AI Image
Bengal Election 2026: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव कई मायनों में खास साबित हो रहे हैं. इन चुनावों में एक सबसे उल्लेखनीय पहलू हिंदी भाषी मतदाताओं और उम्मीदवारों को लेकर है. लगातार टीएमसी और उसके समर्थित संगठनों द्वारा ‘बाहरी’ बनाम ‘स्थानीय’ का बेतुका राग अलापा जा रहा है. गरीब मजदूरों और छोटे व्यवसायियों को निशाना बनाया जा रहा है. इसके बावजूद भाजपा ने सूझबूझ और दूरदर्शिता के साथ अपने पुराने, जमीनी और समर्पित हिंदी भाषी कैडरों पर पूरा भरोसा जताया है तथा उन्हें महत्वपूर्ण सीटों से टिकट दिया है.
सबसे महत्वपूर्ण बात ये है कि ये सभी सीटें कोलकाता और उसके आसपास की विधानसभा क्षेत्र हैं. इन उम्मीदवारों को राजनीति विरासत में नहीं मिली, बल्कि उन्होंने अपने लंबे संघर्ष, समर्पण और मेहनत के बल पर ये स्थान हासिल किया है.
उत्तर हावड़ा
भाजपा ने उत्तर हावड़ा से पार्टी के पुराने और युवा नेता उमेश राय को अपना उम्मीदवार बनाया है. कॉलेज के दिनों से भाजपा से जुड़े उमेश राय हावड़ा की राजनीति में एक जाना-पहचाना चेहरा हैं. उनकी पत्नी उत्तर हावड़ा से भाजपा की पहली बार पार्षद चुनी जाने वाली महिला भी रह चुकी हैं. उमेश राय ने प्रदेश स्तर पर भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई हैं.
हावड़ा एक समय कल-कारखानों के लिए विश्व विख्यात था, लेकिन आज यहां सिंडिकेट राज, प्रदूषण, बंद फैक्टरियां, अवैध बिल्डिंग, टूटी सड़कें और गंदगी का अंबार नजर आता है.
चौरंगी
कोलकाता की सबसे महत्वपूर्ण सीटों में शुमार चौरंगी से भाजपा ने हेवीवेट नेता संतोष पाठक को टिकट दिया है. ब्रिटिश काल की छाप वाले इस इलाके में संतोष पाठक आम लोगों के बीच बेहद सहज और उपलब्ध रहते हैं. उनका पूरा राजनीतिक सफर कांग्रेस में बीता, जहां उन्होंने पिछली पांच बार KMC (कोलकाता म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन) के पार्षद के रूप में काम किया. इस बार उन्होंने कांग्रेस छोड़ भाजपा का दामन थामा है.
भाजपा ने उन्हें टीएमसी की कद्दावर नेता और तीन बार की विधायक नयना बंदोपाध्याय (सुदीप बंदोपाध्याय की पत्नी) के खिलाफ उतारा है. संतोष पाठक के लंबे अनुभव और भाजपा संगठन के साथ मिलकर किए जा रहे जोरदार प्रचार से लग रहा है कि ये सीट टीएमसी के लिए पहले जितनी आसान नहीं रह गई है.
बाली
बाली सीट से भाजपा ने अपने पुराने और अनुभवी नेता संजय सिंह को उम्मीदवार बनाया है. संजय सिंह हावड़ा में भाजपा का कमल खिलाने वाले पहले नेताओं में शामिल हैं. हालांकि टीएमसी ने भी यहां हिंदी भाषी उम्मीदवार कैलाश मिश्रा को टिकट दिया है, लेकिन संजय सिंह ने अपने लंबे राजनीतिक अनुभव और मेहनत से माहौल को काफी हद तक बदल दिया है.
धमकियों के बावजूद उन्होंने अपने कार्यकर्ताओं में नया उत्साह भर दिया है और लड़ाई को ‘फिफ्टी-फिफ्टी’ बना दिया है. जहां पहले भाजपा का झंडा उठाने में भी लोग डरते थे, वहां अब रैलियों में बड़ी संख्या में लोग नजर आ रहे हैं.
