मोहम्मद शमी: टेस्ट क्रिकेट ने उन्हें छोड़ दिया, उन्होंने क्रिकेट को नहीं
Mohammed Shami Retirement: मोहम्मद शमी ने टेस्ट क्रिकेट से संन्यास की घोषणा कर दी है. 64 टेस्ट में 229 विकेट. आखिरी टेस्ट 2023 के WTC फाइनल में द ओवल पर ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ. सोचिए-तीन साल से ज्यादा समय तक टेस्ट में मौका नहीं मिला. इसलिए नहीं कि गेंदबाजी भूल गए, या कोशिश करना बंद कर दिया. इसलिए कि बस चुना ही नहीं गया.
अमरोहा से ओवल तक शमी ने सब कुछ दिया. सीम जो जादू की तरह मुड़ती थी. पुरानी गेंद पर रिवर्स स्विंग जो आखिरी सत्र में गेंद को बोलने पर मजबूर कर देती थी. दक्षिण अफ्रीका, इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया-जहां पिच सपाट हो, मैच फिसल रहा हो, वहां शमी को बुलाया जाता था. उन्होंने कभी नहीं कहा “नहीं”. और बदले में क्या मिला? चुप्पी.
एंकिल सर्जरी के बाद, लंबे रिहैब के बाद, उस दर्द के बाद जो किसी ने नहीं देखा, शमी ने वही किया जो सेलेक्टर्स खिलाड़ियों से माँगते हैं. घरेलू क्रिकेट में लौटे. बंगाल के लिए खेले. रंजी ट्रॉफी में 7 मैच में 37 विकेट, औसत 16.72, तीन पांच-विकेट झटके, सेमीफाइनल में जम्मू-कश्मीर के खिलाफ करियर-बेस्ट 8/90. सैयद मुश्ताक अली में 16, विजय हजारे में 15, दलीप ट्रॉफी में ईस्ट जोन के लिए 7 विकेट लेकर टाइटल जीतने में मदद. इस सीजन के रंजी ओपनर में दिल्ली के खिलाफ 5 विकेट, फिर 4/30. और क्या करना था उन्हें?
कॉल का इंतजार करते रह गए शमी
खुद उन्होंने सीजन से पहले कहा था-अगर भारत के लिए मौका नहीं मिला तो यह मेरा नुकसान नहीं. फिर भी स्क्वॉड के बाद स्क्वॉड आया. न्यूजीलैंड दौरा आया और चला गया. नाम नहीं था. फिटनेस, लंबे स्पेल, आगे बढ़ने की बातें हुईं. लेकिन सफेद किट में एक आखिरी मौका कभी नहीं दिया गया.
वे गेंदबाजी करते रहे. विकेट लेते रहे. उस कॉल का इंतजार करते रहे जो कभी नहीं आया. आज वह इंतजार खत्म हो गया. कोई विदाई टेस्ट नहीं. कोई गार्ड ऑफ ऑनर नहीं. ईडन गार्डन्स में भीड़ का खड़ा होना नहीं. बस एक घोषणा. शांत. दर्दनाक. अंतिम. यह संन्यास नहीं है. यह संन्यास लेने के लिए मजबूर किया जाना है.
बेहतर के हकदार थे शमी
शमी बेहतर के हकदार थे. सफेद किट में एक विदाई के. उस पल के जब वे मैदान से उतरते और भारत अभी भी उन पर विश्वास करता. इसके बजाय वे इस अहसास के साथ गए कि उन्होंने सब सही किया, और फिर भी काफी नहीं था.
शुक्रिया शमी. हर उस स्पेल के लिए जिसने हमें विश्वास दिलाया. हर उस विकेट के लिए जिसने हमें सीट से उछाल दिया. शिकायत न करने के लिए, जबकि हक था. आप टेस्ट क्रिकेट में असफल नहीं हुए. टेस्ट क्रिकेट आप में असफल रहा.
ईमानदारी से पूछिए-क्या 229 टेस्ट विकेट वाले खिलाड़ी को कम से कम एक विदाई टेस्ट का हक नहीं था?
6 नंबर की जर्सी 6 नवंबर को विदा
अगर 229 टेस्ट विकेट वाले खिलाड़ी के साथ ऐसा व्यवहार होता है, तो बंगाल, यूपी और हर छोटे शहर के उन युवा तेज गेंदबाजों को क्या संदेश जा रहा है जो भारत के लिए खेलने का सपना देख रहे हैं?
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शमी अभी भी व्हाइट-बॉल क्रिकेट खेलेंगे. लेकिन टेस्ट की वह सफेद जर्सी अब यादों में ही रहेगी-6 नवंबर को मिली थी, 6 नवंबर को ही विदा हुई.
-भारत एक्सप्रेस
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