राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण को रोकने के लिए लागू किए जा रहे कड़े नियमों से कानूनी गलियारे में हड़कंप मच गया है. 1 नवंबर 2026 से गैर-बीएस VI (BS-6) वाहनों के प्रवेश पर पाबंदी की तैयारी के बीच सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) ने सुप्रीम कोर्ट के सेक्रेटरी जनरल को पत्र लिखा है. एसोसिएशन ने मांग की है कि नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम जैसे दिल्ली-एनसीआर के विभिन्न शहरों से आने वाले वकीलों को इन वाहन प्रतिबंधों से विशेष छूट या राहत दी जाए.
न्यायिक प्रक्रिया बाधित होने का जताया डर
एससीबीए का मानना है कि यह मामला सिर्फ वकीलों की व्यक्तिगत सुविधा का नहीं है, बल्कि इससे पूरी न्यायिक व्यवस्था प्रभावित हो सकती है. एसोसिएशन ने स्पष्ट किया कि यदि वकील समय पर अदालत नहीं पहुंच पाएंगे, तो मुकदमों की सुनवाई, पैरवी और अदालती कार्यवाही पर सीधा असर पड़ेगा.
दिल्ली में रहने और मकानों का खर्च अधिक होने के कारण बड़ी संख्या में वकील और अदालती कर्मचारी एनसीआर के शहरों में रहते हैं. वे रोजाना अपने निजी वाहनों से सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट आते हैं. ऐसे में अचानक प्रतिबंध लागू होने पर तुरंत वैकल्पिक परिवहन की व्यवस्था करना बेहद कठिन होगा.
हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने भी उठाई थी आवाज
इससे पहले दिल्ली हाईकोर्ट बार एसोसिएशन (DHCBA) के अध्यक्ष एन. हरिहरन ने भी कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश और उपराज्यपाल को पत्र भेजकर जजों, वकीलों और कोर्ट कर्मचारियों को रियायत देने की मांग की थी.
उल्लेखनीय है कि दिल्ली सरकार के नए नियमों के अनुसार, राज्य से बाहर पंजीकृत गैर-बीएस6 पेट्रोल और डीजल वाहनों के प्रवेश पर कड़ाई से रोक लगाने की योजना है, जबकि सीएनजी और इलेक्ट्रिक वाहनों को इस पाबंदी से बाहर रखा गया है. बार एसोसिएशनों का कहना है कि न्याय प्रक्रिया को सुचारू बनाए रखने के लिए कानूनी पेशेवरों को भी इस नियम में छूट दी जानी चाहिए.
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-भारत एक्सप्रेस
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