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2025 भारतीय रक्षा क्षेत्र में सुधार का वर्ष: रक्षा मंत्रालय

भारत सरकार ने 2025 को “सुधारों का वर्ष” घोषित किया है, जिसका उद्देश्य रक्षा क्षेत्र में सुधार और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना है. इस वर्ष के दौरान कई महत्वपूर्ण नीतिगत फैसले और घोषणाएं होने की उम्मीद है.

Indian Defense sector
Prashant Rai Edited by Prashant Rai

पहली बार, रक्षा मंत्रालय ने 2025 को “सुधारों का वर्ष” घोषित किया है. यह निर्णय ऐसे समय लिया गया है जब भारत में रक्षा उत्पादन FY21 से FY24 तक 50% से अधिक बढ़ा है और पिछले एक दशक में निर्यात में 31 गुना वृद्धि हुई है. यह सफलता नीतिगत सुधारों, स्वदेशीकरण को प्राथमिकता देने, सकारात्मक स्वदेशीकरण सूचियों और विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) नीति को आसान बनाने जैसे उपायों से संभव हुई है.

अब जब एयरो इंडिया, केंद्रीय बजट और रक्षा खरीद नीति (DAP) 2020 में संशोधन की घोषणा होने वाली है, तो बहुत कुछ देखने की उम्मीद है. 2047 तक विकसित भारत के सपने को साकार करने के लिए उठाए गए कदम महत्वपूर्ण हैं. इन्हें निम्नलिखित बिंदुओं में समझा जा सकता है:

नवाचार (Innovation): रिसर्च और डेवलपमेंट (R&D) को स्वदेशी सामग्री के दायरे में शामिल करना होगा. “मेक इन इंडिया” कार्यक्रम और “टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट फंड” (TDF) जैसे प्रयास नवाचार को प्रोत्साहित करते हैं. लेकिन “रेजिडेंट कंट्रोल” जैसे शर्तों को फिर से विचार करना आवश्यक है.

रखरखाव, मरम्मत और ओवरहॉल (MRO): नीति आयोग के अनुसार, भारत का MRO बाजार 2031 तक $4 बिलियन तक पहुंचने की संभावना है. सस्ती लागत, अंग्रेजी बोलने वाली विविध इंजीनियरिंग प्रतिभा के साथ, भारत न केवल इस मांग को पूरा कर सकता है बल्कि एक वैश्विक MRO केंद्र बन सकता है. सरकार ने GST दर को 18% से घटाकर 5% कर दिया है, लेकिन इसे पूरी तरह से छूट देने से यह सिंगापुर जैसे अन्य MRO हब के मुकाबले प्रतिस्पर्धात्मक बनेगा.

खरीद प्रक्रिया में सुधार (Procurement Overhaul): हथियार खरीद प्रक्रिया को समय के अनुसार नहीं बदला गया है. इसे सरल और समयबद्ध बनाने की आवश्यकता है. नए सिस्टम में अंतरराष्ट्रीय सर्वोत्तम प्रथाओं को शामिल करना चाहिए.

उपयुक्त प्रोत्साहन (Appropriate Incentives): उत्पादन-लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) और रियायती कर दरों की सफलता को देखते हुए इसे रक्षा क्षेत्र तक बढ़ाया जाना चाहिए. रक्षा निर्माताओं के लिए 15% रियायती कॉर्पोरेट कर दर लागू की जा सकती है.

पूंजी और क्षमता (Capital and Capability): भारतीय रक्षा क्षेत्र को पूंजी के साथ-साथ उन्नत अर्थव्यवस्थाओं से क्षमताओं की आवश्यकता है. विदेशी मूल उपकरण निर्माताओं (OEMs) की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनियों को “भारतीय विक्रेता” के रूप में मान्यता देने से तकनीकी क्षमता और बौद्धिक संपदा अधिकारों को बढ़ावा मिलेगा.

समुचित बजट (Tenable Budgets): पिछले वर्ष पूंजीगत व्यय में केवल 6% की वृद्धि हुई थी. अब जब 2025 को रक्षा सुधार का वर्ष घोषित किया गया है, तो रणनीतिक महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने के लिए पूंजीगत व्यय में पर्याप्त वृद्धि की आवश्यकता है.

स्वदेशी सामग्री (Indigenous Content): DAP 2020 में OEMs को 50-60% स्थानीय सामग्री का स्रोत भारत से प्राप्त करने की आवश्यकता है. यह लक्ष्य महत्वाकांक्षी है और व्यावहारिक दृष्टि से इसे 30% तक घटाना बेहतर होगा. इसके अलावा, इंजीनियरिंग सपोर्ट, बिक्री के बाद सहायता और कौशल विकास जैसी सेवाओं को प्रोत्साहन देने की आवश्यकता है.

आत्मनिर्भरता की राह (Road to Indigenisation): सरकार और निजी क्षेत्र के बीच करीबी सहयोग आवश्यक है. यह रक्षा क्षेत्र को मजबूत और नवाचारी बनाने के साथ-साथ पर्याप्त बजटीय आवंटन सुनिश्चित करेगा. सरकार उद्योग की चिंताओं को समझने और अपने कदम उठाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है. 2025 के “रक्षा सुधारों के वर्ष” के तहत यह सहयोग भारत के आत्मनिर्भरता के सपने को जल्द साकार करने में मदद करेगा.

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-भारत एक्सप्रेस



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