Bharat Express DD Free Dish
Uttar Pradesh Police Mission Shakti Digital
Uttar Pradesh Police Mission Shakti Digital

‘क्वेश्चन पेपर और आंसर-की जारी करने में क्या हर्ज है?’: NEET-PG में पारदर्शिता पर SC सख्त, US मॉडल की दलील खारिज कर NBEMS से मांगा जवाब

NEET PG transparency Supreme Court NBEMS answer key: NEET-PG पारदर्शिता पर सुप्रीम कोर्ट ने NBEMS को कड़ी फटकार लगाई. USMLE मॉडल की दलील खारिज की, पूछा- प्रश्नपत्र और आंसर-की जारी करने में क्या परेशानी है?

Supreme Court
Vijay Ram Edited by Vijay Ram

नई दिल्ली: नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट-पोस्टग्रेजुएट (NEET-PG) परीक्षा में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और वास्तविक प्रश्नपत्र व आंसर-की सार्वजनिक करने की मांग को लेकर दायर याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है. जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की खंडपीठ ने नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन इन मेडिकल साइंसेज (NBEMS) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए. सुनवाई के दौरान जब बोर्ड के वकील ने अमेरिकी चिकित्सा परीक्षा ‘USMLE’ मॉडल का हवाला देते हुए प्रश्नपत्र गोपनीय रखने का तर्क दिया, तो पीठ ने उसे सिरे से खारिज करते हुए स्पष्ट कहा कि “USMLE हमारा मॉडल नहीं है.” कोर्ट ने एनबीईएमएस को निर्देश दिया कि वह हलफनामा दाखिल कर बताए कि छात्रों के लिए प्रश्नपत्र और उत्तर कुंजी जारी करने में क्या व्यावहारिक बाधा है.

‘पारदर्शिता से क्यों बच रहा है बोर्ड?’: सुप्रीम कोर्ट

याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता सत्यम सिंह राजपूत ने दलील दी कि परीक्षा के बाद प्रश्नपत्र और आधिकारिक उत्तर कुंजी जारी न करना मूल्यांकन प्रक्रिया को संदेह के घेरे में खड़ा करता है. इस पर खंडपीठ ने एनबीईएमएस से सीधा सवाल किया कि जब देश की अन्य राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में उत्तर कुंजी और प्रश्नपत्र सार्वजनिक किए जाते हैं, तो मेडिकल पीजी परीक्षा में इस पारदर्शिता से परहेज क्यों किया जा रहा है? कोर्ट ने कहा कि छात्रों को अपने प्रदर्शन का सटीक आकलन करने और मूल्यांकन पर आपत्ति दर्ज कराने का अधिकार मिलना चाहिए.

कट-ऑफ घटाने के केंद्र के फैसले को भी दी गई चुनौती

मामले में खाली सीटों को भरने के लिए कट-ऑफ परसेंटाइल घटाए जाने की नीति को लेकर भी तीखी बहस हुई. केंद्र सरकार ने अपने हलफनामे में बताया कि स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय तथा राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) ने संभावित खाली सीटों की बड़ी संख्या को देखते हुए कट-ऑफ कम करने का निर्णय लिया है. सरकार के अनुसार, इस फैसले से तीसरे राउंड की काउंसलिंग के लिए 1,00,054 अतिरिक्त उम्मीदवार पात्र होंगे, जिससे कुल योग्य अभ्यर्थियों की संख्या बढ़कर 2,28,170 पहुंच जाएगी.

‘शून्य कट-ऑफ से मरीजों की सुरक्षा और मेरिट पर खतरा’

दूसरी ओर, सामाजिक कार्यकर्ता हरिशरण देवगन, डॉ. सौरव कुमार, डॉ. लक्ष्य मित्तल और डॉ. आकाश द्वारा दायर जनहित याचिका में कट-ऑफ घटाने की अधिसूचना को मनमाना और असंवैधानिक करार देते हुए रद्द करने की मांग की गई है. याचिका में कहा गया कि सामान्य वर्ग के लिए कट-ऑफ 50 से घटाकर 7 परसेंटाइल और आरक्षित वर्ग के लिए 40 से घटाकर शून्य परसेंटाइल करना अनुच्छेद 14 (समानता के अधिकार) तथा NMC एक्ट 2019 का खुला उल्लंघन है. याचिकाकर्ताओं ने आगाह किया कि पोस्टग्रेजुएट स्तर पर मेरिट से समझौता कर शून्य अंक पाने वालों को विशेषज्ञ डॉक्टर बनाने की अनुमति देना देश के सार्वजनिक स्वास्थ्य और मरीजों की जान के साथ सीधा खिलवाड़ है.

‘बार का अपराधीकरण न्याय व्यवस्था को कर रहा खोखला’: इलाहाबाद HC ने कोर्ट नंबर 49 में हिंसा का लिया स्वतः संज्ञान, वकीलों पर अवमानना और FIR के निर्देश



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read


Uttar Pradesh Police Mission Shakti Digital