Ajab Gajab: साल 1940 में फ्लोरिडा के की वेस्ट से एक ऐसा मामला सामने आया, जिसने पूरी दुनिया को हिला दिया. कार्ल टैंजलर, पेशे से रेडियोलॉजिस्ट, ने अपनी मृत मरीज एलेना “हेलेन” मिलाग्रो डी होयोस की लाश कब्र से निकाल ली. वह इस शव को अपने घर ले आया और पूरे सात साल तक उसे अपने पास रखा.
अस्पताल में हुई थी पहली मुलाकात
कार्ल टैंजलर जर्मनी में पैदा हुआ था और बाद में अमेरिका आ गया. वह की वेस्ट के एक अस्पताल में काम करता था. साल 1930 में उसकी मुलाकात 21 वर्षीय एलेना से हुई, जो टीबी से पीड़ित थी. टैंजलर उस समय 50 साल से ज्यादा उम्र का था. वह एलेना के प्यार में पड़ गया और शादी का प्रस्ताव भी रखा, जिसे एलेना ने ठुकरा दिया.
मौत के बाद भी नहीं भूला
25 अक्टूबर 1931 को एलेना की मौत हो गई. टैंजलर ने उसके परिवार को एक शानदार मकबरा बनाने के लिए तैयार किया और खर्च खुद उठाया. लेकिन उसकी असली योजना कुछ और थी. 1933 में वह रात के अंधेरे में मकबरे से एलेना का शव चुरा लाया.
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अजीब तरीके से किया संरक्षण
शव को सड़ने से बचाने के लिए उसने मोम, प्लास्टर ऑफ पेरिस और रेशम का इस्तेमाल किया. सड़े हिस्सों को ढकने के लिए ग्लास की आंखें, विग और कपड़े लगाए. एलेना को सुंदर कपड़े पहनाकर, इत्र लगाकर अपने बिस्तर पर रखा. वह उससे ऐसे बात करता था, जैसे वह जिंदा हो.जांच में खुलासा हुआ कि टैंजलर ने शव के साथ शारीरिक संबंध भी बनाए. यह बात मामले को और भी डरावना बना देती है.
बहन ने खोला राज
एलेना की बहन फ्लोरिंडा को टैंजलर पर शक हुआ.1940 में उसने पुलिस को जानकारी दी. तलाशी में टैंजलर के घर से एलेना का “संरक्षित” शव मिला. यह खबर अखबारों में छपते ही दुनिया भर में सनसनी फैल गई.
कानून में कमी और रिहाई
टैंजलर पर कब्र अपवित्र करने और शव चोरी का आरोप लगा. लेकिन उस समय फ्लोरिडा के कानून में इस तरह के अपराध की स्पष्ट सजा नहीं थी. उसे दो साल की सजा सुनाई गई, पर कब्र चोरी की कानूनी समय-सीमा खत्म हो चुकी थी. नतीजतन, उसे जल्दी ही रिहा कर दिया गया.
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-भारत एक्सप्रेस
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