प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक बेहद प्रेरणादायक और गहरा संदेश साझा किया है. पीएम मोदी ने अपने संदेश में बलिदानी महापुरुषों के त्याग और उनके प्रति कृतज्ञता के भाव को बयां करते हुए एक प्रसिद्ध संस्कृत सुभाषित (श्लोक) साझा किया है, जो जीवन में उपकार और कृतज्ञता के महत्व को सिखाता है.
प्रधानमंत्री मोदी द्वारा साझा किया गया श्लोक
पीएम मोदी ने संस्कृत का यह श्लोक साझा किया है:
‘प्रथमवयसि पीतं तोयमल्पं स्मरन्तः शिरसि निहितभारा नारिकेला नराणाम्. ददति जलमनल्पास्वादमाजीवितान्तं न हि कृतमुपकारं साधवो विस्मरन्ति॥’
इस सुभाषित का भावार्थ यह है कि जिस प्रकार नारियल का पौधा अपने शुरुआती जीवन में दिए गए थोड़े से जल के उपकार को जीवनभर याद रखता है और अपने सिर पर भारी-भरकम बोझ (नारियल का गुच्छा) सहते हुए भी इंसानों को मीठा और अमृत समान जल पिलाता रहता है, ठीक उसी तरह सच्चे और उदात्त लोग महापुरुषों के उपकारों को कभी नहीं भूलते. वे उनके त्याग, तप और बलिदान के प्रति हमेशा कृतज्ञ रहते हैं.
कृतज्ञता और नेकदिली का महान संदेश
यह श्लोक इंसानों को कृतज्ञता का सबसे बड़ा पाठ पढ़ाता है. इसके जरिए यह सीख मिलती है कि जीवन में किसी भी व्यक्ति द्वारा किए गए उपकार या भलाई को कभी नहीं भूलना चाहिए. ऐसे विचार मन को कोमल, उदार और विस्तृत बनाते हैं. एक नेक और सच्चा इंसान हमेशा दूसरों के परोपकार के प्रति आभार व्यक्त करता है.
कहां से लिया गया है यह प्रसिद्ध सुभाषित?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से साझा किया गया यह श्लोक प्राचीन ग्रंथ ‘सुभाषितरत्नभाण्डागारम्’ से लिया गया है. यह ग्रंथ मुख्य रूप से 6 से 7 अध्यायों में बंटा हुआ है, जिसमें मङ्गलाचरण, सामान्य प्रकरण, राज प्रकरण, चित्र प्रकरण, अन्योक्ति प्रकरण, नवरस प्रकरण और सप्तम ‘संकीर्णक’ प्रकरण शामिल हैं. इस ग्रंथ में विभिन्न काव्यों, नाटकों, पुराणों और इतिहास से लगभग 10,000 से अधिक अनमोल सुभाषितों का अद्भुत संकलन मिलता है.
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-भारत एक्सप्रेस
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