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Supreme Court Jantar Mantar Police Action: दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कथित बर्बरता को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है. शीर्ष अदालत ने मामले की जांच के लिए गठित हाई पावर्ड कमेटी को एक महीने के भीतर अपनी पहली रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है. कोर्ट ने साफ कहा कि वह इस मामले में नतीजों का अनिश्चितकाल तक इंतजार नहीं कर सकता. सुनवाई के दौरान अदालत ने समिति की अब तक की जांच पर भी सवाल उठाए और पीड़ितों से जुड़े वीडियो और अन्य सबूतों पर गंभीरता से विचार करने को कहा.
एक महीने में रिपोर्ट सौंपने का निर्देश
सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए हाई पावर्ड कमेटी को एक महीने के भीतर अपनी पहली रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया. अदालत ने कहा कि जांच में तेजी लाने की जरूरत है और केवल कार्रवाई का ब्योरा देने से काम नहीं चलेगा. कमेटी को पुलिस कार्रवाई से जुड़े आरोपों की जांच कर अपने निष्कर्ष भी सामने रखने होंगे.
31 अक्टूबर की रिपोर्ट पर सुप्रीम कोर्ट ने जताई नाराजगी
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि कमेटी ने 31 अक्टूबर को जो रिपोर्ट सौंपी थी, वह महज एक स्टेटस रिपोर्ट थी. इसमें अब तक की गई कार्रवाई और जांच की प्रगति का विवरण दिया गया था, लेकिन पुलिस की कथित बर्बरता के आरोपों पर कोई ठोस निष्कर्ष नहीं था. अदालत ने स्पष्ट किया कि जांच समिति को केवल उन पीड़ितों की शिकायतों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, जिन्होंने खुद उससे संपर्क किया है. वकीलों और समाज के हित में काम करने वाले लोगों की ओर से भेजी गई याचिकाओं, वीडियो क्लिप और अन्य सबूतों पर भी विचार किया जाना चाहिए.
पीड़ितों के वीडियो और सबूतों की भी होगी जांच
सुप्रीम कोर्ट ने शिकायत दर्ज कराने के लिए बनाए गए पोर्टल पर बेहद कम शिकायतें मिलने का संज्ञान लिया. इसके बाद अदालत ने याचिकाकर्ताओं को समिति के पास वीडियो क्लिप और अन्य सबूत भेजने की अनुमति दे दी. कोर्ट ने कहा कि मामले में नियुक्त एमिकस क्यूरी और नोडल अधिकारियों को शिकायतें, वीडियो और दूसरे जरूरी तथ्य उपलब्ध कराए जाएंगे. इसके बाद कमेटी इनकी जांच कर सकेगी और अपनी आगे की सिफारिशें पेश करेगी.
पैलेट गन के इस्तेमाल की अनुमति किसने दी?
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वकील वृंदा ग्रोवर ने भी कई अहम सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि मामले में दोनों पक्षों को अपने-अपने तथ्य पेश करने होंगे. उन्होंने सवाल किया कि प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन के इस्तेमाल की अनुमति किसने दी थी? वृंदा ग्रोवर ने कमेटी की रिपोर्ट पर सवाल उठाते हुए कहा कि उसमें इस संबंध में कोई ठोस सबूत पेश नहीं किया गया है. उन्होंने पुलिस कार्रवाई से जुड़े तथ्यों की निष्पक्ष जांच की जरूरत पर जोर दिया.
रिटायर्ड DGP एलआर बिश्नोई का इस्तीफा स्वीकार
इस सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने मेघालय के रिटायर्ड पुलिस महानिदेशक डॉ. एलआर बिश्नोई का इस्तीफा भी स्वीकार कर लिया. वह जुलाई में छात्रों के विरोध प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा की जांच के लिए गठित हाई पावर्ड कमेटी के सदस्य थे. गौरतलब है कि पूर्व न्यायाधीश आर. सुभाष रेड्डी की अध्यक्षता में यह कमेटी पूरे मामले की जांच कर रही है. सुप्रीम कोर्ट के ताजा निर्देश के बाद अब समिति को एक महीने के भीतर अपनी पहली रिपोर्ट सौंपनी होगी. इसमें पुलिस कार्रवाई के आरोपों और पीड़ितों की ओर से उपलब्ध कराए गए सबूतों पर भी विचार करना होगा.
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