अयोध्या धाम में 30 अक्टूबर और 2 नवंबर 1990 के हुतात्मा कारसेवकों की स्मृति में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया. शहीद मार्ग स्थित दिगंबर अखाड़ा परिसर में हुतात्मा कारसेवक स्मारक समिति की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में संत-महंत, जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में रामभक्त मौजूद रहे. कार्यक्रम के दौरान बलिदानी कारसेवकों को श्रद्धासुमन अर्पित किए गए और उनके योगदान को याद किया गया.
चम्पत राय ने बताया राम मंदिर आंदोलन का महत्व
विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय उपाध्यक्ष चम्पत राय ने श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुए कहा कि श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन किसी एक दिन या एक संगठन का संघर्ष नहीं था, बल्कि यह हिंदू समाज की कई सदियों तक चली आस्था और समर्पण की यात्रा का परिणाम है. उन्होंने कहा कि 30 अक्टूबर और 2 नवंबर को बलिदान देने वाले कारसेवक ही आज के भव्य राम मंदिर की वास्तविक नींव हैं. उनके त्याग और समर्पण को कभी भुलाया नहीं जा सकता. उन्होंने कहा कि उस समय की सरकार ने निहत्थे और शांतिपूर्ण कारसेवकों पर गोलियां चलाने का फैसला लिया था, लेकिन इसके बावजूद आंदोलन रुका नहीं. अंततः हिंदू समाज के साहस और संकल्प की जीत हुई और राम मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त हुआ.
वैदिक मंत्रों से गूंजा पूरा परिसर
श्रद्धांजलि कार्यक्रम की शुरुआत हुतात्मा कारसेवकों के चित्रों पर माल्यार्पण और पुष्पांजलि अर्पित कर की गई. संत-महंतों और जनप्रतिनिधियों ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया. विभिन्न संस्कृत विद्यालयों के विद्यार्थियों ने वैदिक मंत्रोच्चार किया, जिससे पूरा वातावरण आध्यात्मिक और भक्तिमय हो गया.
राजेन्द्र पंकज ने सुनाया गोलीकांड का इतिहास
विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय मंत्री राजेन्द्र सिंह “पंकज” ने 1990 की घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि संतों के आह्वान पर देश के गांव-गांव से लाखों रामभक्त अयोध्या पहुंचे थे. उन्होंने बताया कि प्रशासन ने पहले बैरिकेडिंग की, फिर लाठीचार्ज किया और बाद में गोली चलाने का आदेश दिया. उन्होंने कहा कि हनुमानगढ़ी और शहीद मार्ग पर हुआ गोलीकांड इतिहास के सबसे दर्दनाक अध्यायों में शामिल है. हालांकि, उसी बलिदान ने राम जन्मभूमि आंदोलन को नई ऊर्जा और अमर पहचान दी.
कारसेवकों के बलिदान से बढ़ा अयोध्या का गौरव
अयोध्या के महापौर गिरीशपति त्रिपाठी ने कहा कि आज अयोध्या विश्व की सांस्कृतिक राजधानी के रूप में पहचान बना रही है. इसके पीछे कारसेवकों का बलिदान और संघर्ष सबसे बड़ी वजह है. उन्होंने कहा कि नगर निगम हुतात्माओं की स्मृतियों को स्थायी रूप से संरक्षित करने के लिए प्रतिबद्ध है.
संतों ने साझा की आंदोलन की यादें
श्री राम वल्लभा कुंज के राजकुमार दास जी महाराज ने कहा कि वर्ष 1990 में अयोध्या के अनेक आश्रमों और मंदिरों ने घायल कारसेवकों को आश्रय दिया था. उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने राम मंदिर के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया, उनकी स्मृति आज भी हर रामभक्त के मन में जीवित है. अंतरराष्ट्रीय कथावाचक बाल भारत जी महाराज ने कहा कि कारसेवकों ने अपने जीवन और रक्त से रामभक्ति का उदाहरण प्रस्तुत किया. उनके अनुसार 2 नवंबर का दिन एक ओर पीड़ा की याद दिलाता है, तो दूसरी ओर प्रेरणा का स्रोत भी है.
संत समाज ने गोलीकांड को बताया धर्म पर हमला
हनुमानगढ़ी और बड़ा भक्तमाल के महंतों ने कहा कि वे स्वयं उस दौर के साक्षी रहे हैं. उनके मुताबिक कारसेवकों पर गोली चलाया जाना केवल व्यक्तियों पर हमला नहीं था, बल्कि आस्था और धर्म पर भी चोट थी. उन्होंने कहा कि आज हनुमानगढ़ी से श्रीराम मंदिर तक का मार्ग जिस तरह श्रद्धालुओं के लिए खुला है, वह उन्हीं बलिदानों का परिणाम है.
दिगंबर अखाड़े में बनेगा स्थायी स्मारक
दिगंबर अखाड़ा के महंत श्रीमंत सुरेश दास जी महाराज ने कहा कि शहीद मार्ग और दिगंबर अखाड़ा उस संघर्ष के गवाह रहे हैं. उन्होंने बताया कि यहां हुतात्मा कारसेवकों की याद में स्थायी स्मारक स्थापित किया जाएगा. साथ ही हर वर्ष श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित कर उनकी स्मृतियों को जीवित रखा जाएगा.
वक्ताओं ने तत्कालीन सरकार पर साधा निशाना
महानगर संघ चालक प्रो. विक्रम प्रसाद पांडे और उपस्थित विधायकों ने अपने संबोधन में कहा कि तत्कालीन सरकार ने तुष्टीकरण की राजनीति के चलते रामभक्तों पर गोली चलवाई थी. उन्होंने कहा कि “जय श्रीराम” का उद्घोष करते हुए बलिदान देने वाले कारसेवकों की वजह से ही आज अयोध्या नया वैभव प्राप्त कर सकी है.
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संतों और जनप्रतिनिधियों की रही मौजूदगी
कार्यक्रम की अध्यक्षता दिगंबर अखाड़ा के महंत श्रीमंत सुरेश दास जी महाराज ने की, जबकि संयोजन श्री राम लखन दास जी महाराज ने संभाला. कार्यक्रम का संचालन बावनजी मंदिर के श्रीमंत वैदेही वल्लभ शरण जी महाराज ने किया. इस अवसर पर उदासीन आश्रम के भरत दास जी महाराज, वासुदेवाचार्य जी, गौरीशंकर दास जी, दिनेश दास जी, धर्मदास जी, कमलनयन दास जी, त्रिवेणीराम जी, डॉ. भरत दास जी और बिंदुगद्याचार्य देवेन्द्रप्रसादाचार्य जी समेत अनेक संत उपस्थित रहे.
इसके अलावा विधायक वेद प्रकाश गुप्ता, रामचन्द्र यादव, अभय सिंह, चन्द्रभानु पासवान, जिला पंचायत सदस्य प्रतिनिधि आलोक सिंह ‘रोहित’, चेयरमैन धर्मेन्द्र सिंह टिल्लू, डॉ. संजीव थापर, सीए गोविंद बंसल, आशुतोष सिंह, जय प्रकाश सिंह, विजय सिंह बंटी, श्रीप्रकाश पाठक, डॉ. आभा सिंह, अमरीश सिंह, अवधेश पांडेय बादल, अभिषेक मिश्रा, ब्लॉक प्रमुख अभिषेक सिंह, रवि सिंह और आचार्य इंद्रदेव मिश्र सहित अनेक गणमान्य लोग कार्यक्रम में शामिल हुए.
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