दिल्ली हाईकोर्ट ने उन्नाव रेप मामले में पीड़िता के पिता की न्यायिक हिरासत में हुई मौत के मामले में दोषी जयदीप सेंगर द्वारा दायर अंतरिम जमानत याचिका पर केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है. जयदीप सेंगर ने अपनी सुनाई गई सजा को निलंबित करने और जमानत पर रिहा करने की गुहार लगाई है. इस मामले की अगली सुनवाई 10 दिसंबर को होगी.
महंगी दवाइयां न मिलने की शिकायत
सुनवाई के दौरान जयदीप सेंगर की ओर से पेश वकील ने कोर्ट को अवगत कराया कि हाईकोर्ट के पिछले निर्देशों के बावजूद उन्हें जेल में जरूरी दवाइयां उपलब्ध नहीं कराई जा रही हैं, क्योंकि वे दवाइयां काफी महंगी हैं. वकील ने अदालत को यह भी आश्वस्त किया कि उनका परिवार इन महंगी दवाइयों का पूरा खर्च उठाने के लिए तैयार है.
गंभीर बीमारी का दावा
जयदीप सेंगर की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि वह मुंह के एडवांस स्टेज के कैंसर से पीड़ित रहे हैं और उनके शरीर में कैंसर के दोबारा उभरने (Recurrence) के लक्षण दिखाई दे रहे हैं. इसके उचित इलाज के लिए उन्हें चिकित्सकीय सहायता की आवश्यकता है.
जेल प्रशासन को निर्देश
कैदी की स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए हाईकोर्ट ने जेल प्रशासन को कड़े निर्देश दिए हैं कि उन्हें सभी आवश्यक दवाइयां और उचित मेडिकल केयर तुरंत उपलब्ध कराई जाए.
अदालती कार्रवाई और सुप्रीम कोर्ट का निर्देश
इससे पहले अदालत ने मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट का अवलोकन करने के बाद उनकी नियमित जमानत याचिका को खारिज कर दिया था. पिछली सुनवाई में कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि उनकी अंतरिम जमानत की अवधि को 20 फरवरी से आगे नहीं बढ़ाया जा सकता है.
सुप्रीम कोर्ट का रुख
हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक आदेश में स्पष्ट किया था कि दिल्ली हाईकोर्ट सेंगर की अपील और पीड़िता (Victim) द्वारा सजा बढ़ाने की मांग वाली याचिका पर योग्यता (Merits) के आधार पर तीन महीने के भीतर निपटारा करे. सीजेआई सूर्यकांत ने यह भी टिप्पणी की थी कि चूंकि आरोपी सजा का एक बड़ा हिस्सा पहले ही जेल में काट चुका है, इसलिए हाईकोर्ट को उसकी जमानत की मांग पर तीन महीने के भीतर फैसला लेना चाहिए.
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मामले की पृष्ठभूमि और सजा
जयदीप सेंगर को ट्रायल कोर्ट ने उन्नाव रेप पीड़िता के पिता की हिरासत में हुई मौत के चर्चित मामले में दोषी करार देते हुए 10 साल की कैद की सजा सुनाई है. इस सजा के खिलाफ उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था और हाईकोर्ट द्वारा राहत न मिलने पर सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी.
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