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योगी सरकार के पारदर्शी कानून-व्यवस्था मॉडल की न्यायिक पुष्टि: UP के भीतर गोवंश परिवहन पर परमिट की बाध्यता नहीं, इलाहाबाद HC ने निरस्त की अवैध जब्ती

Allahabad High Court bovine transportation permit Uttar Pradesh: इलाहाबाद HC का फैसला- यूपी के भीतर गोवंश परिवहन के लिए परमिट जरूरी नहीं. मिर्जापुर प्रशासन की जब्ती रद्द, दोषी अधिकारियों से मुआवजा वसूलने की छूट.

(प्रतीकात्मक तस्वीर)

Vijay Ram Edited by Vijay Ram

प्रयागराज: उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ‘रूल ऑफ लॉ’ और न्यायपूर्ण सुशासन के संकल्प को इलाहाबाद हाई कोर्ट के एक महत्वपूर्ण फैसले से नई मजबूती मिली है. हाई कोर्ट ने स्पष्ट व्यवस्था दी है कि उत्तर प्रदेश गोवध निवारण नियमावली के तहत राज्य की भौगोलिक सीमाओं के भीतर गोवंश के परिवहन के लिए किसी परमिट की आवश्यकता नहीं है. अदालत ने मिर्जापुर प्रशासन द्वारा वाहन जब्ती की मनमानी कार्रवाई को निरस्त करते हुए कहा कि केवल सीमावर्ती जिले में वाहन होने के आधार पर गोकशी का अनुमान नहीं लगाया जा सकता. कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह पीड़ित वाहन मालिक को मुआवजा प्रदान करे और इस मनमाने निर्णय के लिए जिम्मेदार दोषी अधिकारियों से इसकी वसूली करे.

कानून के शासन की सर्वोच्चता: दोषी अफसरों पर तय होगी जवाबदेही

न्यायमूर्ति संदीप जैन की एकलपीठ ने नेशार साह की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया. योगी सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति का मूल आधार ही यह रहा है कि कानून का पालन निष्पक्षता से हो और किसी भी निर्दोष नागरिक या उसकी आजीविका का उत्पीड़न न हो. मामले में मिर्जापुर के लालगंज थाने द्वारा 5 फरवरी 2025 को एक बोलेरो पिकअप को रोका गया था, जिसे बाद में डीएम और कमिश्नर कोर्ट ने जब्त करने का आदेश दिया था. हालांकि, सरकारी वकील ने केस डायरी के आधार पर निष्पक्ष रूप से यह स्वीकार किया कि पशु चिकित्सा अधिकारी की जांच में सभी मवेशी पूरी तरह स्वस्थ पाए गए थे और किसी क्रूरता या गोमांस के प्रमाण नहीं मिले थे.

राज्य के भीतर स्वतंत्र परिवहन, अंतरराज्यीय तस्करी पर ही परमिट लागू

कोर्ट ने उत्तर प्रदेश गोवध निवारण नियमावली 1964 के नियम 16 का हवाला देते हुए स्थिति पूरी तरह स्पष्ट कर दी. अदालत ने रेखांकित किया कि परमिट की अनिवार्यता केवल तभी लागू होती है जब गोवंश को उत्तर प्रदेश की सीमा से बाहर किसी अन्य राज्य में ले जाया जा रहा हो. राज्य के अंदर एक जिले से दूसरे जिले में वैध परिवहन पर कोई रोक नहीं है. कोर्ट ने कहा कि संविधान का अनुच्छेद 21 प्रत्येक नागरिक को आजीविका की सुरक्षा देता है, जिसका संरक्षण करना प्रशासन का पहला दायित्व है.

एक सप्ताह में वाहन लौटाने और क्षतिपूर्ति देने का आदेश

हाई कोर्ट ने डीएम मिर्जापुर और कमिश्नर के आदेशों को रद्द करते हुए वाहन को एक सप्ताह के भीतर रिलीज करने का निर्देश दिया है. इसके साथ ही जब्ती की तिथि से वाहन की वास्तविक वापसी तक ₹25,000 प्रतिमाह की दर से आर्थिक क्षतिपूर्ति तथा ₹25,000 का अतिरिक्त मानसिक उत्पीड़न मुआवजा देने का आदेश दिया है. अदालत ने योगी सरकार को यह पूर्ण स्वतंत्रता दी है कि वह अपनी प्रशासनिक शुचिता बनाए रखने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच कराकर मुआवजे की यह राशि उनके वेतन से वसूल कर सकती है, जिससे कार्यप्रणाली में पारदर्शिता का कड़ा संदेश जाए.



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