निवेश से एक्सपोर्ट तक, कैसे यूपी बन रहा बिजनेस हब? जानें मंत्री नंद गोपाल नंदी की भूमिका
UP Investment Hub: उत्तर प्रदेश को निवेश और कारोबार का बड़ा केंद्र बनाने की कोशिशों में इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट, निवेश प्रोत्साहन, एक्सपोर्ट और इंफ्रास्ट्रक्चर की क्या भूमिका है? जानें पूरा मॉडल.
यंग तुर्क की विरासत: कैसे बलिया की क्रांति आज भी उत्तर प्रदेश के राजनीतिक मिजाज को गढ़ रही?
Chandra Shekhar Young Turk: बलिया के पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर को ‘यंग तुर्क’ कहा गया, लेकिन इस शब्द की जड़ें ऑटोमन साम्राज्य के एक ऐतिहासिक राजनीतिक आंदोलन से जुड़ी हैं.
ग्रीन रिवोल्यूशन 2.0: कैसे सूर्य प्रताप शाही ने यूपी की कृषि अर्थव्यवस्था को आधुनिक बनाया
UP Agriculture में डिजिटल खेती, कृषि रिसर्च, प्राकृतिक खेती, सोलर पंप और बेहतर बाजार व्यवस्था पर जोर बढ़ रहा है. जानें ग्रीन रिवोल्यूशन 2.0 के प्रमुख पहलू.
पाइप बिछाने से आगे की कहानी: कैसे स्वतंत्र देव सिंह ने बुंदेलखंड में पानी की किल्लत को दी चुनौती?
UP Politics: बुंदेलखंड में स्वतंत्र देव सिंह के पानी अभियान का मुख्य फोकस घर-घर नल कनेक्शन, भरोसेमंद सप्लाई, त्वरित मरम्मत, जवाबदेही और जल संरक्षण पर है.
7 जीत, अपनी पार्टी और सीबीआई से राहत: कुंडा में कैसे चलता है राजा भैया का एकछत्र राज?
UP Politics; लगातार 7 जीत, निर्दलीय से अपनी पार्टी का सफर और सीबीआई कोर्ट से बड़ी राहत! जानिए कुंडा में राजा भैया (रघुराज प्रताप सिंह) के दशकों पुराने राजनीतिक वर्चस्व और दबदबे की इनसाइड स्टोरी.
अस्पतालों के औचक निरीक्षण से सख्त फैसलों तक: जानिए बृजेश पाठक के ‘हेल्थ मॉडल’ के 5 बड़े बदलाव
UP Budget 2026-27: उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक के स्वास्थ्य सुधारों का ध्यान अस्पतालों के निरीक्षण, बुनियादी ढांचे, डॉक्टरों व कर्मचारियों की तैनाती, जांच सुविधाओं और निजी क्षेत्र की जवाबदेही पर केंद्रित है.
भीम आर्मी से सांसद बनने की पूरी कहानी: हाथ में संविधान लेकर युवाओं की सबसे बड़ी ताकत कैसे बने चंद्रशेखर?
Western UP Politics: चंद्रशेखर आजाद ने संवैधानिक अधिकारों, शिक्षा, गरिमा, जमीनी सक्रियता और राजनीतिक प्रतिनिधित्व के इर्द-गिर्द पश्चिमी यूपी में युवा आंदोलन का निर्माण किया.
पूर्वांचल के किंगमेकर: ओम प्रकाश राजभर ने उप-जाति की पहचान को कैसे बनाया राजनीतिक पूंजी
पूर्वांचल की राजनीति में ओम प्रकाश राजभर एक ऐसा नाम हैं, जिन्होंने अपनी उप-जाति की पहचान को मजबूत राजनीतिक पूंजी में बदल दिया है. चुनावी उतार-चढ़ाव के बावजूद बड़े दलों के लिए वे आज भी बेहद अहम हैं.
भूमिहीन, मजदूरी और सम्मान: बिहार के गांवों में आज भी क्यों कायम है वामपंथ की पकड़?
बिहार में वामपंथ सिर्फ एक चुनावी ताकत नहीं है, बल्कि यह जमीन, मजदूरी और सम्मान की एक ग्रामीण आवाज है. चुनावी उतार-चढ़ाव के बावजूद गांवों में वाम दलों की प्रासंगिकता आज भी बनी हुई है.
खेती से हुनर तक: जयंत चौधरी का ‘स्किल-बेस्ड’ मॉडल कैसे संवारेगा यूपी के गन्ना किसानों की किस्मत?
उत्तर प्रदेश की गन्ना खेती अब केवल पैदावार तक सीमित नहीं है. जयंत चौधरी के कौशल विकास दृष्टिकोण और सिलिकॉन जैसी व्यावहारिक तकनीकों के साथ यूपी के किसान एक बेहतर और आधुनिक भविष्य की ओर बढ़ रहे हैं.





