Indian Railway News: भारतीय रेलवे की पटरियों पर नीले, लाल और नारंगी रंग की ट्रेनें दौड़ते देखना बेहद सामान्य है. लेकिन पिछले कुछ दिनों से पंजाब के कपूरथला स्थित रेल कोच फैक्ट्री (RCF) में तैयार हो रहे विशिष्ट ‘हरे रंग के रेल कोच’ सोशल मीडिया में जबरदस्त चर्चा का विषय बने हुए हैं. इन डिब्बों के भीतर नमाज के लिए बाकायदा अलग कमरा बनाया गया है, बच्चों की देखभाल के लिए बेबी केयर रूम है और इनकी छत को सामान्य से कहीं ज्यादा मजबूत स्टील ढांचे से ढाला गया है.
स्वाभाविक रूप से यह सवाल उठ रहा है कि आखिर भारत में ये कोच किसके लिए बनाए जा रहे हैं और दोनों देशों के बीच जारी कूटनीतिक तल्खी के बावजूद यह रेल प्रोजेक्ट इतनी तेजी से कैसे आगे बढ़ रहा है?
किसके लिए बने हैं ये कोच? (Indian Railway Green Coaches)
ये सभी कोच भारत के पड़ोसी देश बांग्लादेश के लिए तैयार किए गए हैं. भारत सरकार की नवरत्न सार्वजनिक उपक्रम कंपनी RITES Limited (रेल इंडिया टेक्निकल एंड इकोनॉमिक सर्विसेज) और बांग्लादेश रेलवे के बीच 200 ब्रॉड-गेज यात्री डिब्बों की आपूर्ति का 915 करोड़ रुपये (लगभग 9.5 करोड़ अमेरिकी डॉलर) का ऐतिहासिक करार हुआ है.
इस परियोजना को यूरोपियन इन्वेस्टमेंट बैंक (EIB) द्वारा वित्तीय सहायता दी जा रही है. पंजाब के हुसैनपुर रेलवे स्टेशन से हरी झंडी दिखाकर रवाना की गई 18 आधुनिक डिब्बों की पहली खेप सीमा पार कर बांग्लादेश के दर्शना रेलवे स्टेशन पहुंच चुकी है. कुल 200 डिब्बों में से शेष 182 कोच दिसंबर 2027 तक चरणबद्ध तरीके से डिलीवर किए जाएंगे.
इन हरे कोचों में क्या है खास?
कपूरथला की रेल कोच फैक्ट्री ने इन डिब्बों का डिजाइन सामान्य भारतीय कोचों की तुलना में काफी अलग रखा है. इन्हें बांग्लादेशी यात्रियों की धार्मिक, सामाजिक और स्थानीय यात्रा संस्कृति को ध्यान में रखकर ढाला गया है.
| कोच | पहली खेप | प्रमुख विशेषताएं व सुविधाएं |
| नॉन-एसी ‘शोवोन’ चेयर कार | 11 | रिक्लाइनिंग सीटें स्टेनलेस स्टील आर्मरेस्ट व फुटरेस्ट |
| एसी चेयर कार | 3 | आधुनिक एयर कंडीशनिंग पंखे और आरामदायक सिटिंग |
| एसी स्लीपर कोच | 2 | बर्थ सिस्टम सीसीटीव अलार्म व प्राइवेसी |
| एसी पावर कार | 2 | गार्ड रूम लगेज कंपार्टमेंट व पावर बैकअप |
| विशेष सुविधाएं | नमाज/प्रार्थना कक्ष बेबी केयर रूम व मजबूत छत | |
| कुल कोच | 18 | पंजाब के कपूरथला (RCF) में निर्मित |
लंबी दूरी के सफर के दौरान मुस्लिम यात्रियों की सहूलियत के लिए कोच के भीतर अलग से नमाज/प्रार्थना स्थल बनाया गया है, जहां साफ-सफाई और प्राइवेसी का विशेष ध्यान रखा गया है. महिलाओं और छोटे बच्चों के साथ सफर करने वाले परिवारों के लिए बच्चों को दूध पिलाने व देखभाल के लिए अलग केबिन दिए गए हैं.
सुपर-स्ट्रॉन्ग रूफ डिजाइन (India Railway Coaches Exports)
त्योहारों और पीक सीजन के दौरान बांग्लादेश में ट्रेनों की छतों पर भारी संख्या में मुसाफिरों के बैठने की पुरानी परंपरा रही है. इसलिए इन कोचों की छत का ढांचा इतना मजबूत बनाया गया है कि अगर सैकड़ों लोग छत पर सवार भी हो जाएं, तो भी छत धंसेगी नहीं.
भारतीय रेलवे के सामान्य एलएचबी कोच 750 वोल्ट पावर सिस्टम पर चलते हैं, जबकि इन एक्सपोर्ट कोचों के इलेक्ट्रिकल सिस्टम को बांग्लादेश रेलवे के मानक यानी 425 वोल्ट के अनुकूल कस्टमाइज किया गया है. सभी डिब्बों में सीसीटीवी कैमरे, आपातकालीन अलार्म सिस्टम, आंशिक रूप से खुलने वाली आधुनिक खिड़कियां और स्टेनलेस स्टील फुटरेस्ट वाली रिक्लाइनिंग (पीछे झुकने वाली) आरामदायक कुर्सियां लगाई गई हैं.
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लेकिन पटरियों पर साझेदारी जारी
यह डिलीवरी इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि बांग्लादेश में शेख हसीना के सत्ता से हटने और राजनीतिक बदलाव के बाद ढाका की नई हुकूमत और नई दिल्ली के बीच कूटनीतिक तनाव बना हुआ है. इसके बावजूद रणनीतिक बुनियादी ढांचे और व्यावसायिक समझौतों को राजनीति से अलग रखते हुए तय समयसीमा पर आगे बढ़ाया जा रहा है.
अकेले फिरोजपुर रेलवे मंडल को इस पहली खेप के ट्रांसिट और संचालन से 91.73 लाख रुपये का प्रत्यक्ष राजस्व प्राप्त हुआ है. भारत इससे पहले भी बांग्लादेश को 120 यात्री कोच और दर्जनों रेल इंजन सफलतापूर्वक निर्यात कर चुका है.
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