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ईरान-इजरायल युद्ध 2026: 40 दिनों के महायुद्ध के बाद बदली दुनिया; पाकिस्तान की मध्यस्थता में युद्धविराम, पर क्या खत्म हुआ खतरा?

ईरान और इजरायल के बीच 40 दिनों तक चले भीषण युद्ध के बाद पाकिस्तान की मध्यस्थता में युद्धविराम हो गया है. इस युद्ध ने वैश्विक अर्थव्यवस्था और राजनीति को पूरी तरह बदल दिया है. तेल की कीमतें बढ़ने से रूस को फायदा हुआ है, वहीं नाटो कमजोर पड़ा है.

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फरवरी 28 को शुरू हुए अमेरिका-इजरायल के संयुक्त हमलों और ईरान के जवाबी हमलों के बाद 40 दिनों से ज्यादा चले इस युद्ध ने 8 अप्रैल को पाकिस्तान की मध्यस्थता में दो हफ्ते का नाजुक युद्धविराम (ceasefire) स्वीकार कर लिया. सुप्रीम लीडर अली खामेनेई समेत कई शीर्ष नेता मारे गए, ईरान की मिसाइल और बैलिस्टिक क्षमता को भारी नुकसान पहुंचा, लेकिन रिजीम बची रही. लेबनान में इजरायल के हमले जारी हैं और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मूज अभी भी आंशिक रूप से नियंत्रित है. युद्ध खत्म नहीं हुआ, लेकिन दुनिया पहले ही बदल चुकी है.

10 बिंदुओं पर आधारित ये लेख उन बदलावों को समझाता है जो इस संघर्ष ने वैश्विक व्यवस्था में पैदा किए हैं:

रूस को अनपेक्षित तोहफा

युद्ध से पहले रूसी Urals क्रूड डिस्काउंट पर बिकता था. हॉर्मूज ब्लॉकेड और ग्लोबल सप्लाई डिसरप्शन से तेल की कीमतें आसमान छू गईं. अब रूस का तेल $4 से $15 प्रीमियम पर बिक रहा है. अप्रैल में रूस की तेल टैक्स आय दोगुनी होकर $9 बिलियन पहुंच गई यानी पिछले साल से 10% ज्यादा. पुतिन को यूक्रेन युद्ध के लिए अतिरिक्त अरबों डॉलर का फंड मिल गया. प्रतिबंधों का असर कम हुआ, रूस मजबूत हुआ.

स्ट्रेट ऑफ हॉर्मूज: पहले अनदेखा, अब ‘टोल बूथ’

दुनिया के 20% तेल का रास्ता पहले खुला था. युद्ध में ईरान ने इसे बंद कर दिया. अब ceasefire के बावजूद ईरान और ओमान मिलकर शिप्स से टोल वसूल रहे हैं- एक जहाज के लिए $2.8 मिलियन तक. IRGC ने ‘टोल्ड पैसेज’ खोला. ट्रंप इसे स्वीकार नहीं कर रहे, लेकिन ईरान लेबनान हमलों का हवाला देकर रास्ता बंद रखे हुए है. हॉर्मूज अब हथियार बन गया है, जो भी नियंत्रण करेगा, वो ग्लोबल एनर्जी को नियंत्रित करेगा.

ईरान: सत्ता बची, लेकिन और ताकतवर

अमेरिका-इजरायल का लक्ष्य रिजीम चेंज और न्यूक्लियर प्रोग्राम खत्म करना था. लेकिन ईरान ने ड्रोन और मिसाइलों से जवाब दिया, हॉर्मूज पर कब्जा जमाया और 40 दिन टिका रहा. खामेनेई मारे गए, मगर हार्डलाइनर्स की सत्ता मजबूत हुई. अब ईरान को ‘चौथा ग्लोबल पावर सेंटर’ (US, China, Russia के साथ) कहा जा रहा है. उसकी ज्योग्राफी और ड्रोन टेक्नोलॉजी ने ये साबित कर दिया, जिसे अमेरिका भी पूरी तरह तोड़ नहीं सका.

अरब देशों में असुरक्षा: भारी डिफेंस बजट की मजबूरी

सऊदी, UAE, कुवैत, कतर ये सभी हॉर्मूज पर निर्भर है. युद्ध में उनके तेल एक्सपोर्ट रुके, खाने-पीने का संकट आया (80% आयात हॉर्मूज से), डेसालिनेशन प्लांट्स पर हमले हुए. अब गल्फ देश ईरान से मुआवजा मांग रहे हैं. वे महसूस कर रहे हैं कि अमेरिका की गारंटी पर्याप्त नहीं. नतीजा? आत्मरक्षा के लिए डिफेंस बजट बढ़ाना पड़ेगा- नया हथियार खरीदना, इजरायल से और करीब आना या अपनी सेना मजबूत करना.

