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आज के समय में अगर 5 मिनट के लिए भी बिजली गुल हो जाए, तो हम बेचैन हो उठते हैं. मोबाइल डिस्चार्ज होने लगे तो हाथ-पांव फूल जाते हैं और बिना पंखे के गर्मी में बैठना तो दूर की बात है. लेकिन राजस्थान के पाली जिले से एक ऐसी कहानी सामने आई है, जिसे सुनकर आप दंग रह जाएंगे. यहां एक परिवार ऐसा भी है जिसने पिछले 7 सालों से अपने घर में ‘रोशनी’ का स्विच तक नहीं दबाया है. यह कोई गरीबी की मजबूरी नहीं, बल्कि एक रूह कंपा देने वाले ‘खौफ’ की दास्तां है.
एक हादसा और मौत का डर
पाली जिला मुख्यालय से करीब 50 किलोमीटर दूर स्थित ऐतिहासिक गांव आऊवा में 45 वर्षीय सालाराम अपने परिवार के साथ रहते हैं. सालाराम, उनकी पत्नी डिंपल और उनके 7 बच्चे, सब के सब पिछले सात सालों से अंधेरे में गुजर-बसर कर रहे हैं. दरअसल, साल 2019 में उनके घर के आंगन में बिजली का एक हाई-वोल्टेज तार टूटकर गिर गया था. उस वक्त पूरा परिवार घर के अंदर ही था.
सालाराम बताते हैं, “वह मंजर याद आते ही आज भी रूह कांप जाती है. अगर उस दिन हम जरा भी इधर-उधर होते, तो आज मेरा पूरा परिवार जिंदा नहीं होता.” बस, उसी दिन से सालाराम के मन में बिजली को लेकर ऐसा डर बैठा कि उन्होंने तुरंत बिजली का कनेक्शन कटवा दिया. उन्हें लगा कि उनके बच्चों की जान से कीमती कुछ भी नहीं है, चाहे उसके लिए उन्हें अंधेरे में ही क्यों न रहना पड़े.
दीये की लौ में पढ़ाई
डिजिटल इंडिया के इस दौर में सालाराम का घर शाम होते ही किसी पुरानी सदी के किस्से जैसा लगने लगता है. सूरज ढलते ही घर में मिट्टी के दीये जला दिए जाते हैं. सात-सात बच्चे उसी मद्धम रोशनी में अपना होमवर्क पूरा करते हैं. घर में बिजली न होने की वजह से पंखे और कूलर का तो सवाल ही नहीं उठता, इसलिए तपती गर्मी और उमस भरी रातों में पूरा परिवार खुले आसमान के नीचे आंगन में सोता है. हद तो तब हो जाती है जब मोबाइल चार्ज करने के लिए भी उन्हें पड़ोसियों के घर के चक्कर लगाने पड़ते हैं.
अंधेरे में भी पीछा नहीं छोड़ रहे हादसे
हैरानी की बात यह है कि जिस खतरे (बिजली) से बचने के लिए परिवार ने अंधेरा चुना, हादसों ने वहां भी उनका पीछा नहीं छोड़ा. इसी साल 24 जनवरी को सालाराम की 15 साल की बेटी किरण दीये की रोशनी में काम कर रही थी, तभी उसके कपड़ों में आग लग गई. वह बुरी तरह झुलस गई और उसे कई दिनों तक अस्पताल में भर्ती रहना पड़ा. इतने बड़े हादसे के बाद भी बिजली का डर इतना हावी है कि परिवार अभी भी नया कनेक्शन लेने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा है.
सालाराम और उनकी पत्नी का कहना है कि वे अब इसी अंधेरे के आदी हो चुके हैं. उन्हें लगता है कि जब उनके बच्चे बड़े और समझदार हो जाएंगे, तभी वे घर में दोबारा बिजली लाएंगे. फिलहाल तो खौफ और यादों के साये में इस परिवार का संघर्ष जारी है.
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-भारत एक्सप्रेस
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