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साइंस या फिर तीसरी आंख: समस्तीपुर में बच्चों का हैरतअंगेज हुनर, बिना देखे पहचान लेते हैं रंग और नोट

समस्तीपुर के रोसड़ा में भाई-बहन आयांश और पल्लवी अपने अद्भुत टैलेंट से सबको हैरान कर रहे हैं. वे आंखों पर पट्टी बांधकर पढ़ सकते हैं और रंगों की पहचान कर सकते हैं. जहां गांव वाले इसे चमत्कार मान रहे हैं, वहीं इसके पीछे ‘मिडब्रैन एक्टिवेशन’ और कड़ी प्रैक्टिस की बात सामने आ रही है.

Blindfold Reading in Samastipur Magic or Science Ayansh and Pallavi stun villagers

अक्सर हम फिल्मों या कहानियों में सुनते हैं कि किसी के पास ऐसी ‘तीसरी आंख’ है जिससे वह बिना देखे सब कुछ जान लेता है. लेकिन बिहार के समस्तीपुर जिले के रोसड़ा प्रखंड में ये कहानी हकीकत बनकर गलियों में चर्चा का विषय बनी हुई है. यहां दो भाई-बहन, आयांश और पल्लवी, अपने एक ऐसे अनोखे टैलेंट का प्रदर्शन कर रहे हैं जिसे देखकर अच्छे-अच्छों के होश उड़ गए हैं. दावा ये है कि ये दोनों बच्चे अपनी आंखों पर मोटी काली पट्टी बांधकर न केवल किताबें पढ़ लेते हैं, बल्कि नोटों के नंबर, मोबाइल की स्क्रीन और रंगों की सटीक पहचान भी कर लेते हैं.

चमत्कार या कोई ट्रिक?

जैसे ही ये खबर फैली, रोसड़ा के इस छोटे से गांव में मेला लग गया. लोग दूर-दूर से यह देखने आ रहे हैं कि क्या वाकई ऐसा मुमकिन है? 12 साल के आयांश राज सिंह और उनकी बहन पल्लवी के घर के बाहर लोगों की कतारें लगी हैं. ग्रामीण इलाकों में तो लोग इसे ‘दैवीय चमत्कार’ मानने लगे हैं. आलम ये है कि कई महिलाएं तो बच्चों को हाथ जोड़कर उनका आशीर्वाद तक ले रही हैं. बच्चों के पिता संतोष कुमार भी इसे भगवान भोलेनाथ की विशेष कृपा मान रहे हैं.

लेकिन जब आप इन बच्चों से बात करते हैं, तो कहानी थोड़ी अलग और दिलचस्प नजर आती है. आयांश का कहना है कि ये कोई रातों-रात हुआ करिश्मा नहीं है. वे पिछले करीब डेढ़ साल से इस हुनर की प्रैक्टिस कर रहे हैं. पल्लवी ने इस अभ्यास की शुरुआत की थी और फिर भाई ने भी इसमें महारत हासिल कर ली.

क्या है मिडब्रैन एक्टिवेशन?

इस पूरे मामले में जहां एक तरफ श्रद्धा और अंधविश्वास का माहौल है, वहीं दूसरी तरफ ‘मिडब्रैन एक्टिवेशन’ (Midbrain Activation) की थ्योरी भी सामने आ रही है. विशेषज्ञों का मानना है कि ये कोई जादुई शक्ति नहीं, बल्कि एकाग्रता (Focus) और दिमाग की एक खास ट्रेनिंग का हिस्सा है. इस तकनीक में बच्चों को इस तरह ट्रेन किया जाता है कि उनकी स्पर्श करने की शक्ति और सुनने की क्षमता इतनी तीव्र हो जाती है कि वे बंद आंखों से भी अपने आसपास की चीजों को ‘महसूस’ करने लगते हैं.

हालांकि, जानकारों का यह भी कहना है कि कई बार इसमें हाथ की सफाई और पट्टी के नीचे से देखने की छोटी-मोटी ट्रिक्स भी शामिल होती हैं, जो अभ्यास के साथ और पुख्ता हो जाती हैं.

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-भारत एक्सप्रेस



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