UGC New Rules 2026: सुप्रीम कोर्ट में UGC के नए नियमों पर सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने पुनर्विचार के संकेत दिए हैं. सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि सरकार विवादित UGC Regulations 2026 की समीक्षा के लिए कमेटी गठित करने पर विचार कर रही है.
UGC नियमों पर पुनर्विचार कर सकती है सरकार
UGC के नए नियमों के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने अहम जानकारी दी. सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि विवादित नियमों पर पुनर्विचार के लिए एक कमेटी गठित करने पर विचार किया जा रहा है. सरकार इस पूरे मामले की समीक्षा कर रही है, ताकि छात्रों की चिंताओं का समाधान हो सके और किसी भी वर्ग को असंतुष्ट या आशंकित महसूस न करना पड़े. इस मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ कर रही है. कोर्ट ने पहले ही UGC के नए नियमों पर रोक लगा रखी है.
हर छात्र के हितों की रक्षा जरूरी: CJI
सुनवाई के दौरान सीजेआई सूर्यकांत ने सभी छात्रों के हितों की रक्षा करने पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि हर छात्र के हितों का ध्यान रखा जाना चाहिए और युवा पीढ़ी की चिंताओं को भी गंभीरता से लिया जाना जरूरी है. सरकार की ओर से नियमों की समीक्षा करने की बात सामने आने के बाद इस मामले में आगे की कार्रवाई को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं.
UGC के नियमों पर क्यों हुआ विवाद?
UGC ने 13 जनवरी 2026 को नए नियम लागू किए थे. इनका मूल उद्देश्य विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में जातिगत भेदभाव को खत्म करना तथा वंचित वर्गों के छात्रों को सुरक्षित शैक्षणिक माहौल उपलब्ध कराना था. हालांकि, नियम लागू होने के बाद इनके प्रावधानों को लेकर विवाद शुरू हो गया. याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि नियमों के जरिए समाज को बांटने की कोशिश की जा रही है. उनका कहना है कि जातिगत भेदभाव किसी एक वर्ग तक सीमित नहीं है, बल्कि किसी भी समुदाय के व्यक्ति को इसका सामना करना पड़ सकता है.
नियम 3(C) को लेकर याचिकाकर्ताओं की आपत्ति
याचिकाकर्ताओं ने UGC के नियम 3(C) में जातिगत भेदभाव की परिभाषा को लेकर सवाल उठाए हैं. उनकी दलील है कि इस परिभाषा में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग को शामिल किया गया है, जबकि सामान्य वर्ग के लोगों को जातिगत भेदभाव की स्थिति में शिकायत दर्ज कराने का समान अधिकार नहीं मिल पाता. याचिकाकर्ताओं ने इसे संविधान के समानता के अधिकार और मौलिक अधिकारों के खिलाफ बताते हुए नियमों को असंवैधानिक घोषित करने की मांग की है.
शिकायतों में 100 फीसदी से अधिक वृद्धि का UGC ने दिया हवाला
UGC की ओर से नए नियमों के समर्थन में कहा गया है कि वर्ष 2020 से 2025 के बीच जातिगत भेदभाव से जुड़ी शिकायतों में 100 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई है. आयोग के मुताबिक, रोहित वेमुला और पायल तड़वी जैसे मामलों में सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों के बाद संस्थानों में निगरानी व्यवस्था मजबूत करना जरूरी हो गया था. UGC ने यह भी स्पष्ट किया है कि नियमों का पालन नहीं करने वाले संस्थानों के खिलाफ मान्यता रद्द करने या फंड रोकने जैसी सख्त कार्रवाई की जा सकती है.
सुप्रीम कोर्ट में दर्ज हैं कई याचिकाएं
UGC के नए नियमों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दर्जनों याचिकाएं दाखिल की जा चुकी हैं. सभी याचिकाओं में नियमों को असंवैधानिक घोषित करने की मांग की गई है. अब केंद्र सरकार की ओर से कमेटी गठित करने और नियमों की समीक्षा करने के संकेत के बाद इस मामले में आगे क्या फैसला होता है, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं.
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