शमशान घाट पर चिता की उठती लपटें आमतौर पर जीवन के अंत और सन्नाटे का प्रतीक होती हैं. लेकिन मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम जिले के खापा खुर्द गांव में जब पुलिस के जवानों ने अपनी राइफलें झुकाकर मातमी धुन के साथ ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ दिया, तो वह विदाई किसी वीआईपी या कद्दावर नेता की नहीं, बल्कि महज 2 साल की एक नन्ही बच्ची बिलाश टांटी शर्मा उर्फ शिवानी की थी. वह मासूम, जिसने अभी जिंदगी को ठीक से देखा भी नहीं था, जाते-जाते तीन गंभीर रूप से बीमार लोगों को नई सांसें और नई जिंदगी का अनमोल तोहफा दे गई.
यह कहानी केवल एक सड़क हादसे और असमय हुई मौत की नहीं है, बल्कि उस अदम्य हौसले, करुणा और त्याग की मिसाल है जिसने साबित कर दिया कि इंसानियत अमीरी-गरीबी से नहीं, दिल की विशालता से मापी जाती है.
आस्था के सफर में आई अनहोनी की रात
10 अक्टूबर को नर्मदापुरम की बनखेड़ी तहसील स्थित ग्राम खापा खुर्द का एक साधारण मजदूर परिवार अपनी 2 साल की लाडली शिवानी को लेकर सलकनपुर स्थित विजयासन देवी के दर्शन के लिए निकला था. घर में खुशियों का माहौल था, लेकिन रास्ते में एक दर्दनाक सड़क हादसे ने सब कुछ छीन लिया. शिवानी के सिर में गंभीर चोट आई. बदहवास परिजन उसे लेकर तत्काल एम्स (AIIMS) भोपाल पहुंचे. डॉक्टरों की टीम ने रात-दिन एक कर दिया, लेकिन 14 अक्टूबर को डॉक्टरों ने भारी मन से परिजनों को सूचना दी कि शिवानी ‘ब्रेन-स्टेम डेड’ हो चुकी है.
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लाडली के चले जाने की खबर किसी भी मां-बाप की दुनिया उजाड़ने के लिए काफी थी. चारों तरफ आंसुओं का सैलाब था. तभी एम्स की ट्रांसप्लांट कॉर्डिनेशन टीम ने इस गमगीन मजदूर परिवार के सामने एक उम्मीद भरी बात रखी क्या आप अपनी बिटिया के जरिए किसी और के बुझते चिराग को रोशन करना चाहेंगे?
दुख की आंधी में भी डगमगाया नहीं हौसला
असहनीय पीड़ा की घड़ी में शिवानी के परिवार ने जो फैसला लिया, वह पत्थर दिल को भी पिघला दे. अपनी लाडली की देह को मिट्टी में मिलाने के बजाय उन्होंने उसके अंगों को दान करने की सहमति दे दी. परिवार का कहना था कि हमारी बच्ची भले ही हमारे पास न रहे, लेकिन उसकी सांसें किसी और के सीने में धड़केंगी, तो हमें लगेगा कि वह हमारे बीच ही जिंदा है.
- एक किडनी एम्स भोपाल में ही भर्ती एक गंभीर मरीज को प्रत्यारोपित की गई
- दूसरी किडनी और लिवर को ग्रीन कॉरिडोर के जरिए बंसल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां दो जरूरतमंद मरीजों को नया जीवन मिला
पुलिस की सलामी और पूरा गांव हुआ नतमस्तक
एम्स भोपाल का यह सातवां अंगदान था, जिसमें 2 साल की शिवानी ने साबित कर दिया कि उम्र चाहे कितनी भी छोटी हो, काम अमर हो सकते हैं. जब शिवानी की पार्थिव देह उसके पैतृक गांव खापा खुर्द पहुंची, तो हर आंख नम थी और हर सीना गर्व से चौड़ा था. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देशानुसार, मध्य प्रदेश पुलिस के जवानों ने पूरे राजकीय सम्मान के साथ शिवानी को गार्ड ऑफ ऑनर दिया. मुख्यमंत्री ने पहल को नमन करते हुए कहा-
‘यह एक अत्यंत भावुक और विरल क्षण है. अंगदान केवल अंगों का दान नहीं, बल्कि किसी के बुझते हुए संसार में आशा का दीप जलाना है. शिवानी के मजदूर परिवार का यह त्याग उन सभी परिवारों के आंसुओं को पोंछने वाला है जिन्हें नया जीवन मिला है. आइए, हम सब मिलकर अंगदान के इस महाअभियान से जुड़ें और मानवता की इस मशाल को आगे बढ़ाएं.’
प्रेरणा की एक नई सुबह
नन्ही शिवानी आज हमारे बीच नहीं है, लेकिन उसकी एक किडनी और लिवर तीन इंसानों के शरीर में धड़क रहे हैं. एक साधारण परिवार का यह असाधारण कदम पूरे समाज को यह सीख दे गया कि अंधकार चाहे कितना भी गहरा हो, निःस्वार्थ भाव से किया गया दान कई जिंदगियों में सवेरा ला सकता है. नन्ही शिवानी की यह अमर गाथा हमेशा मानवता के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी.
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