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राष्ट्र को अस्थिर करने वाली राजनीति से बचें; संविधान का सम्मान सर्वोपरि: इंद्रेश कुमार

लखनऊ में आयोजित मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के कार्यकर्ता सम्मेलन में डॉ. इंद्रेश कुमार ने देश की स्थिरता और संविधान के सम्मान पर जोर दिया. सम्मेलन में शिक्षा, पारिवारिक एकता और 2027 के चुनावों की तैयारियों को लेकर चर्चा हुई.

Muslim Rashtriya Manch Convention Lucknow Indresh Kumar Political Stance
Edited by Vaibhav Gupta

Muslim Rashtriya Manch Lucknow Convention 2026: लखनऊ में मुस्लिम राष्ट्रीय मंच (एमआरएम) के कार्यकर्ता सम्मेलन में राहुल गांधी, विपक्ष और कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) की राजनीति पर गंभीर सवाल उठाए गए. सम्मेलन ने इस बात पर जोर दिया कि भारत की एकता, अखंडता और संवैधानिक ढांचे को कमजोर करने का कोई भी प्रयास स्वीकार्य नहीं है. मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के मार्गदर्शक डॉ. इंद्रेश कुमार ने कहा कि विपक्ष और सीजेपी राजनीतिक विरोध को ऐसी दिशा में ले जा रहे हैं, जिससे देश में अस्थिरता और अविश्वास का माहौल बन सकता है. उन्होंने सवाल उठाया कि क्या सत्ता हासिल करने की राजनीतिक महत्वाकांक्षा देश की स्थिरता और राष्ट्रीय हितों से ऊपर हो सकती है?

सम्मेलन ने यह भी रेखांकित किया कि चुनावी व्यवस्था और संवैधानिक संस्थाओं के प्रति अविश्वास फैलाने के बजाय लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं और संवैधानिक मर्यादा का सम्मान किया जाना चाहिए. राहुल गांधी और विपक्ष की राजनीति पर निशाना साधते हुए इंद्रेश कुमार ने कहा कि भारत को जिम्मेदार नेतृत्व, सामाजिक सद्भाव और राष्ट्र निर्माण की जरूरत है, टकराव और अराजकता की नहीं.

बांग्लादेश और पाकिस्तान की स्थिति का जिक्र करते हुए इंद्रेश कुमार ने आगाह किया कि हिंसा, उग्रवाद, राजनीतिक टकराव और सामाजिक विभाजन किसी भी देश की शांति और स्थिरता को नुकसान पहुंचा सकते हैं. उन्होंने कहा कि भारत की एकता और अखंडता के लिए खतरा बनने वाली विचारधाराओं के प्रति देश को सतर्क रहना होगा. कार्यकर्ताओं से समाज में देशभक्ति, आपसी विश्वास और भाईचारे को मजबूत करने तथा हर तरह की नफरत और उग्रवाद के खिलाफ जागरूकता फैलाने की अपील की गई.

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य एवं मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के मार्गदर्शक डॉ. इंद्रेश कुमार की अध्यक्षता में आयोजित सम्मेलन ने इस बात पर जोर दिया कि भारत की सच्ची ताकत उसकी विविधता, एकता और सभी धर्मों के प्रति सम्मान में है. कार्यकर्ताओं से समुदायों तक पहुंचने और प्रेम, भाईचारे, देशभक्ति और सामाजिक जिम्मेदारी को बढ़ावा देने की अपील की गई.

2027 के चुनावों की तैयारी: 12 भव्य सम्मेलनों का लक्ष्य

मुस्लिम राष्ट्रीय मंच आगामी दिनों में उत्तर प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में 10 जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करेगा. इन कार्यक्रमों में राष्ट्रवाद, सामाजिक सद्भाव, राष्ट्रीय एकता, शिक्षा, आपसी भाईचारे और सामाजिक जिम्मेदारी पर ध्यान दिया जाएगा.

इनमें से दो कार्यक्रम विशेष रूप से सूफीवाद पर केंद्रित होंगे. इनमें सूफी परंपरा के प्रेम, मानवता, शांति और आपसी सद्भाव के संदेश को लोगों तक पहुंचाने पर जोर दिया जाएगा.

मंच का उद्देश्य समाज के विभिन्न वर्गों को साथ लाना और पूरे राज्य में शांति, भाईचारे और राष्ट्रीय एकता की भावना को मजबूत करना है.

कार्यकर्ता सम्मेलन: सदाचार और मजबूत चरित्र पर जोर

डॉ. इंद्रेश कुमार ने कहा कि कार्यकर्ता की पहचान सदाचार, सौम्य वाणी, ईमानदार नीयत और मजबूत चरित्र से होनी चाहिए. समाज में बदले की भावना फैलाने के बजाय लोगों को जोड़ना और उनके दिल जीतना जरूरी है.

