रजनीश कपूर, वरिष्ठ पत्रकार
भारत एक्सप्रेस
नेपाल विमान हादसा: दोष किसका?
विमान दुर्घटना के कारणों में एक ऐसा कारण भी होता है जिसकी चर्चा बहुत कम होती है. ‘पायलट की थकान’ के बारे में बहुत कम बात की जाती है.
उपद्रवी हवाई यात्रियों पर लगे कड़ा अंकुश
‘नो फ्लाई लिस्ट’ एक अच्छी पहल है. इसमें भी परिवर्तन की जरूरत है. जैसे ड्राइविंग लाइसेंस में एक से अधिक बार चालान होने पर उसे दर्ज किया जाता है.
कंझावला कांड और दिल्ली पुलिस
पीड़िता के पोस्टमॉर्टम से पहले ही दिल्ली पुलिस के अधिकारी ने मीडिया में बयान दिया कि यह मामला ‘हत्या’ का नहीं बल्कि ‘दुर्घटना’ का है.
कोचर और धूत ही गिरफ्तार क्यों?
देश की शीर्ष जांच एजेंसियों का सिद्धांत यह होना चाहिये कि किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। फिर वो चाहे किसी भी विचारधारा या राजनैतिक पार्टी का समर्थक ही क्यों न हो।
अध्यापकों को भी मिले ग्रेच्युटी की रकम
स्कूल प्रशासन ने 11 नवम्बर 2022 को, मामले की सुनवाई की पहली तारीख़ पर ही ग्रेच्युटी देने की माँग को स्वीकार लिया और मामला रद्द करने की अपील की.
विपक्ष का एकजुट होना लोकतंत्र के लिए जरूरी
चुनाव के बाद तमाम टीवी चर्चाओं में राजनैतिक विश्लेषक इस बात पर खास जोर दे रहे हैं कि विपक्षी दलों को आपस में एकजुट होकर चुनावी मैदान में उतरना चाहिये था.
चेक बाउंस मामलों पर सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला
सुप्रीम कोर्ट के इस फ़ैसले से एक ओर जहां देश के व्यापारी जगत को काफ़ी राहत मिली है. वहीं दूसरी ओर इस क़ानून की धाराओं का भी स्पष्टीकरण हुआ है.
महिला अपराध और पुलिस जांच
महिला सुरक्षा और विकास को लेकर सरकार द्वारा ‘बेटी बचाओ - बेटी पढ़ाओ’ जैसे लुभावने नारे तो जरूर दिये जाते हैं परंतु ये कितने व्यावहारिक साबित होते हैं इसका पता तब चलता है जब मामले में पीड़ित को न्याय मिलता है या नहीं मिलता।
नए दौर की नई कहानी: समय के साथ बदलने की ज़रूरत
1961 में आई फ़िल्म ‘हम हिंदुस्तानी’ का मशहूर गाना, ‘छोड़ो कल की बातें, कल की बात पुरानी’, हमें समय के साथ बदलने की सलाह देता है. टाइपराइटर से कंप्यूटर तक के लंबे सफ़र में हम न जाने कितने बदल गये लेकिन कुछ पुरानी बातों और आदतों को बदलना शायद भूल गये. यदि इन आदतों को …
Continue reading "नए दौर की नई कहानी: समय के साथ बदलने की ज़रूरत"
भारत में दवा उद्योग को भी दवा की ज़रूरत
मशहूर दवा कम्पनी रैनबैक्सी के व्हिसिल ब्लोअर और हेल्थ एक्टिविस्ट के नाम से जाने जाने वाले दिनेश ठाकुर की नई किताब ‘द ट्रूथ पिल’ इन दिनों काफ़ी चर्चा में है. इसके लेखक ने जब इस नामी दवा कम्पनी में हो रही गड़बड़ियों के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाई तो इससे न सिर्फ़ भारत को बल्कि दुनिया भर …







