Benjamin Netanyahu News: मध्य पूर्व की राजनीति में एक बड़ा मोड़ देखने को मिला है, जहां सऊदी अरब ने इजरायल के साथ अपने राजनयिक संबंधों को सामान्य बनाने की उम्मीदों को करारा झटका दिया है. रियाध ने साफ कर दिया है कि जब तक बेंजामिन नेतन्याहू इजरायल के प्रधानमंत्री पद पर हैं, तब तक उनके साथ किसी भी तरह की नॉर्मलाइजेशन डील पर बातचीत नहीं होगी.
सऊदी अरब ने बेंजामिन नेतन्याहू के सत्ता में रहते इजरायल के साथ राजनयिक संबंध स्थापित करने से साफ मना कर दिया है, जिससे अमेरिका की मिडिल ईस्ट शांति योजना को बड़ा झटका लगा है. सऊदी अरब ने नेतन्याहू सरकार की फिलिस्तीन नीतियों को शांति में बाधा बताया है और स्पष्ट किया है कि द्वि-राष्ट्र समाधान के बिना इजरायल से नॉर्मलाइजेशन का एजेंडा आगे नहीं बढ़ सकता.
अमेरिका और इजरायल को लगा बड़ा झटका
सऊदी अरब के इस फैसले से इजरायल ही नहीं बल्कि अमेरिकी प्रशासन को भी गहरा झटका लगा है. अमेरिका लंबे समय से इजरायल और सऊदी अरब के बीच ऐतिहासिक समझौता कराने का प्रयास कर रहा था. यहाँ तक कि सऊदी अरब को नाटो जैसे सुरक्षा सहयोगी का दर्जा देने की पेशकश भी की गई थी. हालांकि, गाजा युद्ध और नेतन्याहू सरकार की नीतियों के कारण यह प्रक्रिया पूरी तरह ठप हो गई है.
नेतन्याहू की नीतियों से खफा है रियाध
सऊदी राजनयिक सूत्रों के मुताबिक, यह निर्णय किसी व्यक्तिगत दुश्मनी के कारण नहीं बल्कि इजरायल सरकार की फिलिस्तीन विरोधी नीतियों के खिलाफ लिया गया है. सऊदी अरब का मानना है कि वह शांति चाहता है और इजरायल-फिलिस्तीन विवाद का स्थायी समाधान ‘द्वि-राष्ट्र सिद्धांत’ (Two-State Solution) के जरिए देखता है, लेकिन नेतन्याहू इस रास्ते में सबसे बड़ी बाधा बने हुए हैं.
नेतन्याहू के रहते कोई बातचीत नहीं
राजनयिक सूत्रों ने यह भी स्पष्ट किया है कि जब तक नेतन्याहू सत्ता में हैं, सऊदी अरब नॉर्मलाइजेशन को अपने एजेंडे में शामिल नहीं करेगा. सऊदी अरब के अनुसार, नेतन्याहू शांति के पक्षधर नहीं हैं बल्कि वे तनाव को बढ़ावा दे रहे हैं. ऐसे में मौजूदा इजराइली सरकार के नेतृत्व में दोनों देशों के बीच संबंधों का सामान्य होना नामुमकिन के बराबर है.
-भारत एक्सप्रेस
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