Supreme Court: छत्तीसगढ़ के पूर्व आईएएस अधिकारी अनिल टुटेजा को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिल गई है. सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से दायर उस याचिका का निपटारा कर दिया है, जिसमें टुटेजा को मिली जमानत को रद्द करने की मांग की गई है.
शक को पुख्ता सबूतों में बदलना जरूरी: सुप्रीम कोर्ट
सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने यह फैसला सुनाया है. छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि मजबूत शक तो है, लेकिन इस शक को पुख्ता सबूतों में बदलना होगा. कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि हाई कोर्ट की टिप्पणियों का ट्रायल पर कोई असर नहीं पड़ेगा. अगर जमानत का कोई दुरुपयोग होता है, तो राज्य सरकार इसे रद्द कराने के लिए हाई कोर्ट जा सकती है. सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि हम आपकी बात से सहमत है. इस बात का मजबूत शक हैं कि भ्रष्टाचार में शामिल है.
जमानत के दुरुपयोग पर हाई कोर्ट जाने की छूट
मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने कहा कि ये निष्कर्ष बाध्यकारी नहीं होंगे. आप यह जानते है. छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से पेश वकील ने कहा कि जमानत मिलने के बाद जमानत के शर्तो के उल्लंघन का मामला सामने आया है. सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि अगर जमानत का कोई दुरुपयोग होता है तो आप जमानत रद्द करने की मांग को लेकर हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकते है. इससे पहले मई में सुप्रीम कोर्ट ने एक छत्तीसगढ़ शराब घोटाला मामले में जमानत दे दिया था. टुटेजा को 21 अप्रैल 2024 को मामले में गिरफ्तार किया गया था. सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा था कि अनिल टुटेजा के खिलाफ करीब 85 गवाहों से पूछताछ की जानी बाकी है और ट्रायल पूरा होने में अभी लंबा वक्त लगेगा.
ट्रायल के दौरान तय होगी आरोपों की सच्चाई
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया था कि आरोपी गंभीर जरूर हैं, लेकिन उनकी सच्चाई ट्रायल के दौरान ही तय होगा. जमानत देते हुए कोर्ट ने कहा था कि अनिल टुटेजा जमानत पर रिहा होने के बाद छत्तीसगढ़ राज्य से बाहर रहेंगे. उन्हें किसी भी सेवारत सरकारी अधिकारी से संपर्क करने की अनुमति नहीं होगी. इसके अलावा कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया था कि वे किसी भी गवाह को प्रभावित नहीं करेंगे, गवाही से छेड़छाड़ करने या जांच को प्रभावित करने की कोशिश नहीं करेंगे.
ईडी के मुताबिक साल 2019 से 2022 के बीच का है घोटाला
बता दें कि ईडी के मुताबिक छत्तीसगढ़ शराब घोटाला मामला साल 2019 से 2022 के बीच का है. उस दौरान राज्य में कांग्रेस की सरकार थी. जांच एजेंसी ईडी का दावा है कि इस पर पूरे नेटवर्क ने शराब नीति में हेरफेर कर अवैध कमाई का विशाल सिंडिकेट तैयार किया.
-भारत एक्सप्रेस
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