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SCO को आतंकवाद के पूरे तंत्र को खत्म करने के लिए एकजुट होना होगा: पीएम मोदी

PM Modi SCO Summit: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के मंच से साफ संदेश दिया कि जब तक आतंकवाद, उसके वित्तपोषण, भर्ती नेटवर्क, कट्टरपंथ फैलाने वाली गतिविधियों और सुरक्षित ठिकानों के खिलाफ मिलकर कार्रवाई नहीं होगी, तब तक क्षेत्रीय सहयोग सार्थक नहीं हो सकता.

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SCO को आतंकवाद के पूरे तंत्र को खत्म करने के लिए एकजुट होना होगा: पीएम मोदी (इमेज-AI)

PM Modi SCO Summit: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के मंच से साफ संदेश दिया कि जब तक आतंकवाद, उसके वित्तपोषण, भर्ती नेटवर्क, कट्टरपंथ फैलाने वाली गतिविधियों और सुरक्षित ठिकानों के खिलाफ मिलकर कार्रवाई नहीं होगी, तब तक क्षेत्रीय सहयोग सार्थक नहीं हो सकता. उन्होंने SCO के लिए भारत के दृष्टिकोण को तीन प्रमुख स्तंभों- सुरक्षा, कनेक्टिविटी और अवसर के रूप में पेश किया. साथ ही यह भी कहा कि विवादों और संघर्षों का समाधान युद्ध के मैदान में नहीं, बल्कि संवाद और कूटनीति के जरिए होना चाहिए.

अब SCO के सामने सबसे बड़ी चुनौती इन सिद्धांतों को व्यवहार में बदलने और एक प्रभावी सामूहिक रणनीति तैयार करने की है.

आतंकवाद पर पीएम मोदी ने क्या कहा?

पीएम मोदी ने कहा कि SCO के सदस्य देशों को आतंकवाद और उसके वित्तपोषण के पूरे तंत्र को खत्म करने के लिए एकजुट होकर काम करना चाहिए. उन्होंने कहा कि आतंकवाद मानवता के लिए एक गंभीर खतरा है और इसके खिलाफ लड़ाई में किसी भी तरह के दोहरे मानदंड नहीं होने चाहिए.

उन्होंने केवल आतंकवादी हमलों की निंदा करने तक बात सीमित नहीं रखी, बल्कि उन व्यवस्थाओं पर भी चोट करने की जरूरत बताई जो आतंकवाद को जिंदा रखती हैं. इसमें धन का प्रवाह, भर्ती नेटवर्क, कट्टरपंथ फैलाने वाली गतिविधियां और सुरक्षित ठिकाने शामिल हैं.

पीएम मोदी का कहना था कि आतंकवाद से निपटने का मतलब केवल हिंसा की घटनाओं को रोकना नहीं है, बल्कि उन सभी स्रोतों को खत्म करना भी है जो आतंकवादी संगठनों को ताकत देते हैं.

भारत का संदेश: आतंकवाद के खिलाफ एक जैसी नीति जरूरी

दुनिया में बढ़ते आतंकवादी हमलों को लेकर भारत का रुख स्पष्ट था कि SCO के सदस्य देश आतंकवाद के खिलाफ चुनिंदा रवैया नहीं अपना सकते.

पीएम मोदी ने दोहरे मानदंडों के खिलाफ चेतावनी देते हुए कहा कि यदि कोई देश एक प्रकार के आतंकवाद की निंदा करे और दूसरे को नजरअंदाज या समर्थन दे, तो आतंकवाद विरोधी प्रतिबद्धता की विश्वसनीयता खत्म हो जाती है.

भारत का मानना है कि SCO के भीतर एक मजबूत आतंकवाद-रोधी व्यवस्था तभी बन सकती है जब सभी सदस्य देशों की सोच, दबाव और कार्रवाई में समानता हो.

