New UGC Guidelines: अकादमिक और उद्योग के बीच की खाई को पाटेंगी यूजीसी की नई गाइडलाइंस
नई UGC दिशानिर्देशों से भारतीय उच्च शिक्षा में कौशल-आधारित पाठ्यक्रमों को शामिल करने का मार्ग प्रशस्त होगा, जिससे विद्यार्थियों को वास्तविक दुनिया में रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे.
कब सुधरेंगी स्वास्थ्य सेवाएं?
आज पचहत्तर वर्ष बाद भी स्वास्थ सेवााओं की हालत यह है कि गरीब की सेहत सुधरना तो दूर स्वास्थ्य सेवाओं की ही सेहत खराब दिखाई देती है. विभिन्न दलों की सरकारों के शासन के बावजूद नए-नए नारों से, नए-नए वायदों से, नई-नई योजनाओं के सपने दिखाकर देश का पैसा बर्बाद किया जाता रहा है.
ईवीएम एक बार फिर विवादों में
Ballot Paper : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के बयान ने ईवीएम विवाद को फिर से हवा दी. विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग से बैलट पेपर से चुनाव कराने की मांग की है.
मखाना बोर्ड: बिहार को विश्व पटल पर लाने की दिशा में अहम कदम
Makhana Board Bihar: बिहार में मखाना बोर्ड की स्थापना से किसानों को मदद मिलेगी, निर्यात बढ़ेगा, और मखाना उद्योग को वैश्विक स्तर पर पहचान मिलेगी, जिससे राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी.
वाहनों पर ‘प्रेस’, ‘आर्मी’, ‘पुलिस’ लिखे फर्जी स्टिकर लगाने वालों पर नकेल कसेगी बिहार पुलिस
बिहार पुलिस ने प्रेस, आर्मी, पुलिस स्टीकर लगे वाहनों की जांच तेज करने का आदेश दिया है. फर्जी स्टिकर से अपराधियों को रोकने के लिए सख्त कार्रवाई की जाएगी और दोषियों को जेल हो सकती है.
फ्रांस कैसे बन गया अब भारत के सामरिक हितों का दूसरा गारंटर: N Sathiya Moorthy
फर्स्टपोस्ट के एडिटर एन. सत्या मूर्ति ने भारतीय विदेश नीति और भारत-फ्रांस द्विपक्षीय संबंधों की स्थिति पर ओपनियन लिखा. यह ओपनियन भारतीय विदेश नीति, भारत-फ्रांस संबंधों और वैश्विक राजनीति के विभिन्न आयामों पर ध्यान केंद्रित करता है.
फर्जी कॉलेजों के जाल में फंसते मासूम छात्र
देश में सूचना क्रान्ति, उदारीकरण और उपभोक्ता संस्कृति तीनों ने मिलकर गांव और कस्बों के नौजवानों के मन में कुछ नया सीखने और व्यावसायिक जगत में आगे बढ़ने की ललक पैदा कर दी है. उनकी इस ललक को बढ़ाने का काम कर रहे हैं देश भर में कुकुरमुत्ते की तरह उग आए हजारों देसी व विदेशी उच्च शिक्षा संस्थान. इनकी दुकान जितनी ऊंची है, उतनी फीकी भी.
दे दी जान हमने मुल्क की हिफ़ाज़त में… लाल सलाम के नाम पर आतंक का खेल आखिर कब तक?
ज़रूरत है समाज में बैठे उन चेहरों को पहचाने की. ज़रूरत है उनके मंसूबों को मटियामेट करने में सरकार के साथ खड़े होने की. अगर ऐसा नहीं होता है तो नक्सलवाद के नाम पर आज जवानों को निशाना बनाया गया है कल समाज के बेकसूर भी उनके निशाने पर आ सकते हैं.
पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने तीन बार किया पाकिस्तान का दौरा, लेकिन कभी नहीं लौटे अपने गांव ‘गाह’
डॉ. मनमोहन सिंह का जन्म 26 सितंबर 1932 को पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के गाह गांव में हुआ था. बचपन का यह गांव उनके दिल के बेहद करीब था.
डॉ. मनमोहन सिंह: एक अराजनैतिक अर्थशास्त्री, जो बना देश के आर्थिक पुनर्जागरण का पुरोधा
आज पूर्व पीएम डॉ. मनमोहन सिंह जब सदा के लिए मौन हो गए हैं, उनका वो कथन मुझे याद आता है जब उन्होंने कहा था कि "मुझे उम्मीद है कि मीडिया की तुलना में इतिहास मेरे प्रति ज्यादा दयालु होगा."





