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Water Crisis

FIRST SPRING CENSUS OF INDIA: मोदी सरकार ने देश में पहली बार प्राकृतिक झरनों (Springs) की वैज्ञानिक गणना कर ऐतिहासिक रिपोर्ट जारी की है. देश के लगभग 20 करोड़ लोग अपनी रोजाना की जरूरतों के लिए झरनों पर निर्भर हैं. आंकड़ों के अनुसार मणिपुर में सर्वाधिक 3,941 झरने मिले हैं, जिनमें से 1,336 झरने गंभीर खतरे में हैं.

26 अगस्त 2026 को नेपाल-तिब्बत सीमा पर आई भीषण फ्लैश फ्लड ने हिमालयी नदियों की विनाशकारी शक्ति और बिहार के जल संकट की सच्चाई को फिर उजागर कर दिया. यह घटना दिनेश कुमार मिश्र की पुस्तक ‘पानी का शाप: बिहार में बाढ़-सुखाड़’ के संदेश को जीवंत करती है.

MIDDLE EAST WATER CRISIS: ईरान और अमेरिका के बीच जारी सैन्‍य टकराव के चलते पूरे अरब मुल्कों में पीने के पानी का संकट खड़ा हो गया है. वहां बूंद-बूंद पानी के लिए हाहाकार मचने की आशंका है.

SCIENCE NEWS: भारत और अमेरिका द्वारा जमीन से अंधाधुंध पानी निकालने के कारण पृथ्वी का संतुलन बिगड़ गया है और उसकी भौगोलिक धुरी (Axis) ज्यादा झुक गई है.

देश में बढ़ती भीषण गर्मी, जल संकट और फसल नुकसान ने किसानों से लेकर शहरों तक चिंता बढ़ा दी है. विशेषज्ञों का मानना है कि पारंपरिक जल संरक्षण, वृक्षारोपण और प्राकृतिक जीवनशैली ही भविष्य के पर्यावरण संकट का सबसे बड़ा इलाज हैं...

ग्वालियर में पानी की किल्लत को लेकर कांग्रेस पार्षद विनोद यादव ने कपड़े उतारकर टंकी में कूदने का प्रयास किया. आक्रोशित जनता ने निगम कर्मचारियों को बंधक बनाया, जिसके बाद प्रशासन ने रातों-रात सप्लाई बहाल की.

राज्यसभा सांसद एवं यूपी के पूर्व उपमुख्यमंत्री डा. दिनेश शर्मा ने राज्यसभा में जल संकट को गंभीर चुनौती बताया और इसके समाधान के लिए जल आडिट कराने का सुझाव दिया.

Dinesh Sharma On Water audit: राज्यसभा सांसद एवं यूपी के पूर्व उपमुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा ने राज्यसभा में शून्य प्रहर के दौरान जल संकट को गंभीर चुनौती बताते हुए इसके समाधान के लिए जल ऑडिट कराने का सुझाव दिया है.

एक ताजा स्टडी के मुताबिक, गंगा नदी बेसिन ने 1300 साल में सबसे भयानक सूखा देखा. 1991-2020 के बीच सूखा 76% ज्यादा गंभीर था. जिसके मुख्‍य कारण जलवायु परिवर्तन, कम मानसून और ज्यादा भूजल निकासी थे. भविष्‍य में लाखों लोगों के जीवन पर संकट आएगा.

भारत गंभीर जल संकट से जूझ रहा है. 2025-26 में दूषित नल के पानी से 5,500 से अधिक लोग बीमार हुए और 34 मौतें हुईं. गंगा-यमुना जैसी नदियां औद्योगिक अपशिष्ट और सीवेज से प्रदूषित हैं.