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India-New Zealand FTA: 20 अक्टूबर से भारत और न्यूजीलैंड के बीच ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौता (FTA) प्रभावी हो गया है. इस समझौते से जहां भारतीय निर्यातकों को न्यूजीलैंड के बाजार में 100% ड्यूटी-फ्री एक्सेस मिलेगा, वहीं घरेलू उपभोक्ताओं की नजर न्यूजीलैंड से आने वाले कीवी और सेब के दामों पर टिकी है.
20 अक्टूबर से लागू हुए भारत-न्यूजीलैंड ट्रेड एग्रीमेंट से भारतीय निर्यातकों को 100% ड्यूटी-फ्री access मिलेगा. हालांकि, न्यूजीलैंड से आयात होने वाले सेब और कीवी पहले साल सस्ते नहीं होंगे क्योंकि DGFT ने पहले वर्ष कोई रियायती कोटा नहीं रखा है. दूसरे साल से कीवी पर आयात शुल्क शून्य और सेब पर आयात शुल्क 50% से घटकर 25% हो जाएगा, जिससे आने वाले सालों में कीमतें कम होंगी. भारतीय किसानों के संरक्षण के लिए सरकार ने सेब पर 1.25 डॉलर/किग्रा की न्यूनतम सीआईएफ दर तय की है.
पहले साल नहीं मिलेगी दामों में राहत
समझौते की शर्तों के अनुसार, आम उपभोक्ताओं को सस्ते कीवी और सेब के लिए फिलहाल इंतजार करना होगा. विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) द्वारा जारी नोटिस के अनुसार, एफटीए के पहले साल (वर्तमान वित्त वर्ष) में सेब और कीवी के लिए कोई रियायती आयात कोटा निर्धारित नहीं किया गया है. इसका साफ मतलब है कि इस साल इनके दामों में किसी कटौती की संभावना नहीं है.
दूसरे साल से शुल्क-मुक्त होगा कीवी
न्यूजीलैंड के मशहूर कीवी फल पर राहत समझौते के दूसरे साल से मिलेगी. दूसरे वर्ष से कीवी पर आयात शुल्क पूरी तरह खत्म कर दिया जाएगा. सरकार ने इसके लिए चरणबद्ध कोटा तय किया है- दूसरे साल 8,000 टन, तीसरे साल 9,750 टन और पांचवें साल तक यह 13,250 टन होगा. हालांकि, टैक्स छूट का फायदा उठाने के लिए कीवी की सीआईएफ (लागत, बीमा, माल ढुलाई) कीमत कम से कम 1.80 डॉलर प्रति किलोग्राम होनी जरूरी है.
सेब पर आयात शुल्क आधा, लेकिन शर्तें लागू
भारतीय बाजारों में न्यूजीलैंड के सेब पर वर्तमान में 50% आयात शुल्क लगता है, जिसे समझौते के दूसरे साल से घटाकर 25% कर दिया जाएगा. दूसरे साल भारत 35,000 टन रियायती सेब का आयात कर सकेगा, जिसे छठे साल तक बढ़ाकर 45,000 टन किया जाएगा. शुल्क में 50% की कटौती होने से भविष्य में न्यूजीलैंड के सेब के दामों में नरमी देखने को मिलेगी.
घरेलू किसानों और बागवानों के हितों की सुरक्षा
सस्ते आयात से भारतीय किसानों को नुकसान न पहुंचे, इसके लिए सरकार ने न्यूनतम सीमा तय की है. आयातित सेब के लिए 1.25 डॉलर प्रति किलोग्राम का न्यूनतम CIF मूल्य निर्धारित किया गया है, ताकि विदेशी सेब घरेलू बाजार में औने-पौने दामों में न बिकें और स्थानीय बागवान सुरक्षित रहें.
मानुका शहद और एल्ब्यूमिन भी दायरे में
इस व्यापार सौदे का असर सिर्फ फलों तक सीमित नहीं है. सेहत के लिए फायदेमंद माने जाने वाले न्यूजीलैंड के प्रसिद्ध ‘मानुका शहद’ और प्रोटीन उत्पाद ‘एल्ब्यूमिन’ को भी इसमें शामिल किया गया है. एल्ब्यूमिन पर 11% रियायती शुल्क लगेगा (प्रारंभिक कोटा 200 टन), जबकि मानुका शहद के लिए पहले साल 40 टन और दूसरे साल से 200 टन का सालाना कोटा तय किया गया है.
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-भारत एक्सप्रेस
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