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विशाल तलवार




भारत एक्सप्रेस


इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने प्रदेश के गृह सचिव को विपरीत धर्म के नाबालिग जोड़े  को शादी का प्रमाणपत्र देने वाली प्रदेश की आर्य समाज सोसायटियों की डीसीपी रेंक के अधिकारी से जांच कराने का निर्देश दिया है.

यूपी में 5000 स्कूलों के विलय के आदेश पर हाईकोर्ट ने अंतरिम रोक लगा दी है. कोर्ट ने कहा कि बच्चों की शिक्षा और सुरक्षा को देखते हुए पुरानी स्थिति बहाल रखी जाए. याचिकाकर्ताओं ने इसे शिक्षा के अधिकार कानून का उल्लंघन बताया है.

इलाहाबाद हाईकोर्ट में उत्तर प्रदेश सरकार के पूर्व शासकीय अधिवक्ता शिव कुमार पाल को केंद्र सरकार ने डिप्टी सॉलिसिटर जनरल नियुक्त किया है. वरिष्ठ अधिवक्ता शशि प्रकाश सिंह ने उन्हें पदभार ग्रहण कराया और शुभकामनाएं दीं.

सपा नेता और पूर्व विधायक अब्दुल्ला आजम को फर्जी पासपोर्ट और दो पैन कार्ड मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली. हाईकोर्ट ने दोनों याचिकाएं खारिज कर रामपुर के एमपी-एमएलए कोर्ट में चल रहे ट्रायल को जारी रखने का आदेश दिया.

प्रयागराज हाईकोर्ट बार एसोसिएशन की 28 सदस्यीय कार्यकारिणी के चुनाव में 85 फीसदी से ज्यादा मतदान हुआ. मतदान पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा और मतगणना शुक्रवार से शुरू होगी. इस बार भी चुनाव समिति की सख्ती के चलते पंडाल नदारद रहे.

हेट स्पीच मामले में सजा पाए अब्बास अंसारी की पुनरीक्षण याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट 30 जुलाई को सुनवाई करेगा. ट्रायल कोर्ट ने उन्हें IPC की कई धाराओं में दोषी करार दिया था.

प्रयागराज में हाईकोर्ट बार एसोसिएशन की कार्यकारिणी के लिए 23 जुलाई को मतदान होगा. सीसीटीवी निगरानी, नो व्हेकल ज़ोन, और पहचान पत्र अनिवार्यता के साथ सुरक्षा के इंतज़ाम किए गए हैं.

इलाहाबाद हाईकोर्ट में 160 स्वीकृत पदों के मुकाबले केवल 80 न्यायाधीश कार्यरत हैं, जबकि 11.5 लाख से अधिक मामले लंबित हैं. कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार से जवाब तलब करते हुए एक सितंबर तक स्पष्ट निर्देश मांगे हैं.

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मामले में कानून के अनुसार रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश देते हुए मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य को संस्थान के प्रशासनिक कार्य सौंप दिए हैं और डॉ. अपराजिता चौधरी की निदेशक नियुक्ति को फिलहाल स्थगित कर दिया है.

Krishna Janmbhoomi: कोर्ट ने 15 दिन में राष्ट्रीय अखबार में नोटिस प्रकाशित करने का आदेश दिया. कहा कि, वाद में रूचि लेने वाले श्रद्वालु‌ संशोधन अर्जी दायर कर सकते हैं. कोर्ट ने ये भी कहा कि, सभी विपक्षी मुस्लिम समुदाय का प्रतिनिधित्व करते हैं.