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Solar System End: खगोलविदों ने एक मृत तारे के चारों ओर गैस और मलबे की दोहरी डिस्क का पता लगाया है, जो भविष्य में हमारी पृथ्वी और सौरमंडल के अंत के बारे में बड़े संकेत देती है.
चिली के टेलिस्कोप से किए गए अध्ययन में ‘जे1328-1450’ नामक व्हाइट ड्वार्फ तारे के पास दोहरी गैसीय डिस्क खोजी गई है. वैज्ञानिकों का अनुमान है कि इस भारी तबाही के बाद भी वहां प्लूटो के आकार का एक पिंड बचा हो सकता है. यह अनोखी खोज खगोल विज्ञान को यह समझने में मदद कर रही है कि तारे की मौत के बाद उसके ग्रह तंत्र का क्या हाल होता है.
मृत तारे के पास मिली मलबे की अनोखी डिस्क
खगोलविदों ने चिली स्थित वेरी लार्ज टेलिस्कोप (VLT) की मदद से एक मृत तारे के चारों ओर मलबे की दोहरी डिस्क की खोज की है. ‘जे1328-1450’ (J1328-1450) नाम के इस व्हाइट ड्वार्फ (सफेद बौने तारे) के पास गैस के दो अलग-अलग छल्ले मिले हैं, जिनके बीच एक खाली गैप मौजूद है. वैज्ञानिकों का मानना है कि इस भयानक तबाही के बाद भी प्लूटो के आकार का एक पिंड वहां सुरक्षित बचा हो सकता है. यह दुर्लभ ढांचा भविष्य में हमारे सौरमंडल और पृथ्वी के संभावित अंत की एक डरावनी तस्वीर पेश करता है.
कैसे बनती हैं मृत तारे के आसपास ऐसी दो रिंग्स?
जब सूरज जैसे तारे अपने जीवन के अंतिम चरण में पहुंचते हैं, तो वे फैलने लगते हैं और उनकी बाहरी परतें अंतरिक्ष में बिखर जाती हैं. इस प्रक्रिया में आसपास के कई ग्रह नष्ट हो जाते हैं या उनकी कक्षाएं पूरी तरह बदल जाती हैं. तबाही से बचे चट्टानी पिंड तारे के भयंकर गुरुत्वाकर्षण के कारण अस्थिर कक्षाओं में पहुंच जाते हैं और आपस में टकराकर धूल तथा गैस का मलबा बनाते हैं. यही मलबा मृत तारे के चारों ओर घूमती हुई डिस्क का हिस्सा बन जाता है.
क्या मृत तारे के पास बचा है प्लूटो जितना बड़ा ग्रह?
शोधकर्ताओं ने दोनों डिस्क की संरचना और गति का अध्ययन करके उनमें मौजूद संभावित पिंडों के आकार का अनुमान लगाया है. अंदरूनी डिस्क से जुड़ा पिंड कुछ किलोमीटर व्यास वाला एक छोटा एस्टेरॉयड हो सकता है, जबकि बाहरी डिस्क से जुड़ा पिंड काफी बड़ा यानी प्लूटो या चंद्रमा के आकार तक का हो सकता है. हालांकि, वैज्ञानिकों ने अभी इन पिंडों को सीधे तौर पर नहीं देखा है, लेकिन उनकी मौजूदगी के संकेत मलबे की गति से जरूर मिले हैं.
मलबे में मिले तत्वों से क्या खुलासे हुए?
टेलिस्कोप से मिले स्पेक्ट्रम के विश्लेषण में कैल्शियम, ऑक्सीजन, मैग्नीशियम और आयरन जैसे भारी तत्व पाए गए हैं, जो चट्टानी ग्रहों में आम तौर पर होते हैं. दोनों डिस्क की रासायनिक संरचना में भी अंतर देखा गया है, जिससे संकेत मिलता है कि मलबा किसी बड़े ग्रह के अलग-अलग हिस्सों (जैसे उसकी परत या भीतरी भाग) से आया होगा.
क्या सूरज के खत्म होने पर पृथ्वी भी मिट जाएगी?
बहुत दूर भविष्य में हमारा सूरज भी अपना ईंधन खत्म करने के बाद एक व्हाइट ड्वार्फ में बदल जाएगा. उससे पहले वह एक ‘रेड जाइंट’ (लाल दानव) तारे के रूप में फैलेगा, जिससे पृथ्वी का भविष्य गंभीर खतरे में पड़ जाएगा. हालांकि वैज्ञानिक अभी यह पूरी तरह से नहीं कह सकते कि पृथ्वी का अंत बिल्कुल जे1328-1450 जैसे सिस्टम की तरह ही होगा, लेकिन यह खोज ब्रह्मांड में ग्रहों के अंतिम दिनों को समझने का एक बड़ा जरिया जरूर बन रही है.
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-भारत एक्सप्रेस
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