विनीत नारायण, वरिष्ठ पत्रकार
भारत एक्सप्रेस
क्यों जरूरी था अयोध्या का भव्य विकास?
अगर किसी कारण से किसी प्राण प्रतिष्ठित विग्रह को या उसके मंदिर को विकास की योजनाओं के लिए वहाँ से हटाना आवश्यक हो तो उसका भी शास्त्रों में पूरा विधि-विधान है। जिसका पालन करके उन्हें श्रद्धा पूर्वक वहाँ से नये स्थान पर ले ज़ाया जा सकता है।
नौजवानों में प्रदूषण से बढ़ता कैंसर का खतरा
लगातार चुनाव जीतने की राजनीति में जुटे रहने वाले दल प्रदूषण जैसे गंभीर मुद्दों पर भी आरोप-प्रत्यारोप लगाकर अपने कर्तव्य की इतिश्री कर लेते हैं।
EVM पर रोने से क्या होगा?
बीते कुछ चुनावों में, देश के अलग अलग प्रान्तों में, यह देखा गया है कि इलाके की जनता की भारी नाराज़गी के बावजूद वहां के मौजूदा विधायक या सांसद ने पिछले चुनावों के मुकाबले काफ़ी अधिक संख्या से जीत हासिल की.
संतों को किससे भय लगता है?
‘संतन के ढिग रहत है सबके हित की बात’ की भावना को चरितार्थ करते हुए महाराज ने भागवत जी को एक लंबा प्रवचन दे डाला. जिसका मूल आशय यह था कि संघ और भाजपा सहित देश के सभी राजनैतिक दल रेवड़ियाँ बाँट कर भारत का ‘विकास’ करने का जो दावा कर रहे हैं उससे भारत कभी सुखी और संपन्न नहीं बन सकता.
क्रिकेट की ये दीवानगी कहां ले जायेगी?
चिंता की बात यह है कि पैसे की हवस ने आज खेलों को भी एक उद्योग बना दिया है और खिलाड़ियों को इन उद्योगपतियों का ग़ुलाम। इस मामले में भारत में क्रिकेट पहले नंबर पर है।
सहाराश्री ने संवारी अनगिनत जिंदगियां
पिछले दिनों अमिताभ बच्चन भी अपने पुराने दिनों को याद करके सहाराश्री का हाल पूछने उनके होटल गये थे. ऐसे तमाम लोगों को उनका जाना बहुत खलेगा.
‘ट्वेल्थ फेल’ से युवाओं को सबक
दूसरा अनुभव बिहार के चार लड़कों के साथ हुआ. इनमें से तीन हमारे संस्थान में दो दशकों से कर्मचारी हैं. तीनों बड़े मेहनती हैं. चौथा भाई आईपीएस बनने बिहार से रायपुर (छत्तीसगढ़) चला गया. चार बरस तक तीनों भाई दिन-रात मेहनत करके उसकी हर मांग पूरी करते रहे.
संसद में सवाल पूछने के लिए पैसे लेने का आरोप नया नहीं
वैसे महुआ का कहना है कैश यानी नकद कहां है? कब, कहां, किसने, किसे दिया और क्या सबूत है. यही नहीं, स्वेच्छा से आरोपों के समर्थन में जारी किये गये शपथ पत्र में नकद देने का जिक्र ही नहीं है.
कमरतोड़ महंगाई से आम जनता त्रस्त
बढ़ती हुई महंगाई में गरीबी रेखा से नीचे रहने वाला क्या खाएगा, क्या पहनेगा, कैसे घर में रहेगा, इलाज कैसे कराएगा और बच्चों को कैसे पढ़ाएगा? इसकी चिंता गरीबी की परिभाषा देने वालों को नहीं।
PM मोदी की राह आसान करेगा ‘इंडिया’ गठबंधन!
राहुल गांधी के इस नए तेवर ने और कर्नाटक विधान सभा में कांग्रेस की जीत ने राहुल गांधी को एक आत्मविश्वास दिया कि वे बांहें फैला कर हर विपक्षी दल को ‘इंडिया’ गठबंधन में जोड़ सके।







