RSS के 100 साल पर नई किताब
Hundred Years Young RSS Book: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सौ वर्षों के सफर को एक नए नजरिए से समझाने वाली किताब Hundred Years Young: Rashtriya Swayamsevak Sangh प्रकाशित हुई है. यह पुस्तक संघ को केवल एक संगठन के रूप में नहीं देखती, बल्कि उससे जुड़े विचारों, अनुभवों और विभिन्न दृष्टिकोणों को भी सामने लाने का प्रयास करती है. इस पुस्तक का संपादन रश्मि सामंत ने किया है, जबकि इसका प्रकाशन रूपा पब्लिकेशन्स द्वारा किया गया है. किताब में संघ प्रमुख डॉ. मोहन भागवत का विशेष संदेश भी शामिल किया गया है. साथ ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने इसकी प्रस्तावना लिखी है.
अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़े लोगों ने लिखे लेख
पुस्तक की खास बात यह है कि इसमें 20 युवा लेखकों ने अपने विचार साझा किए हैं. ये लेखक अलग-अलग पेशों और सामाजिक पृष्ठभूमि से आते हैं. इनमें उद्यमी, जनप्रतिनिधि, ओलंपियन, शिक्षाविद, पुरस्कार प्राप्त कलाकार और सार्वजनिक जीवन से जुड़े जाने-माने लोग शामिल हैं. लेखकों का यह विविध समूह अपने अनुभवों और विचारों के जरिए संघ की सौ साल की यात्रा को समझने का प्रयास करता है.
विभिन्न समुदायों की भी भागीदारी
किताब में शामिल लेखक केवल अलग-अलग पेशों से ही नहीं आते, बल्कि उनकी सांस्कृतिक और धार्मिक पृष्ठभूमियां भी भिन्न हैं. लेखकों में हिंदू, मुस्लिम, ईसाई और यहूदी समुदायों से जुड़े प्रतिनिधियों को भी जगह दी गई है. इस वजह से पुस्तक कई दृष्टिकोणों को एक मंच पर लाने की कोशिश करती है.
संघ को देखने का नया नजरिया
प्रकाशकों की ओर से जारी बयान के अनुसार यह पुस्तक आधुनिक भारत में प्रभावशाली भूमिका निभाने वाले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को समझने का एक नया तरीका प्रस्तुत करती है. पुस्तक का उद्देश्य प्रचलित धारणाओं या पुराने आख्यानों को दोहराना नहीं है. इसके बजाय युवा पीढ़ी को अपनी सोच, अनुभव और सवालों के माध्यम से संघ पर विचार रखने का अवसर दिया गया है.
नई पीढ़ी और संघ के बीच संवाद की कोशिश
इस किताब में देश और दुनिया के अलग-अलग हिस्सों से जुड़े युवाओं की आवाज को स्थान दिया गया है. लेखक अपने व्यक्तिगत अनुभवों, स्वतंत्र सोच और विविध दृष्टिकोणों के जरिए संघ के बारे में संवाद स्थापित करने की कोशिश करते हैं. पुस्तक पाठकों को भी यह अवसर देती है कि वे संघ को केवल एक तय धारणा से नहीं, बल्कि कई नजरियों से समझने की कोशिश करें.
विचार, सेवा और राष्ट्र से जुड़े मुद्दों पर चर्चा
किताब में सेवा, धर्म, हिंदुत्व, राष्ट्र और सामाजिक मूल्यों जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई है. इन विषयों के माध्यम से उन विचारों और अनुभवों को समझने का प्रयास किया गया है, जो संघ की कार्यशैली और उसकी यात्रा से जुड़े रहे हैं. लेखकों ने विभिन्न पहलुओं पर अपने दृष्टिकोण रखे हैं, जिससे पाठकों को संघ के बारे में व्यापक सोच विकसित करने का अवसर मिल सकता है.
बहस से आगे बढ़कर समझ बनाने की पहल
पुस्तक का मकसद संघ का केवल संस्थागत परिचय देना या उससे जुड़ी सभी बहसों का अंतिम निष्कर्ष प्रस्तुत करना नहीं है. इसके बजाय यह किताब समकालीन भारत में संघ की भूमिका, उसकी प्रासंगिकता और बदलते समय में उसके प्रभाव को लेकर एक संतुलित और व्यापक चर्चा शुरू करने का प्रयास करती है. साथ ही यह विभिन्न पीढ़ियों के बीच संवाद का एक मंच भी तैयार करती है.
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-भारत एक्सप्रेस
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