बढ़ती बेरोज़गारी एक विकट समस्या
भारत में बढ़ती बेरोज़गारी एक गंभीर समस्या बन चुकी है. सरकारी नौकरियों की भारी मांग, निजी क्षेत्र में गिरते अवसर और अनौपचारिक मज़दूरी ने युवाओं में गहरी हताशा पैदा की है.
ब्रांडेड और जेनेरिक दवाओं के बीच झूलता आम आदमी
भारत में ब्रांडेड और जेनेरिक दवाओं के बीच का अंतर आम मरीजों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है. यह लेख दवाओं के मूल्य, गुणवत्ता, फार्मा कंपनियों की रणनीति और सरकार की योजनाओं के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता की आवश्यकता को उजागर करता है.
महाराष्ट्र में भाषा विवाद
मराठी भाषा विवाद पर आधारित यह लेख बताता है कि भाषा संवाद का माध्यम है, न कि विवाद का कारण. ओशो और स्वामी चैतन्य कीर्ति के विचारों के साथ मराठी भाषा की सांस्कृतिक महत्ता, वर्तमान चुनौतियाँ और समाधान पर विस्तृत दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है.
पुलिस स्टेशनों में सड़ते वाहनों की समस्या
भारत में अपराधों की जांच के दौरान जब्त किए गए वाहनों की लंबी अवधि तक हिरासत में रहने की समस्या न केवल न्याय प्रक्रिया को धीमा करती है, बल्कि पुलिस, समाज और पर्यावरण पर भी बोझ बनती है. इस लेख में जानिए इसके प्रभाव और समाधान.
मुस्लिम राजनीति: सशक्तिकरण की लहर या सियासी सौदेबाज़ी का नया मुखौटा?
Muslim Political Leadership: मुस्लिम समाज नेतृत्वविहीन है, सत्ता में भागीदारी के नाम पर वोट बैंक बनकर रह गया. अब आत्मनिर्भरता, शिक्षा और बौद्धिक भागीदारी की जरूरत है, न कि डर की राजनीति.
हमने आपातकाल से क्या सबक सीखा?
25 जून 1975 को लगा आपातकाल भारत के लोकतंत्र का काला अध्याय है. इंदिरा गांधी ने नागरिक अधिकार छीने, प्रेस पर पाबंदी लगाई और 1.4 लाख लोगों को बिना ट्रायल जेल में डाला. जनता के संघर्ष ने लोकतंत्र को फिर से जिंदा किया.
क्या विमान हादसों का सच सामने आएगा?
अहमदाबाद विमान हादसे और केदारनाथ हेलीकॉप्टर दुर्घटनाओं ने भारत में विमानन सुरक्षा पर सवाल उठाए. जांच समितियों में अनुभव की कमी और डीजीसीए की लापरवाही चिंता बढ़ाती है. क्या सत्य सामने आएगा?
बोइंग पर उठते सवाल!
अहमदाबाद विमान हादसे में 241 की मौत के बीच विश्वास कुमार रमेश अकेले जीवित बचे. बोइंग पर उठे सवालों के बीच जांच एजेंसियों से निष्पक्ष जांच की मांग. यह चमत्कारी बचाव मानव जीवटता की मिसाल बन गया है.
कुर्बानी: सिर्फ रिवायत नहीं, आर्थिक क्रांति, सेवा और साझेदारी का प्रतीक — शाहिद सईद
मुस्लिम राष्ट्रीय मंच ने कहा— बकरीद को केवल धार्मिक त्योहार के रूप में न देखें, बल्कि इसे राष्ट्र निर्माण, आर्थिक उत्थान और मानवता की साझेदारी के सुनहरे अवसर की तरह मनाएँ.
रक्षा परियोजनाओं में देरी क्यों?
एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह ने रक्षा परियोजनाओं में देरी पर चिंता जताते हुए HAL और तेजस Mk1A, Mk2, AMCA प्रोजेक्ट्स की प्रगति पर सवाल उठाए. उन्होंने समयसीमा, जवाबदेही और आत्मनिर्भरता की आवश्यकता पर जोर दिया.