कार्यकर्ता अपने आचरण से मिसाल पेश करें, ताकि लोग मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के काम और विचारों को और करीब से समझ सकें. उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत चरित्र को मजबूत किए बिना कोई भी सामाजिक अभियान व्यापक सफलता नहीं पा सकता.

पारिवारिक संबंध: तलाक नहीं, समझौता और प्रेम

परिवारों में बढ़ते तनाव और तलाक के बढ़ते मामलों पर चिंता जताते हुए डॉ. इंद्रेश कुमार ने कहा कि परिवार की नींव प्रेम, विश्वास, सम्मान और जिम्मेदारी पर टिकी है. पति-पत्नी के विवादों का बच्चों पर गहरा असर पड़ता है.

महिलाओं की गरिमा और परिवारों को टूटने से बचाने की जरूरत पर जोर देते हुए उन्होंने कहा, ‘अगर तलाक देना ही है तो नशे की बोतल को दें; अगर किसी से प्रेम करना है तो घर में अपनी पत्नी से करें.’

उन्होंने मुस्लिम राष्ट्रीय मंच का संदेश दोहराया: ‘तलाक नहीं, समझौता; तलाक नहीं, प्रेम.’ उन्होंने परिवारों के विवादों को संवाद के जरिए सुलझाने और समझौता केंद्रों को बढ़ावा देने की जरूरत पर जोर दिया.

हज के दौरान शैतान को कंकरी मारने की रस्म का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि लोगों को अपने भीतर की बुराइयों-क्रोध, अहंकार, हिंसा और उग्रवाद-को भी दूर करना होगा. उनके अनुसार, रिश्तों को बचाने के लिए आपसी समझ, संयम और प्रेम को प्राथमिकता देनी होगी.

अंतरराष्ट्रीय हालात: युद्ध नहीं, संवाद और शांति चुनें

अंतरराष्ट्रीय स्थिति पर बोलते हुए डॉ. इंद्रेश कुमार ने युद्ध के बजाय संवाद और शांति की अपील की. अमेरिका, ईरान और इजरायल का जिक्र करते हुए उन्होंने संवाद और कूटनीतिक जुड़ाव की जरूरत पर जोर दिया.

उन्होंने कहा कि मौतों का जश्न मनाने के बजाय मानव जीवन और शांति को प्राथमिकता दी जानी चाहिए.

उन्होंने कहा कि दुनिया को डर और दबाव नहीं, भरोसा और प्रेम चाहिए. लखनऊ से उनका विश्व संदेश था: ‘प्रेम, प्रेम और सिर्फ प्रेम.’

डॉ. शाहिद अख्तर: राष्ट्रवाद, शिक्षा और सामाजिक एकता से मजबूत होगा भारत

डॉ. शाहिद अख्तर ने कहा कि मुस्लिम राष्ट्रीय मंच ‘एक भारत, महान भारत’ की परिकल्पना के प्रति प्रतिबद्ध है. भारत की सच्ची ताकत विविधता में एकता और साझा राष्ट्रीय पहचान में है.

उन्होंने कहा कि एमआरएम कार्यकर्ता की पहचान अच्छे चरित्र, अनुकरणीय आचरण और देशभक्ति से होनी चाहिए. शिक्षा को सामाजिक प्रगति की नींव बताते हुए उन्होंने हर परिवार से बच्चों की शिक्षा को प्राथमिकता देने की अपील की, और कहा कि हम ‘आधा भोजन खा लेंगे, लेकिन बच्चों को शिक्षित करेंगे.’

उन्होंने कहा कि उग्रवाद और नफरत से निपटने का रास्ता संवाद और आपसी समझ है.

डॉ. शाहिद अख्तर ने कहा कि मुस्लिम राष्ट्रीय मंच ने राम मंदिर, तीन तलाक, अनुच्छेद 370 और वक्फ जैसे बड़े मुद्दों पर संवाद के जरिए समाधान खोजने की दिशा में काम किया है. उन्होंने जोर दिया कि शांति, आपसी विश्वास और एकता को मजबूत करने के लिए अन्य सामाजिक और राष्ट्रीय मुद्दों पर भी संवाद उतना ही जरूरी है.

उन्होंने कार्यकर्ताओं से अपना व्यक्तिगत आचरण सुधारने और समाज में शांति, भाईचारे, हिंदू-मुस्लिम एकता और राष्ट्रीय सद्भाव को मजबूत करने की अपील की.

मोहम्मद अफजल: मानवता सबसे बड़ी पहचान

मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के राष्ट्रीय संयोजक मोहम्मद अफजल ने कहा कि सम्मेलन का उद्देश्य जिम्मेदार कार्यकर्ता तैयार करना था, जो समाज को जोड़ने में मदद करें.

उन्होंने स्पष्ट किया कि मंच कोई राजनीतिक दल नहीं है और उसका कोई चुनाव चिह्न नहीं है. इसका उद्देश्य मानवता, सामाजिक एकता और भाईचारे को मजबूत करना है.