चरमपंथ समर्थक देशों से घिरे भारत के लिए यह केवल प्रतीकात्मक मुद्दा नहीं है. SCO में अलग-अलग रणनीतिक हितों, सीमा विवादों और सुरक्षा प्राथमिकताओं वाले देश शामिल हैं. यह विविधता तभी ताकत बन सकती है जब सभी इस बात पर सहमत हों कि आतंकवाद को कभी भी राजनीतिक या रणनीतिक साधन के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए.

अगर सभी सदस्य एकजुट होकर काम करें तो संगठन खुफिया सहयोग बढ़ा सकता है, आतंकवाद के वित्तीय स्रोतों को रोक सकता है और चरमपंथी संगठनों के लिए उपलब्ध जगह को सीमित कर सकता है.

SCO की आतंकवाद विरोधी रणनीति में ये कदम शामिल हो सकते हैं:

  • आतंकवाद के वित्तपोषण और अवैध धन के प्रवाह के खिलाफ मजबूत समन्वय.
  • भर्ती नेटवर्क और ऑनलाइन कट्टरपंथ पर कार्रवाई.
  • सुरक्षित ठिकानों और समर्थन तंत्र पर सख्त दबाव.
  • सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर सूचना साझा करना.
  • राजनीतिक सुविधा के लिए आतंकवाद को उचित ठहराने से सामूहिक इनकार.

हालांकि इन कदमों को लागू करने के लिए सदस्य देशों की राजनीतिक इच्छाशक्ति सबसे महत्वपूर्ण होगी. पीएम मोदी ने संकेत दिया कि SCO की विश्वसनीयता केवल घोषणाओं से नहीं, बल्कि कठिन परिस्थितियों में सामूहिक कार्रवाई से तय होगी.

संवाद और कूटनीति ही समाधान का रास्ता

आतंकवाद के मुद्दे के साथ-साथ पीएम मोदी ने कहा कि युद्ध, तनाव और संघर्षों का समाधान संवाद और कूटनीति से होना चाहिए. उन्होंने दोहराया कि समस्याओं का स्थायी समाधान युद्ध के मैदान में नहीं मिल सकता.

यह भारत की लंबे समय से चली आ रही नीति को दर्शाता है, जिसमें बातचीत, संयम और राजनीतिक समाधान को प्राथमिकता दी जाती है.

उन्होंने कहा कि आतंकवाद अक्सर संघर्ष, कमजोर शासन व्यवस्था और अविश्वास वाले माहौल में पनपता है. इसलिए सुरक्षा और स्थिरता को साथ लेकर चलना जरूरी है.

उनका संदेश खास तौर पर उन देशों के लिए महत्वपूर्ण था जो सीमा पार सुरक्षा चुनौतियों, अस्थिरता और भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा का सामना कर रहे हैं.

भारत का मानना है कि आतंकवाद विरोधी सहयोग और कूटनीति एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं. मजबूत सुरक्षा सहयोग हिंसा के खतरे को कम करता है, जबकि संवाद के रास्ते बड़े संघर्षों को रोकने में मदद करते हैं.

कनेक्टिविटी पर भारत की शर्तें

पीएम मोदी ने कहा कि भारत ऐसे कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट्स का समर्थन करता है जो बाजारों को जोड़ें, व्यापार बढ़ाएं और विकास के नए अवसर पैदा करें. लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसे सभी प्रोजेक्ट्स को देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करना होगा.

भारत का मानना है कि सड़क, रेल, बंदरगाह और डिजिटल नेटवर्क जैसे प्रोजेक्ट क्षेत्रीय विकास को गति दे सकते हैं. लेकिन यदि वे संप्रभुता संबंधी चिंताओं को नजरअंदाज करते हैं, तो सहयोग के बजाय विवाद का कारण बन सकते हैं.

पीएम मोदी ने साफ किया कि भारत कनेक्टिविटी के खिलाफ नहीं है, बल्कि ऐसी कनेक्टिविटी का विरोध करता है जो सहमति, पारदर्शिता और क्षेत्रीय संवेदनशीलताओं को नजरअंदाज करे.

