बृजभूषण शरण सिंह
Brij Bhushan Sharan Singh court case: महिला पहलवानों से जुड़े कथित यौन उत्पीड़न मामले में पूर्व सांसद और भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ सकती हैं. राऊज एवेन्यू कोर्ट ने उन्हें जवाब दाखिल करने के लिए एक सप्ताह का अंतिम मौका दिया है. अदालत ने साफ कर दिया है कि इसके बाद जवाब देने के लिए अतिरिक्त समय नहीं मिलेगा. इस मामले में पूर्व WFI सचिव विनोद तोमर को भी नोटिस जारी किया गया है.
विशेष न्यायाधीश दिग्विनय सिंह की अदालत अब एक सप्ताह बाद मामले की अगली सुनवाई करेगी. महिला पहलवानों ने मजिस्ट्रेट कोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें सबूतों के अभाव में बृजभूषण शरण सिंह और विनोद तोमर को बरी कर दिया गया था.
महिला पहलवानों ने फैसले पर उठाए सवाल
पहलवानों की ओर से दायर याचिका में आरोप लगाया गया है कि मजिस्ट्रेट कोर्ट ने उपलब्ध सबूतों का सही तरीके से आकलन नहीं किया. याचिका के मुताबिक, फैसले में कुछ तथ्यों को चुनिंदा तरीके से देखा गया और कानूनी सिद्धांतों का भी उचित पालन नहीं हुआ.
याचिका में यह भी कहा गया है कि पीड़िता के व्यवहार को लेकर पुरानी रूढ़िवादी सोच के आधार पर निष्कर्ष निकाले गए. महिला पहलवानों का कहना है कि निचली अदालत का आदेश कानून की कसौटी पर खरा नहीं उतरता. उन्होंने बृजभूषण के साथ-साथ विनोद तोमर को बरी किए जाने के फैसले को भी चुनौती दी है.
दोनों पक्षों ने रखी अपनी दलीलें
सुनवाई के दौरान महिला पहलवानों की ओर से पेश वरिष्ठ वकील रेबेका जॉन ने दोनों आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की थी. वहीं, बचाव पक्ष के वकील राजीव मोहन ने आरोपों को खारिज करते हुए उन्हें मनगढ़ंत और बदनाम करने की नीयत से लगाया गया बताया था. उन्होंने दोनों आरोपियों को बरी करने की मांग की थी.
2023 में दाखिल हुई थी चार्जशीट
दिल्ली पुलिस ने 15 जून 2023 को बृजभूषण के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया था. इसमें छह महिला पहलवानों की शिकायतों से जुड़े कथित यौन उत्पीड़न, पीछा करने और आपराधिक धमकी देने के आरोप शामिल थे. चार्जशीट में चार राज्यों के कम से कम 22 गवाहों के बयान दर्ज होने की बात कही गई थी.
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अदालत ने 10 मई 2024 को बृजभूषण के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश दिया था. इसके बाद जुलाई 2025 में मुकदमे की कार्यवाही आगे बढ़ाने और अभियोजन पक्ष के गवाहों के बयान दर्ज करने का निर्देश दिया गया. अब महिला पहलवानों की अपील पर होने वाली सुनवाई से तय होगा कि निचली अदालत के फैसले की आगे क्या कानूनी स्थिति बनती है.
-भारत एक्सप्रेस
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