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Prashant Kumar

CEO – Bharat Express Digital
Chief Advisor to the Chairman & Managing Director and Editor-in-Chief

Mr. Prashant Kumar is a digital, media and growth transformation leader with 18+ years of experience across strategy, technology, AI, marketing and business transformation, having worked with leading organisations including Amazon, IBM, Adidas and Tata Consumer Products.

At Bharat Express, he leads transformation, audience growth, technology, partnerships, monetisation and new business initiatives to build a scalable, future-ready media ecosystem.

भारत एक्सप्रेस


India Malaysia Semiconductor Partnership: भारत और मलेशिया निवेश, प्रतिभा और एडवांस्ड पैकेजिंग के जरिए सप्लाई चेन को मजबूत करने के लिए सेमीकंडक्टर सहयोग को और गहरा कर रहे हैं.

टीवी ब्रिक्स और ग्लोबल साउथ के मीडिया संस्थान पश्चिमी मीडिया के एकतरफा वर्चस्व को चुनौती दे रहे हैं. इनका मकसद वैश्विक मुद्दों पर निष्पक्ष और बहुआयामी नजरिया पेश करना है.

BRICS Debt Restructuring: BRICS के कर्ज पुनर्गठन तंत्र विकासशील अर्थव्यवस्थाओं को कर्जदाताओं के ज्यादा विकल्प, वित्तीय साधन और Paris Club मॉडल के विकल्प उपलब्ध कराते हैं. कर्ज के दबाव से जूझ रहे देशों के लिए इसका व्यावहारिक फायदा विकल्पों की संख्या बढ़ना है.

भारत, रूस और दक्षिण-पूर्व एशिया के बीच सीधी उड़ानों और यूपीआई पेमेंट्स ने यात्रा को आसान बना दिया है. अब यूरोपीय देशों के रास्ते के बिना एशिया में सफर करना बेहद सुगम हो गया है.

BRICS Local Currency Bridge: BRICS के लोकल करेंसी ब्रिज आयातकों को B2B भुगतान के वैकल्पिक रास्ते देते हैं, जिससे मुद्रा लागत, भुगतान निपटान के समय और व्यापारिक जोखिमों को बेहतर तरीके से संभालने में मदद मिलती है.

ब्रिक्स देशों ने आयुर्वेद और ट्रेडिशनल चाइनीज मेडिसिन जैसी वैकल्पिक चिकित्सा पद्धतियों को वैश्विक स्तर पर मानकीकृत करने के लिए रोडमैप तैयार किया है. इसका मकसद सुरक्षा और गुणवत्ता तय करना है.

नई दिल्ली में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन (12-13 सितंबर 2026) ने वैश्विक कूटनीति के पटल पर भारत की रणनीतिक स्वायत्तता की एक बेहतरीन मिसाल पेश की है.

जब भी हम अंतरराष्ट्रीय मंचों और ब्रिक्स (BRICS) जैसे बड़े संगठनों की बात करते हैं, तो अक्सर हमारे दिमाग में बड़ी-बड़ी बैठकें और समझौतों के कागजात आते हैं. लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लीडरशिप में भारत की ब्रिक्स कूटनीति सिर्फ प्रोटोकॉल तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसमें एक गहरी सिविलिज़ेशनल सोच दिखती है.

अंतरराष्ट्रीय मंचों पर जब भी बड़े-बड़े वादे होते हैं, तो अक्सर ऐसा देखा गया है कि सम्मेलन खत्म होने के बाद कैमरे बंद हो जाते हैं, नेता अपने-अपने घर लौट जाते हैं और उन वादों की फाइलों पर धूल जमने लगती है. लेकिन भारत ने अब इसको बदलने की पूरी तैयारी कर ली है.

चीन के नेतृत्व में ब्रिक्स देश लिथियम, रेयर अर्थ (दुर्लभ खनिज), निकल और ग्रेफाइट की प्रमुख सप्लाई चेन को बड़े पैमाने पर प्रभावित कर रहे हैं, जो पूरी दुनिया के इलेक्ट्रिक वाहन (EV) उद्योग की रीढ़ हैं.