबसूरत लकड़ी का प्रयोग था बल्कि उस पर बेहद आकर्षक और ऐतिहासिक नक्काशी भी उकेरी गई थी. लकड़ी से निर्मित होने की वजह से आग ने चंद मिनटों में ही भीषण रूप धारण कर लिया और देखते ही देखते मुख्य मंदिर ढांचा जलकर पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया.
शॉर्ट सर्किट या जलते दीये से आग फैलने का अंदेशा
फिलहाल आग लगने के सटीक कारणों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है और यह जांच का विषय बना हुआ है. हालांकि, स्थानीय लोगों का मानना है कि मंदिर में नवरात्रि के दौरान निरंतर जल रहे पूजा के दीये या बिजली के शॉर्ट सर्किट की वजह से आग सुलगी हो सकती है, जिसने पूरे लकड़ी के ढांचे को अपनी चपेट में ले लिया.
पुराणों में वर्णित ‘वध कोट’ और दैत्य निशुंभ के वध की पौराणिक कथा
बदियाकोट का मां भगवती मंदिर केवल एक पूजा स्थल नहीं, बल्कि अगाध आस्था और पौराणिक इतिहास का केंद्र है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, आदिशक्ति मां भगवती ने इसी स्थान पर दैत्य निशुंभ का वध किया था, जिस कारण इस क्षेत्र को स्कंद पुराण में ‘वध कोट’ (जो कालांतर में बदियाकोट बना) के नाम से जाना गया. वहीं शुंभ दैत्य का वध निकटवर्ती सुमगढ़ में हुआ था. यह मंदिर सदियों पुराना ऐतिहासिक धरोहर है, जिसका बाद में पुनरोद्धार कराया गया था.
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-भारत एक्सप्रेस
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