NATO: ‘ना के बराबर’ और अमेरिका का संभावित एग्जिट

ट्रंप ने खुलकर कहा कि NATO सहयोगी हॉर्मूज खुलवाने या युद्ध में मदद करने में नाकाम रहे. अब NATO को ‘पेपर टाइगर’ कहा जा रहा है. ट्रंप एडवाइजर और पूर्व NSA जॉन बोल्टन कह रहे हैं कि US exit ‘possible’ है. ट्रंप ने NATO देशों से सैनिक हटाने और कमिटमेंट री-एक्जामिन करने की धमकी दी. युद्ध ने NATO की प्रासंगिकता पर सवालिया निशान लगा दिया.

इजरायल को लेबनान में नया मौका

युद्धविराम ईरान के साथ हुआ, लेकिन लेबनान को बाहर रखा गया. इजरायल ने 9 अप्रैल को लेबनान पर सबसे भारी हमला किया जिसमें 250 से भी ज्यादा मौतें और 100 से भी ज्यादा एयरस्ट्राइक्स हुए. हिजबुल्लाह को निशाना बनाकर इजरायल अपना ‘मैप विस्तार’ (buffer zone या प्रभाव क्षेत्र बढ़ाना) कर रहा है. युद्ध ने इजरायल को लेबनान फ्रंट पर फ्री हैंड दे दिया.

एनर्जी क्राइसिस और इन्फ्लेशन

Brent क्रूड $120 के पार पहुंच गया है. ग्लोबल मार्केट्स में बिकवाली, इन्फ्लेशन बढ़ा. एशिया में ईंधन की कमी, गल्फ में खाने की महंगाई 40-120%. ceasefire के बावजूद हॉर्मूज पूरी तरह नहीं खुला. सुधार में महीनों लगेंगे- महंगाई, रेसेशन का खतरा और सप्लाई चेन बिखरी हुई है.

नया वर्ल्ड ऑर्डर: पोस्ट-वार रीशेपिंग

ईरान अब चौथा पावर सेंटर. रूस को फायदा, चीन चुपचाप देख रहा है. मिडिल ईस्ट में बैलेंस ऑफ पावर बदल गया- गल्फ देश असुरक्षित, इजरायल आक्रामक, ईरान मजबूत. पुराना US-dominated ऑर्डर टूट रहा है.

पाकिस्तान: अलग-थलग से विश्व स्टेज पर वापसी

पाकिस्तान ने ceasefire ब्रोकर किया. US और ईरान दोनों ने इसे माना. शहबाज शरीफ की सरकार ने अपनी कूटनीतिक हैसियत बढ़ाई. पाकिस्तान फिर से ‘गेम चेंजर’ बना- युद्ध समाप्ति में उसकी भूमिका याद रखी जाएगी.

हाइब्रिड वॉरफेयर: अब न्यू नॉर्मल

मिसाइल, ड्रोन, प्रॉक्सी (हिजबुल्लाह), साइबर, इकोनॉमिक ब्लॉकेड (हॉर्मूज)- ये युद्ध पारंपरिक नहीं, हाइब्रिड था. भविष्य के युद्ध इसी मॉडल पर होंगे. कोई भी देश अब केवल फौज नहीं, टेक्नोलॉजी, ज्योग्राफी और इकोनॉमिक लीवरेज से लड़ सकता है.

ये युद्ध किसी की ‘पूर्ण जीत’ नहीं था. अमेरिका-इजरायल ने सैन्य झटका दिया, लेकिन ईरान ने रणनीतिक जीत हासिल की. रूस को फायदा, गल्फ देश घाटे में, NATO कमजोर और विश्व व्यवस्था रीशेप हो रही है. दो हफ्ते का ceasefire कितना टिकेगा, ये अभी सवाल है- खासकर जब इजरायल लेबनान में हमले तेज कर रहा है.

एक बात तय है: 2026 का यह युद्ध सिर्फ मिडिल ईस्ट का नहीं, पूरे विश्व का नया अध्याय है. पुरानी शक्तियां कमजोर हो रही हैं, नई शक्तियां उभर रही हैं. हॉर्मूज अब सिर्फ एक जलडमरूमध्य नहीं, बल्कि नई वैश्विक शक्ति का प्रतीक बन गया है.

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-भारत एक्सप्रेस



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