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Anushi




भारत एक्सप्रेस


रूस-यूक्रेनऔर अब इजरायल-हमास... दुनिया पहले ही दो खतरनाक युद्धों को झेल रही है. इस बीच रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने ऐसा फैसला लिया है, जिससे परमाणु हमले का खतरा बढ़ गया है.

इजराइल और हमास के बीच जारी जंग का आज 21वां दिन है। इजराइली सेना ने बताया कि उन्होंने हमास के 5 सीनियर कमांडरों को मार गिराया है। इनमें हमास इंटेलिजेंस का डिप्टी हेड शादी बारूद भी शामिल है।

हमास की बेहद क्रूर मानी जाने वाली मिलिट्री विंग अल-कासिम ब्रिगेड ने इजराइल पर हमला किया। इसका चीफ मोहम्मद देइफ है। यही 7 अक्टूबर को इजराइल पर हुए हमले का मास्टरमाइंड है। देइफ सालों से इजराइल की "मोस्ट वांटेड" लिस्ट में टॉप पर है।

नूपुर शर्मा की गिनती बीजेपी की तेजतर्रार प्रवक्ता के तौर पर होती थी। वह टीवी डिबेट में अक्सर दिखती थीं। पिछले साल जून में उन्होंने पैंगबर साहब पर आपत्तिजनक टिप्पणी की तो दुनियाभर से आपत्तियां जताई जाने लगीं।

देश के 8 पूर्व नौसैनिकों को कतर में फांसी की सजा के बाद भारत अपने नागरिकों को बचाने के लिए एक्टिव हो गया है। हालांकि, पीएम नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री एस जयशंकर के लिए ये मामला इतना आसान नहीं रहने वाला है। कारण है कि कतर के साथ भारत के रिश्ते उतने मधुर नहीं हैं।

कतर में गिरफ्तार किए गए आठ पूर्व भारतीय नौसेना के अफसरों को मौत की सजा सुनाई गई है. भारत ने इस पर हैरानी जताई है. भारत का कहना है कि उन भारतीयों की रिहाई के लिए कानूनी विकल्प तलाशे जा रहे हैं. इन पूर्व अफसरों को गिरफ्तारी में इजरायल कनेक्शन भी सामने आया है.

इजरायल और हमास में जारी जंग के बीच अमेरिका एक नए प्लान में जुट गया है. हमास से निपटने के लिए अमेरिका अंतरराष्ट्रीय गठबंधन बनाने की तैयारी कर रहा है. ठीक इसी तरह का गठबंधन 2014 में इस्लामिक स्टेट के खिलाफ बना था.

चुनावी राजनीति में जीत का सबसे अहम पैमाना जाति को ही माना जाता है, लेकिन मध्यप्रदेश के विधानसभा चुनाव में ठाकुर-ब्राह्मणों की केमिस्ट्री में जाति का ये गणित फेल होता दिख रहा है। 14 फीसदी से भी कम आबादी वाले सामान्य वर्ग को 37 प्रतिशत उम्मीदवारी मिली है।

राजस्थान चुनाव में दोनों ही पार्टियों को एक दूसरे के दो-दो दिग्गज चेहरों ने परेशान कर दिया है। कांग्रेस को दीया कुमारी और राज्यवर्धन सिंह राठौड़ तो वहीं बीजेपी को मुख्यमंत्री गहलोत और पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट के सामने मजबूत चेहरा नहीं मिल रहा है।

राजस्थान की राजनीति में जाट वोट बैंक काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। 2018 में 34 जाट विधायक विधानसभा पहुंचने में कामयाब हुए। यही कारण है कि दोनों प्रमुख राजनीतिक संगठनों के साथ ही अन्य दल भी जाट वोट बैंक को साधने की कोशिश करते नजर आते हैं।