भारत की नजर में अच्छी कनेक्टिविटी के प्रमुख सिद्धांत:

  • परियोजनाओं की शुरुआत से ही पारदर्शिता और आपसी सहमति.
  • ऐसे मार्ग जो किसी देश की क्षेत्रीय अखंडता को प्रभावित न करें.
  • ऐसा वित्तपोषण जो अत्यधिक निर्भरता न पैदा करे.
  • स्थानीय अर्थव्यवस्था को लाभ पहुंचाने वाला बुनियादी ढांचा.
  • सभी भागीदार देशों के लिए समान अवसर.

भारत का मानना है कि विकास और विश्वास एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं. यदि SCO को अवसरों का मंच बनना है, तो कनेक्टिविटी को समावेशी और राजनीतिक रूप से स्वीकार्य बनाना होगा.

SCO सहयोग के लिए भारत के तीन प्रमुख स्तंभ

भारत ने SCO को केवल एक रणनीतिक संगठन नहीं, बल्कि सभ्यताओं, संस्कृतियों और विचारों के संगम के रूप में बताया.

पीएम मोदी ने SCO के लिए भारत के तीन प्रमुख स्तंभों का उल्लेख किया:

1. सुरक्षा

भारत के संदेश की नींव सुरक्षा है. आतंकवाद, संगठित अपराध और कट्टरपंथ के खिलाफ मजबूत कार्रवाई के बिना आर्थिक सहयोग कमजोर रहेगा. पीएम मोदी ने आतंकवाद के वित्तपोषण और सुरक्षित ठिकानों को खत्म करने पर विशेष जोर दिया.

2. कनेक्टिविटी

कनेक्टिविटी सुरक्षा और समृद्धि के बीच पुल का काम करती है. बेहतर संपर्क व्यापार, आवाजाही और बाजारों तक पहुंच बढ़ा सकता है, लेकिन इसके लिए संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान जरूरी है.

3. अवसर

यदि सुरक्षा मजबूत हो और कनेक्टिविटी भरोसेमंद बने, तो सदस्य देश व्यापार, शिक्षा, तकनीक, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और क्षेत्रीय विकास के नए अवसर पैदा कर सकते हैं.

अब SCO को क्या करना चाहिए?

SCO के सामने अब सबसे बड़ा काम इन विचारों को लागू करना है. केवल शिखर सम्मेलनों में भाषण देने से लक्ष्य हासिल नहीं होंगे. इसके लिए ठोस तंत्र, समयबद्ध योजनाएं और जवाबदेही जरूरी होगी.

पीएम मोदी का संदेश साफ था—दोहरे मानदंडों को खत्म किया जाए, आतंकवाद के खिलाफ समन्वय मजबूत किया जाए, कनेक्टिविटी में संप्रभुता का सम्मान हो और विवादों के समाधान के लिए कूटनीति को प्राथमिकता दी जाए.

भारत SCO को ऐसे मंच के रूप में देखता है जहां सुरक्षा और विकास साथ-साथ आगे बढ़ें.

आतंकवाद को तब तक नहीं रोका जा सकता जब तक उसके वित्तीय स्रोत और समर्थन तंत्र बने रहें. कनेक्टिविटी तब तक सफल नहीं हो सकती जब तक वह संप्रभुता का सम्मान न करे. और संघर्ष तब तक समाप्त नहीं होंगे जब तक देशों के बीच संवाद जारी न रहे.

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इसीलिए पीएम मोदी ने SCO सदस्य देशों से आह्वान किया कि वे मिलकर काम करें, एक जैसी आवाज उठाएं और साझा सिद्धांतों को जमीन पर उतारें. यदि संगठन ऐसा करने में सफल होता है, तो वह केवल एक कूटनीतिक मंच नहीं, बल्कि सुरक्षा, कनेक्टिविटी और विकास का प्रभावी क्षेत्रीय मंच बन सकता है.

-भारत एक्सप्रेस



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