जोड़ासांको
गुरुदेव रवींद्रनाथ ठाकुर की राजबाड़ी और बड़ाबाजार के लिए प्रसिद्ध जोड़ासांको सीट से भाजपा ने विजय ओझा को टिकट दिया है. विजय ओझा पिछले तीन बार से भाजपा के पार्षद भी हैं. येां उनकी टक्कर टीएमसी के हिंदी भाषी उम्मीदवार और पुराने समाजवादी नेता विजय उपाध्याय से है. मारवाड़ी और हिंदी भाषी बहुल इस क्षेत्र में लड़ाई काफी कड़ी मानी जा रही है. भाजपा के लिए ये सीट रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है.
काशीपुर बेलगछिया
इस सीट से भाजपा ने अपने कद्दावर और पुराने नेता रितेश तिवारी को मैदान में उतारा है. ये क्षेत्र एक समय औद्योगिक गतिविधियों के लिए जाना जाता था, लेकिन आज क्राइम, अवैध घुसपैठ और अनधिकृत निर्माणों के लिए बदनाम है.
रितेश तिवारी उस दौर के नेता हैं जब प्रदेश भाजपा कार्यालय में मुश्किल से दो-चार लोग दिखते थे. उन्होंने राजनाथ सिंह, स्वर्गीय अरुण जेटली, अनुराग ठाकुर और स्मृति ईरानी जैसे बड़े नेताओं के साथ काम किया है. प्रदेश से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक उनकी अच्छी पकड़ है.
पोर्ट कोलकाता पोर्ट सीट से भाजपा ने राकेश सिंह को उम्मीदवार बनाया है. अपनी दबंग छवि और विषम परिस्थितियों में भी कार्यकर्ताओं के साथ खड़े रहने के लिए जाने जाते हैं राकेश सिंह. यहां उनकी सीधी लड़ाई कोलकाता के मेयर और ममता बनर्जी के करीबी फिरहाद हाकिम से है.
ये सीट मुस्लिम बहुल है और एक समय यहां बड़ी संख्या में उत्तर प्रदेश और बिहार के लोग पोर्ट में काम करते थे. आज ये इलाका भी अवैध निर्माणों के लिए जाना जाता है.
अन्य महत्वपूर्ण सीटें
इनके अलावा भाजपा ने कई अन्य सीटों पर भी मजबूत हिंदी भाषी उम्मीदवार उतारे हैं:
- इंटाली: वकील और भाजपा नेत्री प्रियंका टिबरेवाल
- मटियाबरुज: वीर बहादुर सिंह (जिन्हें भाजपा से जुड़ने के कारण गोली भी मारी गई)
- भाटापारा: पवन सिंह
- नोआपारा: पूर्व सांसद और मजबूत नेता अर्जुन सिंह
- जगद्दल: पूर्व आईपीएस अधिकारी राजेश कुमार
- पांडेश्वर: आसनसोल के पूर्व मेयर जितेंद्र तिवारी
- बरारकर: अजय पोद्दार
अर्जुन सिंह और उनके बेटे पवन सिंह को छोड़कर बाकी सभी उम्मीदवार पहली पीढ़ी के राजनेता हैं. इनके पूर्वज तीन-चार पीढ़ी पहले रोजी-रोटी की तलाश में बंगाल आए थे. इन्होंने लोगों के बीच रहकर, मेहनत और समर्पण से अपनी राजनीतिक पहचान बनाई है. आज भाजपा ने इन जमीनी कार्यकर्ताओं पर भरोसा जताया है.
सत्ता परिवर्तन नहीं, स्थानीय बनाम बाहरी की लड़ाई
2026 का बंगाल चुनाव हिंदी भाषी मतदाताओं के लिए एक महत्वपूर्ण मौका है. अब उन्हें अपने मताधिकार का सही उपयोग करते हुए अपने सम्मान, सुरक्षा और भविष्य को मजबूत करने का फैसला करना है. मेहनत और समर्पण से उभरे इन उम्मीदवारों को समर्थन देकर वे न केवल अपनी आवाज को मजबूत कर सकते हैं, बल्कि बंगाल की राजनीति में अपना उचित स्थान भी सुनिश्चित कर सकते हैं.
ये चुनाव सिर्फ सत्ता परिवर्तन का नहीं, बल्कि स्थानीय बनाम बाहरी के झूठे नैरेटिव को चुनौती देने और बंगाल के विकास को नई दिशा देने का भी है.
-भारत एक्सप्रेस
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.




