Sharjeel Imam Supreme Court Bail Plea
Delhi Riots Case: दरअसल, 5 जनवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने उमर खालिद और शरजील इमाम को दोबारा जमानत याचिका दाखिल करने की स्वतंत्रता दी थी.शीर्ष अदालत ने कहा था कि अभियोजन पक्ष के संरक्षित गवाहों की गवाही पूरी होने के बाद या 5 जनवरी 2026 से एक साल की अवधि पूरी होने पर, दोनों फिर से जमानत के लिए आवेदन कर सकते हैं. इसी आधार पर दोनों आरोपियों ने राहत पाने की कोशिश की थी. हालांकि दिल्ली में फरवरी 2020 में हुए दंगों की साजिश रचने के आरोपी शरजील इमाम ने अब सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है.दिल्ली हाई कोर्ट से जमानत याचिका खारिज होने के बाद इमाम ने शीर्ष अदालत में याचिका दाखिल कर राहत की मांग की है.इससे पहले हाई कोर्ट ने उनकी जमानत की दलीलों को स्वीकार करने से इनकार कर दिया था.इस मामले में दिल्ली पुलिस ने शरजील इमाम और उमर खालिद की भूमिका को गंभीर बताते हुए जमानत का विरोध किया है.
हाई कोर्ट ने क्यों खारिज की थी जमानत याचिका?
शरजील इमाम की ओर से दिल्ली हाई कोर्ट में जमानत की मांग करते हुए कहा गया था कि इसी मामले में आरोपी तसलीम अहमद और खालिद सैफी को ट्रायल में देरी के आधार पर जमानत मिल चुकी है.ऐसे में उन्हें भी समान आधार पर राहत दी जानी चाहिए. हालांकि, हाई कोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया.अदालत का कहना था कि तसलीम अहमद और खालिद सैफी की भूमिका उमर खालिद और शरजील इमाम से अलग है.इसलिए दोनों मामलों को एक समान मानकर जमानत देने की मांग नहीं की जा सकती.
जनवरी 2027 तक इंतजार करने का दिया गया था विकल्प
सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने दोनों पक्षों के वकीलों से पूछा था कि क्या वे जनवरी 2027 के पहले सप्ताह तक इंतजार करना चाहेंगे.अदालत ने बताया था कि दिल्ली दंगों से जुड़े एक अन्य आरोपी अथर खान की जमानत याचिका भी सुप्रीम कोर्ट में लंबित है. हालांकि, उमर खालिद और शरजील इमाम की ओर से पेश वकीलों ने जनवरी तक इंतजार करने से इनकार कर दिया था.उन्होंने हाई कोर्ट से मौजूदा समय में ही जमानतकि, दिल्ली पुलिस ने उनकी जमानत याचिकाओं का विरोध किया था.
दिल्ली पुलिस ने बताया था दंगों का मास्टरमाइंड
दिल्ली पुलिस ने अदालत में दाखिल अपने जवाब में शरजील इमाम और उमर खालिद को फरवरी 2020 के दिल्ली दंगों का मास्टरमाइंड बताया था.पुलिस का कहना था कि दोनों की जमानत याचिकाएं गलतफहमी पर आधारित हैं और कानूनी रूप से स्वीकार किए जाने योग्य नहीं हैं.
पुलिस ने जनवरी 2026 में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का भी हवाला दिया था.उसके मुताबिक, शीर्ष अदालत ने दोनों आरोपियों की भूमिका को कमांड अथॉरिटी वाला माना था और कहा था कि उनकी कथित संलिप्तता अन्य सह-आरोपियों से अलग थी.
कई बार खारिज हो चुकी है उमर खालिद की जमानत अर्जी
इस मामले में उमर खालिद की जमानत याचिका पहले भी तीन बार खारिज हो चुकी है.वहीं, 4 जुलाई को कड़कड़डूमा कोर्ट ने उमर खालिद और शरजील इमाम की ओर से दाखिल जमानत अर्जियों को खारिज कर दिया था.अदालत ने यूएपीए मामलों में जमानत से जुड़े कानूनी सवाल को सुप्रीम कोर्ट की बड़ी पीठ के समक्ष लंबित होने का हवाला दिया था.
गौरतलब है कि इस मामले में उमर खालिद, शरजील इमाम, गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर, शिफा उर रहमान, मोहम्मद सलीम खान और शादाब अहमद पर यूएपीए और भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप लगाए गए हैं.इन सभी पर फरवरी 2020 के दिल्ली दंगों की साजिश में शामिल होने का आरोप है.
भारत एक्सप्रेस
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