जल संकट पर हाईकोर्ट सख्त
रिपोर्ट- जय व्यास/इंदौर
MP News: इस साल अपेक्षा से कम बारिश होने के कारण कई इलाकों में जल संकट की आशंका बढ़ गई है. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर समय रहते जरूरी कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले दिनों में पानी की समस्या और गंभीर रूप ले सकती है. इसी मुद्दे को लेकर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ में सुनवाई हुई.
हाईकोर्ट ने शासन से मांगे जरूरी निर्देश
सुनवाई के दौरान कोर्ट के सामने उज्जैनी, जिसे शिप्रा टेकरी के नाम से भी जाना जाता है, वहां से असरावद खुर्द तालाब तक पाइपलाइन बिछाने का प्रस्ताव रखा गया. इस पर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह दो सप्ताह के भीतर इस संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश और जानकारी प्रस्तुत करे. मामले की अगली सुनवाई 17 नवंबर तय की गई है.
जनहित याचिका में उठाए गए कई अहम मुद्दे
यह सुनवाई राजलक्ष्मी फाउंडेशन द्वारा दायर जनहित याचिका पर हुई. याचिका में शहर में हो रही पानी की बर्बादी को रोकने, लोगों को बेहतर गुणवत्ता वाला पेयजल उपलब्ध कराने और पुराने जल स्रोतों को फिर से जीवित करने की मांग की गई है. इसके अलावा पारंपरिक कुओं, बावड़ियों और तालाबों के संरक्षण और पुनर्जीवन पर भी जोर दिया गया है.
सरकारी भवनों में रिचार्ज सिस्टम लगाने की मांग
याचिका में यह भी मांग की गई कि सभी शासकीय भवनों में अनिवार्य रूप से वाटर रिचार्जिंग सिस्टम लगाए जाएं, ताकि वर्षा जल का बेहतर उपयोग हो सके और भूजल स्तर को बनाए रखने में मदद मिले.
नर्मदा का पानी तालाब तक पहुंचाने का सुझाव
याचिकाकर्ता की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता अजय बागड़िया ने अदालत के सामने सुझाव रखा कि उज्जैनी से असरावद खुर्द तालाब तक पाइपलाइन बिछाकर नर्मदा नदी का पानी पहुंचाया जा सकता है. उनका कहना था कि इस योजना से क्षेत्र में जल उपलब्धता बढ़ाने में मदद मिल सकती है.
कई तालाबों को मिल सकता है फायदा
प्रस्ताव के अनुसार यदि असरावद खुर्द तालाब में पर्याप्त पानी पहुंचता है तो इसका लाभ आसपास के अन्य जलाशयों को भी मिल सकेगा. इसमें मिर्जापुर, रालामंडल, लिम्बोदी और बिलावली समेत कई तालाब शामिल हैं. इससे पूरे क्षेत्र की जल संरचना को मजबूती मिलने की उम्मीद जताई गई है.
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भूजल स्तर सुधारने का भी दावा
याचिकाकर्ता का तर्क है कि इस योजना के लागू होने पर केवल तालाब ही नहीं भरेंगे, बल्कि जमीन के नीचे का जलस्तर भी बेहतर हो सकेगा. इससे भविष्य में पानी की उपलब्धता बढ़ाने में मदद मिल सकती है. फिलहाल हाईकोर्ट ने इस प्रस्ताव पर राज्य शासन से दो सप्ताह के भीतर आवश्यक जानकारी और निर्देश प्रस्तुत करने को कहा है. अब सभी की नजरें 17 नवंबर को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं.
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-भारत एक्सप्रेस
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