कुरान की अभिव्यक्ति ‘रब्बुल आलमीन’ यानी सारे जहानों का पालनहार और भारतीय दार्शनिक आदर्श ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ यानी सभी सुखी हों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि दोनों सार्वभौमिक कल्याण और सभी के हित का संदेश देते हैं.

उन्होंने कार्यकर्ताओं से विभाजन के बजाय एकता को बढ़ावा देने और हर व्यक्ति की गरिमा की रक्षा करने की अपील की.

डॉ. शालिनी अली: राष्ट्र निर्माण के लिए महिलाओं की भागीदारी जरूरी

डॉ. शालिनी अली ने कहा कि मुस्लिम राष्ट्रीय मंच राष्ट्रीय एकता, सामाजिक सद्भाव और भाईचारे को मजबूत करने के लिए काम करता है.

लखनऊ की गंगा-जमुनी तहजीब यानी साझा सांस्कृतिक सद्भाव की परंपरा का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि महिलाएं समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की सशक्त शक्ति हैं और राष्ट्र निर्माण में उनकी भागीदारी जरूरी है.

उन्होंने कहा कि एमआरएम कार्यकर्ता घर-घर पहुंचकर आपसी सम्मान, एकता और भाईचारे का संदेश फैलाएं. महिलाओं की भागीदारी परिवार और समाज दोनों में सकारात्मक बदलाव ला सकती है.

सैयद रजा हुसैन रिजवी: शिक्षा से खुलेगा प्रगति का रास्ता

सैयद रजा हुसैन रिजवी ने कहा कि वे डॉ. इंद्रेश कुमार के विचारों से प्रेरित होकर मंच से जुड़े. उन्होंने धार्मिक स्वतंत्रता और सभी धर्मों के प्रति सम्मान पर जोर दिया.

कुरान की सूरह अल-काफिरून का जिक्र करते हुए उन्होंने अपने धर्म का पालन करते हुए दूसरों के धार्मिक अधिकारों का सम्मान करने के महत्व पर बात की.

कुरान की पहली वही ‘इक़रा’ यानी ‘पढ़ो’ का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि शिक्षा प्रगति की नींव है. समाज को आगे बढ़ाने के लिए शिक्षा और ज्ञान को प्राथमिकता देनी होगी. उन्होंने कार्यकर्ताओं से हर घर में शिक्षा के महत्व के प्रति जागरूकता फैलाने की अपील की.

गिरीश जुयाल: आधा भोजन खाएंगे, लेकिन बच्चों को शिक्षित करेंगे

एमआरएम के वरिष्ठ पदाधिकारी गिरीश जुयाल ने कहा कि मुस्लिम राष्ट्रीय मंच पिछले 25 वर्षों से शिक्षा, सामाजिक सद्भाव, भाईचारे और देशभक्ति को बढ़ावा देने के लिए काम कर रहा है.

उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति को अपने धर्म का अच्छा अनुयायी होना चाहिए और सार्वजनिक जीवन में एक अच्छे भारतीय के रूप में अपनी जिम्मेदारियां भी निभानी चाहिए.

शिक्षा और समाज के भविष्य के बीच संबंध पर जोर देते हुए उन्होंने नारा दिया: ‘आधा भोजन खा लेंगे, लेकिन बच्चों को शिक्षित करेंगे.’

सम्मेलन में कई प्रमुख पदाधिकारी मौजूद

कार्यक्रम में राष्ट्रीय संयोजक मोहम्मद अफजल, डॉ. शाहिद अख्तर, सैयद रजा हुसैन रिजवी, गिरीश जुयाल, इस्लाम अब्बास, रेशमा हुसैन, डॉ. शालिनी अली, शाहिद सईद, उत्तर प्रदेश प्रदेश संयोजक शौकत अली, आलोक चतुर्वेदी, ठाकुर राजा रईस तथा प्रकोष्ठ संयोजक एवं सह-संयोजक तुषारकांत, मजाहिर खान, कल्लू अंसारी, ताहिर शाह, शेर अली, क़ारी जमाल अबरार, कौकब मुज्तबा, महरूख मिर्जा और नईम शास्त्री आदि मौजूद रहे.

सम्मेलन में 1,000 से अधिक कार्यकर्ताओं ने भाग लिया.

सम्मेलन ने कार्यकर्ताओं से शिक्षा, महिलाओं की गरिमा, मजबूत परिवार, सामाजिक सद्भाव और देशभक्ति को व्यवहार में उतारने की अपील की, ताकि नए उत्तर प्रदेश और नए भारत के निर्माण में मदद मिल सके.

कार्यकर्ताओं से अपील की गई कि वे अपने आचरण से मिसाल पेश करें, जनविश्वास मजबूत करें और देश की एकता एवं प्रगति के लिए जिम्मेदारी से काम करें.

वक्ताओं ने दोहराया कि राष्ट्र निर्माण के लिए संवाद, शिक्षा, आपसी सम्मान और संवैधानिक सिद्धांतों का पालन आवश्यक है.



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