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Rajasthan Desi Fridge: आज के दौर में अगर घर का फ्रिज एक घंटे के लिए खराब हो जाए, तो हम परेशान हो जाते हैं कि दूध फट न जाए या सब्जियां खराब न हो जाएं. लेकिन क्या आप यकीन करेंगे कि राजस्थान के रेतीले इलाकों में आज भी एक ऐसी तकनीक का इस्तेमाल होता है, जहां बिना बिजली और बिना किसी मशीन के दूध घंटों तक एकदम ताजा और ठंडा बना रहता है? इसे लोग प्यार से ‘जमीन वाला फ्रिज’ कहते हैं. पाली जिले के गांवों और खेतों में इस्तेमाल होने वाला यह देसी जुगाड़ आज के हाई-टेक रेफ्रिजरेटर्स को भी मात दे रहा है.
पुरखों की विरासत
राजस्थान अपनी भीषण गर्मी के लिए जाना जाता है. खेतों में काम करने वाले किसानों और मीलों दूर तक मवेशी चराने वाले चरवाहों के पास न तो बिजली की सुविधा होती है और न ही वे अपने साथ भारी-भरकम फ्रिज ले जा सकते हैं.
ऐसे में हमारे पूर्वजों ने प्रकृति के साथ तालमेल बिठाकर एक ऐसा ‘नेचुरल कूलिंग सिस्टम’ तैयार किया, जो पूरी तरह मिट्टी और पानी पर टिका है. यह तकनीक न केवल किफायती है, बल्कि पर्यावरण को भी कोई नुकसान नहीं पहुंचाती.
कैसे काम करता ये ‘कुदरती चेंबर’?
इस देसी फ्रिज को बनाना बेहद आसान है, लेकिन इसके पीछे का विज्ञान बड़ा जबरदस्त है. इसे तैयार करने के लिए सबसे पहले किसी घने पेड़ की ठंडी छाया वाली जगह चुनी जाती है. वहां जमीन के अंदर एक गहरा गड्ढा खोदा जाता है. इस गड्ढे की तली और किनारों पर पानी छिड़का जाता है ताकि मिट्टी ठंडी हो जाए.
इसके बाद, ताजे दूध से भरे बर्तन को अच्छी तरह बंद करके इस गड्ढे के बीचों-बीच रख दिया जाता है. फिर बर्तन के चारों तरफ इतना पानी भरा जाता है कि वह आधा डूब जाए. ऊपर से बर्तन को ढक्कन या गीले कपड़े से कवर कर दिया जाता है. मिट्टी की नमी और पानी का वाष्पीकरण (Evaporation) मिलकर अंदर का तापमान बाहर के मुकाबले 5 से 10 डिग्री तक कम कर देते हैं. नतीजा यह होता है कि तपती धूप में भी दूध घंटों तक खराब नहीं होता और एकदम ठंडा बना रहता है.
इस्तेमाल करते समय इन बातों का रखें ध्यान
अगर आप भी इस तकनीक को आजमाना चाहते हैं, तो कुछ बातों का ध्यान रखना बहुत जरूरी है. सबसे पहले, जगह हमेशा छायादार होनी चाहिए, क्योंकि सीधी धूप मिट्टी की नमी को सोख लेगी. दूसरा, गड्ढे में डाला जाने वाला पानी ठंडा होना चाहिए. अगर पानी गर्म हुआ, तो वह कूलिंग के बजाय दूध को खराब कर सकता है. समय-समय पर गड्ढे के आस-पास पानी छिड़कते रहना चाहिए ताकि ‘नेचुरल कूलिंग’ की प्रक्रिया लगातार जारी रहे.
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-भारत एक्सप्रेस
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